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Khabaron Ke Khiladi: किन मुद्दों पर होगा यूपी का विधानसभा चुनाव, विश्लेषकों ने बताया किस दल की क्या तैयारी?

Sat, 01 Aug 2026 05:04 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sat, 01 Aug 2026 05:04 PM IST
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Khabaron Ke Khiladi UP Assembly Election 2027 Analysis BJP vs Opposition Preparation news and updates
खबरों के खिलाड़ी। - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश में 2027 की शुरुआत में चुनाव होने हैं। राजनीतिक दलों की ओर से चुनावी तैयारी तेज कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ताबड़तोड़ जनसंपर्क और सभाएं शुरू कर दी है। बीते दो महीन में सीएम ने 100 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों का दौरा किया है। वहीं, विपक्षी दल भी चुनावी तैयारी में लग गए हैं। विपक्ष राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मुद्दा लगातार उठा रहा है। मौजूदा मानसून सत्र में भी इसकी गूंज है। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में यूपी की चुनावी तैयारियों पर ही चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार पीयूष पंत, पूर्णिमा त्रिपाठी, राकेश शुक्ल, हर्षवर्धन त्रिपाठी और श्रीनिवास मौजूद रहे। 
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पीयूष पंत: मेरा मानना है भाजपा के साथ अगड़ी जातियों का वोटर इंटैक्ट है। ये जरूर है कि जो मध्यमवर्ग का वोटर भाजपा के साथ है, उसका वोट चढ़ावा चोरी मामले बाद शिफ्ट हो सकता है। क्योंकि उसका भाजपा से मोहभंग हुआ है। अगर शिफ्ट होता है तो वो किधर जाएगा ये देखना होगा। भाजपा के लिए स्थिति पहले से चुनौतीपूर्ण हुई है। समाजवादी पार्टी भी अपना दायरा बढ़ाने की कोशिश कर रही है। अगर सपा और कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़ते हैं तो ज्यादा चुनौती दे सकते हैं। 
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हर्षवर्धन त्रिपाठी: किसी भी राजनीतिक दल को अपना वोटबैंक बढ़ाने का अधिकार है। मुश्किल यहां ये है कि अखिलेश जब पीडीए कहते हैं तो वो और उनकी पार्टी के लोग उसका कोई एक अर्थ नहीं बताते हैं। इससे लगता है कि पार्टी भ्रमित है। योगी आदित्यनाथ की बात जहां है तो उन्होंने चढ़ावा चोरी के मामले में जिस तरह से त्वरित कार्रवाई की उससे मुझे लगता है कि इसका उन्हें फायदा हो सकता है। योगी आदित्यनाथ को पता है कि चुनाव के समय दूसरे भी कारक काम करते हैं। आज की तारीख के में योगी आदित्यनाथ की साख बहुत अच्छी है। 

श्रीनिवास: चुनाव के वक्त कई बार ऐसा होता है कि जब विपक्ष को जनता के बीच जाना होता है तो वो सीट शेयरिंग में लगे रहते हैं। जब तक वो जनता के बीच जाते हैं तब तक भाजपा आधा मैदान मार चुकी होती है। इस बार इस पर विपक्ष कैसे काम करेगा ये भी अहम होगा। जीएसडीपी की बात जब हम करेंगे यूपी तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। लेकिन प्रति व्यक्ति आय की बात करेंगे तो वो 28 से 30 नंबर पर झूलता रहता है। ये भी देखा जाएगा। क्योंकि वोटर तो प्रति व्यक्ति होता है। जब तक गठबंधन तय नहीं होता तब तक मुद्दे तय नहीं होंगे। 

पूर्णिमा त्रिपाठी: चढ़ावा चोरी की घटना के मामले में जनता इसका ठीकरा योगी आदित्यनाथ पर नहीं फोड़ेगी, ऐसा मुझे लगता है। अगर कांग्रेस और सपा साथ आते हैं तो इसका फायदा दोनों दलों को मिलेगा। ये चीजें अगर हम और आप समझ रहे हैं तो ये बात सपा, कांग्रेस और भाजपा को भी समझ में आता ही होगा। योगी आदित्यनाथ की गवर्नेंस स्टाइल लोगों को पसंद आती है। लेकिन चुनाव जब तक थोड़ा और नजदीक नहीं आता तब तक कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। 

राकेश शुक्ल: किसी भी व्यक्ति को टिकट देने के लिए कई चीजें देखी जाती हैं। आज के दौर में सपा और कांग्रेस का साथ आना एक मजबूरी है। जिस तरह से मुस्लिम मतदाता पिछले कुछ समय से वोट कर रहा है उसे देखकर अखिलेश यादव सतर्क हैं। जिन ब्राह्मण नेताओं का योगी आदित्यनाथ के राज में अपना काम नहीं हो पा रहा है वो ये नरेटिव बना रहे हैं कि ब्राह्मण भाजपा से नाराज है।
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