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Explainer: आंध्र के नए एयरपोर्ट का किस स्वतंत्रता सेनानी पर रखा गया का नाम, नोएडा के हवाई अड्डे से क्या तुलना?
Sat, 01 Aug 2026 05:28 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 01 Aug 2026 05:28 PM IST
सार
जिन अल्लूरी सीताराम राजू के नाम पर इस नए हवाई अड्डे का नाम रखा गया है, वह कौन थे? उनकी ब्रिटिश सरकार से लड़ने की पूरी कहानी क्या है? उनके नाम वाला भोगपुरम एयरपोर्ट कहां स्थित है? इसकी खासियतें क्या-क्या हैं? नोएडा में इसी साल जिस एयरपोर्ट का उद्घाटन किया गया था, उससे इसकी क्या तुलना है? आइये जानते हैं...
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अल्लूरी सीताराम राजू।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को आंध्र प्रदेश के भोगपुरम पहुंचकर राज्य के नए हवाई अड्डे का उद्घाटन किया। पीएम मोदी ने कहा कि पहले जहां देश के हवाई अड्डों के नाम सिर्फ एक परिवार पर केंद्रित होते थे, वहीं अब एयरपोर्ट्स के नाम अलग-अलग विभूतियों पर होते हैं। इसी के साथ उन्होंने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ स्वतंत्रता का मोर्चा खोलने वाले अल्लूरी सीताराम राजू को भी नमन किया, जिनके नाम पर भोगपुरम में स्थित नए एयरपोर्ट का नाम रखा गया है।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर जिन अल्लूरी सीताराम राजू के नाम पर इस नए हवाई अड्डे का नाम रखा गया है, वह कौन थे? उनकी ब्रिटिश सरकार से लड़ने की पूरी कहानी क्या है? उनके नाम वाला भोगपुरम एयरपोर्ट कहां स्थित है? इसकी खासियतें क्या-क्या हैं? नोएडा में इसी साल जिस एयरपोर्ट का उद्घाटन किया गया था, उससे इसकी क्या तुलना है? आइये जानते हैं...
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर जिन अल्लूरी सीताराम राजू के नाम पर इस नए हवाई अड्डे का नाम रखा गया है, वह कौन थे? उनकी ब्रिटिश सरकार से लड़ने की पूरी कहानी क्या है? उनके नाम वाला भोगपुरम एयरपोर्ट कहां स्थित है? इसकी खासियतें क्या-क्या हैं? नोएडा में इसी साल जिस एयरपोर्ट का उद्घाटन किया गया था, उससे इसकी क्या तुलना है? आइये जानते हैं...
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कौन थे अल्लूरी सीताराम राजू, जिनके नाम पर रखा गया हवाई अड्डे का नाम?
अल्लूरी सीताराम राजू की गिनती भारत के महान स्वतंत्रता सेनानियों में की जाती है। उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ बहादुरी से लड़ाई लड़ी। आंध्र प्रदेश के भोगपुरम में बने नए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम उनके सम्मान में ही रखा गया है, जो जाति और क्षेत्र से ऊपर उठकर पूरे आंध्र और दक्षिण भारत में पूजनीय माने जाते हैं।शुरुआती जीवन और नाम: उनका जन्म जुलाई 1897 में आंध्र प्रदेश में हुआ था। उनके पिता एक वकील थे। उनका मूल नाम अल्लूरी राम राजू था। 18 वर्ष की आयु में, अपनी प्रेमिका सीता के असामयिक निधन के बाद उन्होंने सांसारिक जीवन त्याग दिया और अपने नाम के आगे सीता जोड़कर अल्लूरी सीताराम राजू बन गए।
मन्यम वीरुडु नाम से पहचान: वह पूर्वी घाट के घने जंगलों में आदिवासी समुदायों के बीच एक संन्यासी के रूप में रहने लगे। वह पारंपरिक जड़ी-बूटियों और आयुर्वेदिक दवाओं से आदिवासियों का इलाज करते थे, जिसके कारण लोग उन्हें अपना चमत्कारी व्यक्ति मानने लगे और उन्हें मन्यम वीरुडु यानी जंगल के नायक का नाम दिया।
ये भी पढ़ें: Andhra Pradesh: 'आंध्र के विकास का रनवे है नया एयरपोर्ट', भोगपुरम में पीएम ने जनसभा को किया संबोधित; क्या कहा?
अल्लूरी सीताराम राजू।
- फोटो : अमर उजाला
क्या है राजू के ब्रिटिश शासन से जंग की कहानी?
रम्पा विद्रोह का बने चेहरा: जब अंग्रेजों ने 1882 का मद्रास वन अधिनियम लागू किया, तो आदिवासियों को उनके पारंपरिक अधिकारों और 'पोडू' यानी स्थानांतरित खेती से वंचित करना शुरू कर दिया गया। इसके विरोध में राजू ने आदिवासियों को एकजुट किया और 1922 से 1924 के बीच उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश के रम्पा चोडावरम में ऐतिहासिक रम्पा विद्रोह का नेतृत्व किया।गुरिल्ला युद्ध और 'जल, जंगल, जमीन': उन्होंने आदिवासियों की फौज के साथ मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध छेड़ दिया। वे पुलिस स्टेशनों पर अचानक हमला करते, हथियार लूटते और वहां निडरता से एक पर्ची छोड़ जाते थे, जिसमें लूटे गए हथियारों की संख्या लिखी होती थी। उन्होंने स्वराज और स्वदेशी भूमि अधिकारों के लिए जल, जंगल, जमीन का लोकप्रिय नारा दिया था।
प्रेरणा और बलिदान: यूं तो वे शुरुआत में महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन से प्रेरित थे और आदिवासियों को खादी पहनने और नशा मुक्त होने के लिए प्रेरित करते थे, लेकिन बाद में बंगाल के सशस्त्र क्रांतिकारियों से प्रभावित होकर उनका विचार बदल गया। अल्लूरी सीताराम राजू का मानना था कि आजादी केवल बल प्रयोग से ही मिल सकती है। उनकी बढ़ती ताकत को कुचलने के लिए अंग्रेजों ने असम राइफल्स की टुकड़ी को तैनात किया था। अंततः 1924 में उन्हें पकड़ लिया गया और महज 27 वर्ष की कम आयु में उन्हें मृत्युदंड दे दिया गया।
उनका संघर्ष और बलिदान इतना प्रेरणादायक है कि ऑस्कर विजेता भारतीय फिल्म- आरआरआर में अल्लूरी सीताराम राजू और एक अन्य आदिवासी योद्धा कोमाराम भीम के ही जीवन से प्रेरित कहानी को रूपहले पर्दे पर दिखाया गया है।
उनका संघर्ष और बलिदान इतना प्रेरणादायक है कि ऑस्कर विजेता भारतीय फिल्म- आरआरआर में अल्लूरी सीताराम राजू और एक अन्य आदिवासी योद्धा कोमाराम भीम के ही जीवन से प्रेरित कहानी को रूपहले पर्दे पर दिखाया गया है।
अब जानें- कहां स्थित है अल्लूरी सीताराम राजू एयरपोर्ट, आंध्र के लिए क्यों खास?
आंध्र प्रदेश का यह नया हवाई अड्डा विजयनगरम जिले के भोगपुरम में स्थित है। यह राष्ट्रीय राजमार्ग 16 (चेन्नई-कोलकाता कॉरिडोर) के पास रणनीतिक रूप से स्थित है और मुख्य रूप से विशाखापत्तनम (45 किमी), विजयनगरम (20 किमी) और श्रीकाकुलम (60 किमी) तीनों उत्तर-तटीय जिलों के लिए एक अहम केंद्र के तौर पर काम करेगा। इस एयरपोर्ट की सबसे खास बात यह है कि 2014 में आंध्र प्रदेश के तेलंगाना से अलग होने के बाद, यह राज्य में विकसित होने वाला पहला अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है।
अल्लूरी सीताराम राजू एयरपोर्ट की लोकेशन।
- फोटो : अमर उजाला
पुराने एयरपोर्ट में क्या थीं दिक्कतें?
इस नए एयरपोर्ट के उद्घाटन के साथ ही विशाखापत्तनम का पुराना हवाई अड्डा- आईएनएस डेगा, जो कि एक भारतीय नौसेना के एयरबेस के अंदर काम करता था, अब नागरिक सेवा से स्वतंत्र हो जाएगा। गौरतलब है कि आईएनएस डेगा की सैन्य प्राथमिकता की वजह से नागरिक विमानों की उड़ानों का समय सीमित था और यहां बड़े विमान नहीं उतर सकते थे। साथ ही शहर व रक्षा भूमि से घिरे होने के कारण विस्तार की कोई गुंजाइश नहीं बची थी। अब भोगपुरम में नया ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा विशाखापत्तनम की कमर्शियल एविएशन को इन सभी सैन्य बाधाओं से आजाद करेगा।
अब जानें- नए एयरपोर्ट में क्या-क्या खासियतें?
अल्लूरी सीताराम राजू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को विश्वस्तरीय मानकों पर जबरदस्त सुविधाओं के साथ बनाया गया है। यह एयरपोर्ट महज 31 महीनों में तैयार हुआ है, जो कि इसे सबसे तेजी से निर्मित होने वाले ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट्स में से एक बनाता है।
बड़ा दायरा और यात्री क्षमता
बड़े विमानों को संभालने में भी सक्षम
हवाई अड्डे में 3,800 मीटर लंबा कोड 4ई रनवे बनाया गया है। यह बोइंग 777, बोइंग 787 ड्रीमलाइनर, एयरबस ए350 और एयरबस ए330 जैसे बड़े आकार वाले विमानों को आसानी से संभालने में सक्षम है। विमानों की सुचारू आवाजाही के लिए एक बड़े दायरे वाला टैक्सी-वे भी बनाया गया है।
- लगभग 4,727 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस एकीकृत प्रोजेक्ट में 500 एकड़ का एविएशन हब और 137 एकड़ की एविएशन यूनिवर्सिटी भी शामिल है।
- पहले चरण में यह हवाई अड्डा सालाना 60 लाख यात्री की आवाजाही संभालने में सक्षम है। शुरुआत में इसकी क्षमता को 1.8 करोड़ यात्रियों तक बढ़ाने की योजना रखी गई।
- हालांकि, द साउथ फर्स्ट पोर्टल ने हवाई अड्डे का निर्माण कर रही जीएमआर के हवाले से बताया कि विस्तार के बाद एयरपोर्ट की क्षमता को सालाना चार करोड़ यात्रियों तक बढ़ाया जा सकेगा।
बड़े विमानों को संभालने में भी सक्षम
हवाई अड्डे में 3,800 मीटर लंबा कोड 4ई रनवे बनाया गया है। यह बोइंग 777, बोइंग 787 ड्रीमलाइनर, एयरबस ए350 और एयरबस ए330 जैसे बड़े आकार वाले विमानों को आसानी से संभालने में सक्षम है। विमानों की सुचारू आवाजाही के लिए एक बड़े दायरे वाला टैक्सी-वे भी बनाया गया है।
उन्नत तकनीक से बना एयरपोर्ट
रनवे को सुरक्षित लैंडिंग के लिए इसे कैट आई (CAT I) इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) और आधुनिक एलईडी एयरफील्ड लाइटिंग से लैस किया गया है। इसके अलावा इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़ा एक अपग्रेडेड एयरपोर्ट ऑपरेशंस कंट्रोल सेंटर भी मौजूद है।
चक्रवात-रोधी डिजाइन
पूर्वी तट पर तूफानों के खतरे को ध्यान में रखते हुए, हवाई अड्डे की वास्तुकला को बेहद मजबूत बनाया गया है। इसका विशाल ग्लास फैसाड (शीशे का ढांचा) 275 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली तूफानी हवाओं को भी झेल सकता है और इसमें एक एडवांस ड्रेनेज सिस्टम भी है।
अत्याधुनिक कार्गो टर्मिनल
निर्यात को गति देने के लिए इसमें 25,000 मीट्रिक टन की वार्षिक क्षमता वाला एक अलग कार्गो टर्मिनल बनाया गया है। इसमें तापमान-नियंत्रित कोल्ड-चेन जैसी सुविधाएं मौजूद हैं, जो फार्मास्यूटिकल्स, समुद्री भोजन और खराब होने वाले कृषि उत्पादों के वैश्विक परिवहन के लिए बेहद अहम हैं।
रनवे को सुरक्षित लैंडिंग के लिए इसे कैट आई (CAT I) इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) और आधुनिक एलईडी एयरफील्ड लाइटिंग से लैस किया गया है। इसके अलावा इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़ा एक अपग्रेडेड एयरपोर्ट ऑपरेशंस कंट्रोल सेंटर भी मौजूद है।
चक्रवात-रोधी डिजाइन
पूर्वी तट पर तूफानों के खतरे को ध्यान में रखते हुए, हवाई अड्डे की वास्तुकला को बेहद मजबूत बनाया गया है। इसका विशाल ग्लास फैसाड (शीशे का ढांचा) 275 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली तूफानी हवाओं को भी झेल सकता है और इसमें एक एडवांस ड्रेनेज सिस्टम भी है।
अत्याधुनिक कार्गो टर्मिनल
निर्यात को गति देने के लिए इसमें 25,000 मीट्रिक टन की वार्षिक क्षमता वाला एक अलग कार्गो टर्मिनल बनाया गया है। इसमें तापमान-नियंत्रित कोल्ड-चेन जैसी सुविधाएं मौजूद हैं, जो फार्मास्यूटिकल्स, समुद्री भोजन और खराब होने वाले कृषि उत्पादों के वैश्विक परिवहन के लिए बेहद अहम हैं।
आंध्र प्रदेश का नया एयरपोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
पर्यटन-कलात्मक स्तर से विकसित
अंतरराष्ट्रीय पहुंच आसान होने से इस क्षेत्र के समुद्र तटों, आदिवासी संस्कृति, इको-टूरिज्म और बौद्ध विरासत से जुड़े पर्यटन स्थलों को भारी फायदा मिलेगा। एयरपोर्ट के टर्मिनल में स्थानीय वास्तुकला की झलक भी दिखाई गई है। टर्मिनल का डिजाइन उड़ने वाली मछली से प्रेरित है, जो बंगाल की खाड़ी और उत्तर आंध्र की समुद्री विरासत का प्रतीक है।
हवाई अड्डे से रोजगार बढ़ाने की भी तैयारी
हवाई अड्डे के आसपास लॉजिस्टिक्स पार्क, कार्गो टर्मिनल, कमर्शियल डिस्ट्रिक्ट, एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस सुविधाओं और एविएशन ट्रेनिंग संस्थानों के साथ एक पूरी 'एयरोसिटी' विकसित किए जाने की योजना है। ऐसे में यह हवाई अड्डा न सिर्फ यात्रा को सुगम बनाएगा बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा।
1. नोएडा एयरपोर्ट के मुकाबले जल्दी हुआ निर्माण
अंतरराष्ट्रीय पहुंच आसान होने से इस क्षेत्र के समुद्र तटों, आदिवासी संस्कृति, इको-टूरिज्म और बौद्ध विरासत से जुड़े पर्यटन स्थलों को भारी फायदा मिलेगा। एयरपोर्ट के टर्मिनल में स्थानीय वास्तुकला की झलक भी दिखाई गई है। टर्मिनल का डिजाइन उड़ने वाली मछली से प्रेरित है, जो बंगाल की खाड़ी और उत्तर आंध्र की समुद्री विरासत का प्रतीक है।
हवाई अड्डे से रोजगार बढ़ाने की भी तैयारी
हवाई अड्डे के आसपास लॉजिस्टिक्स पार्क, कार्गो टर्मिनल, कमर्शियल डिस्ट्रिक्ट, एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस सुविधाओं और एविएशन ट्रेनिंग संस्थानों के साथ एक पूरी 'एयरोसिटी' विकसित किए जाने की योजना है। ऐसे में यह हवाई अड्डा न सिर्फ यात्रा को सुगम बनाएगा बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा।
नोएडा में इसी साल शुरू हुए एयरपोर्ट से क्या है इसकी तुलना?
1. नोएडा एयरपोर्ट के मुकाबले जल्दी हुआ निर्माण
- औपचारिक तौर पर इसकी आधारशिला चंद्रबाबू नायडू ने फरवरी 2019 में रखी गई थी, लेकिन भूमि अधिग्रहण को लेकर विवाद 2023 में जाकर सुलझ पाए। तब सीएम जगन मोहन रेड्डी ने मई 2023 में इसकी फिर आधारशिला रखी।
- विवाद सुलझने के बाद यह निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ा और 31 महीने के रिकॉर्ड समय में यह पूरा भी हो गया, जो इसे न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया के सबसे तेजी से पूरे होने वाले ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों में से एक बनाता है।
- दूसरी तरफ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की आधारशिला जरूर 25 नवंबर 2021 को रखी गई थी और पहले चरण के सिविल निर्माण का ठेका जून 2022 में दिया गया था। हालांकि, इसके पहले चरण का उद्घाटन 28 मार्च 2026 को हुआ।
- यानी ठेका मिलने से लेकर उड़ानें शुरू होने तक इसके निर्माण में लगभग 52 महीने का समय लगा। निर्माण कार्य में आई देरी की वजह से नोएडा एयरपोर्ट के उद्घाटन की टाइमलाइन लगातार आगे बढ़ाई जाती रही।
2. यात्री क्षमता में नोएडा एयरपोर्ट से पीछे
यात्री क्षमता के मामले में नोएडा एयरपोर्ट ज्यादा बड़ा है। नोएडा एयरपोर्ट के पहले चरण की क्षमता सालाना 1.2 करोड़ यात्रियों की है, जिसे भविष्य में चार चरणों में बढ़ाकर 7 करोड़ तक करने का लक्ष्य है। इसकी तुलना में भोगपुरम एयरपोर्ट के पहले चरण की क्षमता 60 लाख यात्रियों की है, जो कि नोएडा एयरपोर्ट की आधी है। इसे भविष्य में अधिकतम चार करोड़ यात्रियों तक बढ़ाया जा सकता है, जो कि जेवर में स्थित एयरपोर्ट से कम होगा।
3. रनवे की लंबाई में लगभग बराबर
नोएडा एयरपोर्ट में 10/28 डेसिग्नेशन वाला 3,900 मीटर लंबा रनवे बनाया गया है। वहीं भोगपुरम एयरपोर्ट का रनवे 3,800 मीटर लंबा कोड ई तकनीक पर निर्मित है। दोनों ही रनवे बोइंग 777 और एयरबस ए350 जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय विमानों को संभालने में पूरी तरह से सक्षम हैं। नोएडा में भविष्य में रनवे की संख्या बढ़ाकर 2 और लंबे समय में 6 तक करने की भी योजना है।
4. निर्माण लागत
नोएडा एयरपोर्ट के केवल पहले चरण की लागत लगभग 4,588 करोड़ रुपये है। इसके सभी चार चरणों की कुल अनुमानित लागत लगभग 29,561 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। दूसरी ओर भोगपुरम एयरपोर्ट के पहले चरण को लगभग 4,700 करोड़ रुपये की कुल लागत से विकसित किया गया है।
5. रणनीतिक मकसद
नोएडा एयरपोर्ट में 10/28 डेसिग्नेशन वाला 3,900 मीटर लंबा रनवे बनाया गया है। वहीं भोगपुरम एयरपोर्ट का रनवे 3,800 मीटर लंबा कोड ई तकनीक पर निर्मित है। दोनों ही रनवे बोइंग 777 और एयरबस ए350 जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय विमानों को संभालने में पूरी तरह से सक्षम हैं। नोएडा में भविष्य में रनवे की संख्या बढ़ाकर 2 और लंबे समय में 6 तक करने की भी योजना है।
4. निर्माण लागत
नोएडा एयरपोर्ट के केवल पहले चरण की लागत लगभग 4,588 करोड़ रुपये है। इसके सभी चार चरणों की कुल अनुमानित लागत लगभग 29,561 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। दूसरी ओर भोगपुरम एयरपोर्ट के पहले चरण को लगभग 4,700 करोड़ रुपये की कुल लागत से विकसित किया गया है।
5. रणनीतिक मकसद
- नोएडा एयरपोर्ट (उत्तर प्रदेश) मुख्य रूप से दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नए विकल्प के तौर पर बनाया गया है, ताकि इस पर दबाव कम किया जा सके।
- वहीं, भोगपुरम एयरपोर्ट उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश (विशाखापत्तनम, विजयनगरम और श्रीकाकुलम) की अर्थव्यवस्था, पर्यटन और निर्यात को रफ्तार देने के लिए बनाया गया है, ताकि नागरिक उड्डयन को पुराने विशाखापत्तनम नौसैनिक एयरबेस की पाबंदियों से मुक्त किया जा सके।