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Rajasthan: कतर से हीलियम सप्लाई बाधित, MRI जांच पर संकट गहराया; पूर्व स्वास्थ्य मंत्री ने सरकार से मांगा जवाब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: जयपुर ब्यूरो
Updated Fri, 27 Mar 2026 02:53 PM IST
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सार
Jaipur News: राजस्थान के पूर्व चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा ने कतर से हीलियम सप्लाई बाधित होने पर चिंता जताई है। एमआरआई मशीनों के संचालन पर संकट मंडरा रहा है, जिससे मरीजों की जांच प्रभावित हो सकती है और अस्पतालों पर आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका है।
हीलियम गैस की आपूर्ति रुकने से एमआरआई मशीन ऑपरेशन का संकट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजस्थान के पूर्व चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा ने कतर से हीलियम गैस की आपूर्ति बाधित होने के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार को यह जानकारी है कि एमआरआई मशीन के संचालन में हीलियम की कितनी अहम भूमिका होती है और इसके विकल्प के तौर पर क्या तैयारी की गई है।
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दरअसल, एमआरआई (मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग) मशीन में उपयोग होने वाला सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट अत्यंत कम तापमान पर काम करता है, जिसे बनाए रखने के लिए बड़ी मात्रा में हीलियम गैस की आवश्यकता होती है। यह तापमान लगभग माइनस 270 डिग्री सेल्सियस होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक एमआरआई मशीन में करीब 2000 लीटर हीलियम भरी जाती है। पहले इसकी कीमत लगभग 2000 रुपये प्रति लीटर थी, लेकिन मौजूदा वैश्विक हालात में इसमें भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
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हाल ही में कतर में उत्पन्न तनाव और हमले की घटनाओं के कारण वैश्विक हीलियम सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। कतर दुनिया का प्रमुख हीलियम निर्यातक देश है, ऐसे में आपूर्ति रुकने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में 150% तक की वृद्धि देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कीमतें 50% से 200% तक और बढ़ सकती हैं।
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इसका सीधा असर चिकित्सा सेवाओं पर पड़ रहा है। एमआरआई जांच की लागत में 35 से 50 प्रतिशत तक वृद्धि की आशंका जताई जा रही है। अस्पतालों को सलाह दी गई है कि वे हीलियम का सीमित उपयोग करें और केवल अत्यावश्यक मामलों में ही एमआरआई जांच करें। कई अस्पतालों ने पहले ही अपने एमआरआई स्लॉट सीमित करना शुरू कर दिया है।
मेडिकल टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ नामित सोनी का कहना है कि यदि जल्द ही सप्लाई बहाल नहीं होती है, तो छोटे अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटरों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ेगा। इससे न केवल स्वास्थ्य सेवाएं महंगी होंगी बल्कि गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की जांच में भी देरी हो सकती है।
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