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जयपुर में VVIP प्रोटोकॉल पर फिर बवाल; बारिश से बच रहे लोगों को बस शेल्टर से हटाया
Wed, 29 Jul 2026 01:03 PM IST
Sourabh Bhatt
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: Sourabh Bhatt
Updated Wed, 29 Jul 2026 01:03 PM IST
सार
जयपुर में VVIP मूवमेंट के दौरान बारिश से बच रहे लोगों को बस शेल्टर से हटाने का वीडियो वायरल हुआ। मोमोज ठेला प्रकरण के बाद पुलिस के रवैये पर फिर सवाल उठे।
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VVIP मूवमेंट के दौरान बस शेल्टर में खड़े लोगों को हटाया
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी जयपुर में वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान पुलिस के व्यवहार को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। इस बार सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में जेएलएन मार्ग पर भारी बारिश के बीच बस शेल्टर के नीचे खड़े राहगीरों और बाइक सवारों को पुलिसकर्मी कथित तौर पर धक्के देकर वहां से हटाते दिखाई दे रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि यह कार्रवाई वीवीआईपी मूवमेंट के लिए सड़क और आसपास का क्षेत्र पूरी तरह खाली कराने के उद्देश्य से की गई।
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। कई यूजर्स ने सवाल उठाए कि क्या वीवीआईपी सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर बारिश से बच रहे आम नागरिकों को भी खुले में खड़े होने के लिए मजबूर किया जा सकता है? लोगों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है, लेकिन उसे लागू करने का तरीका भी मानवीय होना चाहिए।
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यह पहला मामला नहीं है जब वीवीआईपी ड्यूटी के दौरान पुलिस की कार्रवाई विवादों में आई हो। इससे पहले जगतपुरा के महल रोड पर मुख्यमंत्री के काफिले के लिए रास्ता खाली कराने के दौरान मोमोज का ठेला पलटने की घटना ने भी प्रदेशभर में सुर्खियां बटोरी थीं। ठेला संचालिका रेशु (खुशबू) गुप्ता ने आरोप लगाया था कि उसने खौलते पानी को हटाने के लिए केवल दो मिनट का समय मांगा था, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उसकी बात नहीं सुनी और ठेला पलट दिया। इस दौरान गर्म पानी गिरने से वह गंभीर रूप से झुलस गई थी। मामले ने तूल पकड़ने के बाद संबंधित पुलिसकर्मी को लाइन हाजिर किया गया था।
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने वीवीआईपी प्रोटोकॉल के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि आखिर सुरक्षा व्यवस्था और आम नागरिकों के सम्मान व अधिकारों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाएगा। फिलहाल जेएलएन मार्ग के वायरल वीडियो पर पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। कई यूजर्स ने सवाल उठाए कि क्या वीवीआईपी सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर बारिश से बच रहे आम नागरिकों को भी खुले में खड़े होने के लिए मजबूर किया जा सकता है? लोगों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है, लेकिन उसे लागू करने का तरीका भी मानवीय होना चाहिए।
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यह पहला मामला नहीं है जब वीवीआईपी ड्यूटी के दौरान पुलिस की कार्रवाई विवादों में आई हो। इससे पहले जगतपुरा के महल रोड पर मुख्यमंत्री के काफिले के लिए रास्ता खाली कराने के दौरान मोमोज का ठेला पलटने की घटना ने भी प्रदेशभर में सुर्खियां बटोरी थीं। ठेला संचालिका रेशु (खुशबू) गुप्ता ने आरोप लगाया था कि उसने खौलते पानी को हटाने के लिए केवल दो मिनट का समय मांगा था, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उसकी बात नहीं सुनी और ठेला पलट दिया। इस दौरान गर्म पानी गिरने से वह गंभीर रूप से झुलस गई थी। मामले ने तूल पकड़ने के बाद संबंधित पुलिसकर्मी को लाइन हाजिर किया गया था।
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने वीवीआईपी प्रोटोकॉल के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि आखिर सुरक्षा व्यवस्था और आम नागरिकों के सम्मान व अधिकारों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाएगा। फिलहाल जेएलएन मार्ग के वायरल वीडियो पर पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।