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Jaipur: ईरान हमले और खामनेई की मौत पर विवाद गहराया, राजस्थान में ईद न मनाने के फैसले से उठा नया सवाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: Ashutosh Pratap Singh
Updated Fri, 20 Mar 2026 01:06 PM IST
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सार
जयपुर में शिया मुस्लिम महिलाओं ने इस वर्ष ईद को उत्सव के बजाय शोक के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। यह फैसला ईरान पर हुए हमले और आयतुल्लाह अली खामनेई की कथित मौत के विरोध में लिया गया है।
ईद पर मातम का ऐलान:
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजस्थान की राजधानी जयपुर में शिया मुस्लिम महिलाओं द्वारा इस वर्ष ईद न मनाने के फैसले ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। यह निर्णय ईरान पर हुए हमले और वहां के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामनेई की कथित मौत के विरोध में लिया गया है, जिससे धार्मिक और राजनीतिक स्तर पर बहस तेज हो गई है। जयपुर में विभिन्न धार्मिक संगठनों से जुड़ी महिलाओं की एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि इस बार ईद को उत्सव के बजाय शोक के रूप में मनाया जाएगा। महिलाओं का कहना है कि जिस प्रकार मोहर्रम में मातम किया जाता है, उसी तरह ईद पर भी सादगी और गम का माहौल रहेगा।
विरोध के तौर-तरीके भी तय
महिलाओं ने दावा किया कि इस निर्णय को सुन्नी समुदाय के कुछ परिवारों का भी समर्थन मिल सकता है। योजना के तहत पुरुष केवल प्रतीकात्मक रूप से मस्जिदों में नमाज अदा करेंगे और काली पट्टी या काले वस्त्र पहनकर विरोध दर्ज कराएंगे। इसके साथ ही ईद की नमाज के बाद डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ विशेष दुआ करने की भी बात कही गई है।
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शिया समाज के प्रवक्ता का समर्थन
शिया समाज के प्रवक्ता जाफ़र चकवा ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि जब दूर बैठे लोगों से भावनात्मक जुड़ाव संभव है, तो धार्मिक गुरुओं के प्रति भावनाएं भी स्वाभाविक हैं। उन्होंने इसे आस्था और संवेदनशीलता से जुड़ा विषय बताया। हालांकि, इस फैसले को लेकर कई मुस्लिम संगठनों और अन्य वर्गों में मतभेद भी सामने आ रहे हैं। कुछ लोग इसे धार्मिक स्वतंत्रता का मामला मान रहे हैं, जबकि अन्य इसे सामाजिक सद्भाव पर असर डालने वाला कदम बता रहे हैं। राजस्थान सहित देश के अन्य हिस्सों में भी इस मुद्दे पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह विवाद किस दिशा में जाता है और प्रशासन तथा समाज इसके समाधान के लिए क्या कदम उठाते हैं।
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विरोध के तौर-तरीके भी तय
महिलाओं ने दावा किया कि इस निर्णय को सुन्नी समुदाय के कुछ परिवारों का भी समर्थन मिल सकता है। योजना के तहत पुरुष केवल प्रतीकात्मक रूप से मस्जिदों में नमाज अदा करेंगे और काली पट्टी या काले वस्त्र पहनकर विरोध दर्ज कराएंगे। इसके साथ ही ईद की नमाज के बाद डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ विशेष दुआ करने की भी बात कही गई है।
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शिया समाज के प्रवक्ता का समर्थन
शिया समाज के प्रवक्ता जाफ़र चकवा ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि जब दूर बैठे लोगों से भावनात्मक जुड़ाव संभव है, तो धार्मिक गुरुओं के प्रति भावनाएं भी स्वाभाविक हैं। उन्होंने इसे आस्था और संवेदनशीलता से जुड़ा विषय बताया। हालांकि, इस फैसले को लेकर कई मुस्लिम संगठनों और अन्य वर्गों में मतभेद भी सामने आ रहे हैं। कुछ लोग इसे धार्मिक स्वतंत्रता का मामला मान रहे हैं, जबकि अन्य इसे सामाजिक सद्भाव पर असर डालने वाला कदम बता रहे हैं। राजस्थान सहित देश के अन्य हिस्सों में भी इस मुद्दे पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह विवाद किस दिशा में जाता है और प्रशासन तथा समाज इसके समाधान के लिए क्या कदम उठाते हैं।