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JLF 2025 : इतना पाप ही क्यों करें कि कुंभ स्नान की जरूरत पड़े? JLF में शशि थरूर ने धर्म पर दिया बेबाक बयान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Sun, 02 Feb 2025 03:54 PM IST
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सार
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में पहुंचे कांग्रेस नेता शशि थरूर ने धर्म को लेकर बेबाकी के साथ कहा कि किसी व्यक्ति का धर्म क्या है ये वो खुद तय करेगा ना कि कोई राजनीतिक दल। उन्होंने कहा कि मैं सनातनी हूं और मुझे ये साबित करने की जरूरत नहीं है।
राजस्थान
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जेएलएफ के चौथे दिन फेस्टिवल का हिस्सा बने कांग्रेस नेता शशि थरूर ने धर्म और धार्मिक स्थलों पर जाने को लेकर स्पष्ट बयान दिया है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति का धर्म क्या है, यह वही तय करेगा, न कि कोई राजनीतिक पार्टी। थरूर ने कहा, "मैं राम मंदिर जाऊंगा, लेकिन कब जाऊंगा, यह मैं तय करूंगा, कोई राजनीतिक दल नहीं।"
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उन्होंने आगे कहा कि कुंभ मेले में जाने का विचार किया था, लेकिन भगदड़ जैसी घटनाओं के बाद उन्होंने इसे टाल दिया। थरूर ने कहा, मैं सनातनी हूं और इसके लिए मुझे किसी प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है। धार्मिक स्थलों पर मेरा जाना सिर्फ मेरे मन की इच्छा पर निर्भर करता है, न कि किसी राजनीतिक फायदे पर।
महाकुंभ में स्नान से पाप मिटने के सवाल पर थरूर ने हल्के लहजे में कहा- पाप करते ही क्यों हो यार? उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक आयोजनों का राजनीतिक उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
केंद्रीय बजट पर तीखी प्रतिक्रिया
केंद्रीय बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए थरूर ने कहा कि देश को इस समय रोजगार की आवश्यकता है, लेकिन वित्त मंत्री ने बेरोजगारी का जिक्र तक नहीं किया। उन्होंने कहा- आमदनी दिन-प्रतिदिन घट रही है, जबकि खर्च बढ़ता जा रहा है। थरूर ने यह भी कहा कि बड़े निवेशक देश छोड़ रहे हैं और इसका कारण खोजने की आवश्यकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाया जा रहा है, जिसके कारण छोटे उद्योग रोजगार देने में असमर्थ हैं। इनकम टैक्स छूट पर उन्होंने कहा कि 12 लाख रुपए तक की छूट से मिडिल क्लास तो खुश है, लेकिन जिनके पास रोजगार नहीं है, उनके लिए बजट में कोई राहत नहीं है।
रक्षा क्षेत्र में सबसे ज्यादा आवंटन पर थरूर ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि चीन जैसे देशों को यह संदेश मिलना चाहिए कि भारत ताकतवर है। थरूर ने मांग की कि शिक्षा पर जीडीपी का कम से कम 6 फीसदी खर्च होना चाहिए, जो फिलहाल 4.8 फीसदी है। उन्होंने मनरेगा के बजट में कटौती पर भी नाराजगी जताई और इसे गलत करार दिया।

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