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Jaipur: राजस्थान में ये सात दवाएं क्वालिटी टेस्ट में फेल, सरकार ने लगाई रोक, बाजार से हटाने के आदेश जारी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: जयपुर ब्यूरो Updated Thu, 23 Apr 2026 09:47 AM IST
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सार

Jaipur: राजस्थान में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण आयुक्तालय ने गुणवत्ता परीक्षण में फेल पाई गई सात दवाओं की बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगा दिया है। अप्रैल 2026 के दौरान किए गए परीक्षण में इन दवाओं में सक्रिय तत्व की कमी और घुलनशीलता जैसी खामियां पाई गईं, जो मरीजों के स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण हो सकती हैं।

7 medicines found to be substandard, sale banned; orders to remove them from the market immediately
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

आमजन के स्वास्थ्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण आयुक्तालय ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मानक गुणवत्ता में फेल पाई गई अलग-अलग दवा निर्माता कंपनियों की सात दवाओं के वितरण और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। विभाग ने 1 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026 के बीच किए गए परीक्षण के आधार पर यह सूची जारी की है।

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तुरंत स्टॉक हटाने के निर्देश

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औषधि नियंत्रक, राजस्थान द्वारा सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इन दवाओं का उपलब्ध स्टॉक तुरंत बाजार से हटाया जाए और औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

नियमित जांच में सामने आई खामियां

आयुक्त डॉ. टी. शुभमंगला ने बताया कि विभाग द्वारा नियमित रूप से दवाओं की गुणवत्ता जांच की जाती है, ताकि आमजन तक सुरक्षित और प्रभावी औषधियां पहुंच सकें। इसी क्रम में अप्रैल माह के परीक्षण के दौरान सात दवाएं गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरीं।

इन दवाओं को पाया गया अवमानक
जिन दवाओं को अवमानक पाया गया है, उनमें सेफिक्साइम ओरल सस्पेंशन (लोरैक्सिम ड्राई सिरप), एल्बेंडाजोल टैबलेट, इस्टोकफ-एलएस ड्रॉप्स, मिथाइलोएक्टिव-4 टैबलेट, ओकुफ-डीएक्स सिरप, एक्सटेंसिव-500 टैबलेट और सिप्रोफ्लोक्सासिन टैबलेट शामिल हैं। इन दवाओं के अलग-अलग बैच परीक्षण में Assay और Dissolution जैसे महत्वपूर्ण मानकों पर फेल पाए गए।

मानकों में कमी से बढ़ सकता है स्वास्थ्य जोखिम
कुछ दवाओं में सक्रिय तत्व की मात्रा निर्धारित मानक से कम पाई गई, जबकि कुछ में घुलनशीलता परीक्षण में कमी सामने आई। यह स्थिति मरीजों के उपचार पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है, जिससे स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकता है।

अस्पतालों और दवा विक्रेताओं को सख्त निर्देश
औषधि नियंत्रक अजय फाटक ने बताया कि सभी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, दवा विक्रेताओं और संबंधित संस्थानों को निर्देशित किया गया है कि इन दवाओं का उपयोग और बिक्री तत्काल प्रभाव से बंद करें। साथ ही संबंधित कंपनियों के अन्य बैचों की भी गुणवत्ता जांच सुनिश्चित की जाएगी।े

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नियम उल्लंघन पर होगी सख्त कार्रवाई
विभाग ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस कदम का उद्देश्य प्रदेश में दवाओं की गुणवत्ता बनाए रखना और आमजन को सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।

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