Rajasthan: 49+2 का जवाब भी नहीं दे पाए बच्चे, साधारण जोड़ में फेल, शिक्षा मंत्री के निरीक्षण में खुली पोल
Rajasthan: श्रीगंगानगर में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के औचक निरीक्षण के दौरान सरकारी स्कूलों की गंभीर खामियां उजागर हुईं। छात्रों का शैक्षणिक स्तर कमजोर पाया गया, जहां कक्षा आठवीं के बच्चे सामान्य गणित के सवालों का सही जवाब नहीं दे सके। साथ ही स्कूल में शिक्षकों की अनुपस्थिति, कम छात्र संख्या और बुनियादी सुविधाओं की कमी भी सामने आई।
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श्रीगंगानगर जिले में शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर के औचक निरीक्षण के दौरान सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाहियों की गंभीर तस्वीर सामने आई है। निरीक्षण के दौरान जहां छात्रों का शैक्षणिक स्तर बेहद कमजोर पाया गया, वहीं स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और शिक्षकों की लापरवाही भी उजागर हुई। इस पूरे मामले के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
49+2 कितना होगा जवाब नहीं दे पाया आठवीं का छात्र
निरीक्षण के दौरान मंत्री ने राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय (3 एचएच) के कक्षा आठवीं के छात्रों से सामान्य गणित के सवाल पूछे। जब एक छात्र से पूछा गया कि 49 में 2 जोड़ने पर कितना होगा, तो उसने गलत जवाब देते हुए 60 बताया। यह सुनकर मंत्री ने गहरी नाराजगी जताई और शिक्षकों को फटकार लगाते हुए कहा कि जब आठवीं कक्षा के छात्र को साधारण जोड़ भी नहीं आता, तो पढ़ाई का स्तर किस स्थिति में होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। इसके अलावा अन्य छात्रों से भी बुनियादी शैक्षणिक सवाल पूछे गए, जिनका संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका। इससे यह स्पष्ट हुआ कि स्कूल में पढ़ाई की गुणवत्ता काफी कमजोर है।
कक्षा सातवीं में केवल तीन छात्र
निरीक्षण में यह भी सामने आया कि कक्षा 1 से 8 तक के इस विद्यालय में केवल 32 छात्र नामांकित हैं, जबकि गांव की आबादी लगभग 700 के आसपास बताई गई है। मंत्री ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इतनी आबादी वाले गांव में इतने कम छात्र होना गंभीर चिंता का विषय है और यह शिक्षा व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है। कक्षा सातवीं का निरीक्षण करने पर वहां केवल तीन छात्र उपस्थित मिले, जिससे शिक्षा की स्थिति और भी चिंताजनक नजर आई।
प्रिंसिपल और शिक्षकों की लापरवाही उजागर
निरीक्षण के दौरान स्कूल के प्रिंसिपल गिरजा शंकर अनुपस्थित पाए गए। जांच में सामने आया कि उन्होंने अवकाश स्वीकृत नहीं कराया था। इसके अलावा दो अन्य शिक्षक भी बिना स्वीकृत अवकाश के अनुपस्थित थे। इस लापरवाही पर मंत्री ने कड़ी नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों को इनके खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए। गौरतलब है कि प्रिंसिपल गिरजा शंकर पिछले नौ वर्षों से इसी स्कूल में पदस्थ हैं, जिससे उनकी कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे हैं।
बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी
निरीक्षण के दौरान दूसरे स्कूल (1 डीबीएनडी) में भी कई खामियां सामने आईं। स्कूल 2021 में माध्यमिक से उच्च माध्यमिक में क्रमोन्नत हो चुका है, लेकिन अब भी प्रवेश द्वार पर पुराने माध्यमिक विद्यालय का बोर्ड लगा हुआ था। इसके अलावा शौचालयों में पानी की व्यवस्था नहीं थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि छात्र शौचालय के बाहर ‘छात्र’ और छात्र शौचालय के बाहर ‘छात्रा’ लिखा हुआ पाया गया, जो प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।
सख्त कार्रवाई के संकेत
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने सभी कमियों पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो शिक्षक या प्रिंसिपल अपने कर्तव्यों में लापरवाही बरतते पाए जाएंगे, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूलों का नियमित निरीक्षण होना चाहिए ताकि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सके।
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शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप
मंत्री के औचक निरीक्षण और सख्त रुख के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने अब स्कूलों की व्यवस्थाओं को सुधारने और लापरवाह कर्मियों की सूची तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है, जहां शिक्षा का स्तर, प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी तीनों ही गंभीर सवालों के घेरे में हैं।