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Rajasthan News: फ्री इलाज योजना में 50 फीसदी से ज्यादा क्लेम रिजेक्ट, सरकार ने योजना प्रभारियों को थमाए नोटिस

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: सौरभ भट्ट Updated Thu, 29 Jan 2026 04:41 PM IST
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सार

राजस्थान में मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना (MAA) के तहत सरकारी अस्पतालों की लापरवाही उजागर हुई है। अधूरे दस्तावेज और गलत जानकारी अपलोड करने के कारण बीमा कंपनियां बड़ी संख्या में इलाज के क्लेम रिजेक्ट कर रही हैं, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। हालात गंभीर होने पर मेडिकल एजुकेशन कमिश्नर ने प्रदेश के 28 सरकारी अस्पतालों के प्रमुखों को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा है।

Major Lapses in MAA Scheme, Crores Worth Insurance Claims Rejected, Notices Issued to 28 Government Hospitals
(प्रतीकात्मक फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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राजस्थान में मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना (MAA) के तहत सरकारी अस्पतालो  के क्लेम बड़ी संख्या में बीमा कंपनियों ने रिजेक्ट कर दिए हैं। अधूरे दस्तावेज और गलत जानकारी के चलते कई अस्पतालों में तो लगभग 60 प्रतिशत तक क्लेम रिजेक्ट हो गए। जिससे मरीजों पर बीमारी के इलाज के लिए खुद भुगतान करना पड़ा। इस योजना में ज्यादातर मरीज गरीबी की रेखा के नीचे की श्रेणी वाले हैं, जो प्राइवेट अस्पतालों में इलाज करवाने में सक्षम नहीं है। यह स्थिति तब है जब सरकार इस योजना के तहत बीमा कंपनियों को करोड़ों रुपए के प्रीमियम का भुगतान कर रही है। अब मेडिकल एजुकेशन कमिश्नर नरेश गोयल ने प्रदेश के 28 सरकारी अस्पतालों में योजना प्रभारियों व के तहत क्लेम बुक करने वाले  कार्मिकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा है। गौरतलब है कि  MAA योजना के तहत भर्ती मरीजों के इलाज का खर्च बीमा कंपनी द्वारा वहन किया जाता है। इसके लिए अस्पताल प्रशासन को मरीज से संबंधित बीमारी, इलाज और अन्य जरूरी दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड करने होते हैं। दस्तावेज पूरे होने पर बीमा कंपनी इलाज की राशि संबंधित सरकारी अस्पताल के खाते में ट्रांसफर करती है। लेकिन कई सरकारी अस्पतालों में अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही के चलते मरीजों की जानकारी और जरूरी दस्तावेज अधूरे या गलत अपलोड किए जा रहे हैं। इसी कारण बीमा कंपनियां बड़ी संख्या में क्लेम रिजेक्ट कर रही हैं।

48 फीसदी से ज्यादा तक क्लेम रिजेक्ट

प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में लगभग 60 फीसदी से ज्यादा तक बीमा क्लेम रिजेक्ट होने के मामले सामने आए हैं। सबसे ज्यादा खराब स्थिति सिरोही के राजकीय मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पताल की है, जहां जून 2025 से नवंबर 2025 के बीच 60  फीसदी से ज्यादा क्लेम रिजेक्ट हुए। अस्पताल प्रशासन को जारी किए गए नोटिस में कहा गया है कि MAA  योजना में यहां 3.45 करोड़ रुपए के क्लेम राशि बुक की गई। इसमें से 1.28 करोड़ रुपए के ही क्लेम पास हुए जबकि 1.72 करोड़ रुपये के क्लेम रिजेक्ट हो गए।

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चिकित्सा मंत्री के प्रभारी जिले में हालात खराब

बीकानेर जिले के सरकारी अस्पतालों की स्थिति सबसे चिंताजनक बताई जा रही है। जिले के छह सरकारी अस्पतालों में 25 से 42 फीसदी तक क्लेम रिजेक्ट हुए हैं। बीकानेर चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर का प्रभारी जिला भी है। इसके अलावा जयपुर के सांगानेरी गेट महिला चिकित्सालय, जनाना हॉस्पिटल चांदपोल, सैटेलाइट हॉस्पिटल बनीपार्क और सेठी कॉलोनी स्थित अस्पतालों में भी बड़ी संख्या में क्लेम रिजेक्ट किए गए हैं।


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इन अस्पतालों को जारी हुए नोटिस

नोटिस पाने वाले अस्पतालों में झालावाड़ का जनाना हॉस्पिटल, श्री राजेन्द्र सामान्य हॉस्पिटल, कोटा का न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल और सुल्तानपुर सीएचसी, भरतपुर का राज बहादुर मेमोरियल हॉस्पिटल, अजमेर का सैटेलाइट हॉस्पिटल और महिला चिकित्सालय, जयपुर के जनाना हॉस्पिटल चांदपोल, बनीपार्क सैटेलाइट हॉस्पिटल, सांगानेरी गेट महिला चिकित्सालय और सेठी कॉलोनी स्थित एस.आर. गोयल अस्पताल शामिल हैं। इसके अलावा बीकानेर के पीबीएम महिला एवं चिल्ड्रन हॉस्पिटल, कैंसर, टीबी, ईएनटी और मानसिक स्वास्थ्य संस्थान, बाड़मेर, बूंदी, करौली, सीकर, चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर, हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर और सिरोही के जिला अस्पतालों में भी 20 से 48 फीसदी तक क्लेम रिजेक्शन दर्ज किया गया है।

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