अब गांव-गांव पहुंचेगा स्कूल: राजस्थान में हर जिले के लिए ‘स्कूल ऑन व्हील’ की तैयारी
राजस्थान में राजपहल कार्यक्रम के तहत हर जिले में ‘स्कूल ऑन व्हील’ शुरू करने की तैयारी है। इसका उद्देश्य घुमंतू और स्कूल से बाहर रह गए बच्चों को शिक्षा से जोड़ना है। चलती-फिरती क्लासरूम और विशेष कार्यक्रमों के जरिए बच्चों को मुख्यधारा में लाया जाएगा।
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राजस्थान में अब शिक्षा को बच्चों तक ले जाने की तैयारी हो रही है, ताकि कोई भी बच्चा स्कूल से दूर न रह जाए। राज्य सरकार के राजपहल कार्यक्रम के तहत हर जिले में ‘स्कूल ऑन व्हील’ शुरू करने की योजना बनाई गई है।
इस पहल के तहत स्कूल अब बच्चों का इंतजार नहीं करेगा, बल्कि खुद उनके इलाके, गांव और डेरों तक पहुंचेगा। चलती-फिरती क्लासरूम वैन या बस के जरिए घुमंतू, अर्ध-घुमंतू और स्कूल से बाहर रह गए बच्चों को पढ़ाई से जोड़ा जाएगा।
यह महत्वाकांक्षी योजना राजस्थान बजट 2026-27 में घोषित की गई थी। इसका मकसद उन बच्चों तक पहुंचना है, जो या तो कभी स्कूल नहीं गए या बीच में पढ़ाई छोड़ चुके हैं।
शिक्षा विभाग इस योजना को लागू करने के लिए राइट टू एज्यूकेशन के साथ मिलकर स्कूल रेडीनेस प्रोग्राम भी चला रहा है। इसके तहत बच्चों को स्कूल के माहौल के लिए तैयार किया जाएगा और धीरे-धीरे उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ा जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, इस योजना की हाल ही में समीक्षा बैठक हुई, जिसमें अल्टरनेटिव और फॉर्मल एजुकेशन सेल के अधिकारियों ने विभिन्न एनजीओ प्रतिनिधियों से बातचीत की। बैठक में तय किया गया कि हर जिले में कम से कम एक ‘स्कूल ऑन व्हील’ चलाया जाएगा।
सरकार का फोकस खास तौर पर गाड़िया लोहार, बंजारा जैसे घुमंतू समुदायों और प्रवासी मजदूरों के बच्चों पर रहेगा, जो अक्सर शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।
इसके लिए ऐसे बच्चों की पहचान की जाएगी जो स्कूल से बाहर हैं या बीच में पढ़ाई छोड़ चुके हैं। उन्हें फिर से शिक्षा से जोड़ने के लिए स्कूल रेडीनेस कैंप लगाए जाएंगे और सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाया जाएगा। जरूरत पड़ने पर ड्रॉपआउट बच्चों को राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल से भी जोड़ा जाएगा।