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Jaipur Murder Case: एक कॉल ने खोला नीरज की मौत का राज, नहीं तो सड़क हादसा बनकर रह जाती ‘मर्डर मिस्ट्री’
Sat, 11 Jul 2026 07:17 PM IST
जयपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: जयपुर ब्यूरो
Updated Sat, 11 Jul 2026 07:17 PM IST
सार
जयपुर के चर्चित नीरज शर्मा हत्याकांड में पुलिस जांच के दौरान चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस के अनुसार, एक मुखबिर की सूचना और 100 से अधिक सीसीटीवी फुटेज की जांच से कथित हत्या की साजिश का पर्दाफाश हुआ। जानिए कैसे एक मुखबिर की सूचना से पुलिस ने पूरे मामले को सुलझा दिया।
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मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने खोला राज
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जयपुर के बहुचर्चित नीरज शर्मा हत्याकांड की जांच में सामने आए तथ्यों ने पूरे मामले को और भी सनसनीखेज बना दिया है। पुलिस का दावा है कि यदि एक मुखबिर ने समय रहते अहम सूचना नहीं दी होती, तो यह पूरा मामला शायद हमेशा के लिए एक सामान्य सड़क दुर्घटना मानकर बंद हो जाता। लेकिन एक फोन कॉल ने ऐसी कड़ी जोड़ी, जिसने कथित हत्या की पूरी साजिश का पर्दाफाश कर दिया।
संपत्ति और नौकरी के लालच में रची गई साजिश
पुलिस के अनुसार, मृतका नीरज शर्मा की बेटी आयुषी ने अपने ताऊ के बेटे बलराम उर्फ रवि और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर अपनी मां की हत्या की योजना बनाई। आरोप है कि पिता की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति और मां के नाम दर्ज संपत्ति हासिल करने के लालच में यह पूरी साजिश रची गई। पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने लगभग एक महीने तक नीरज की गतिविधियों पर नजर रखी। वह कब घर से निकलती थीं, किस रास्ते जाती थीं और किस समय लौटती थीं, इसकी लगातार रेकी की गई।
पहले थार से नाकाम कोशिश, फिर स्कॉर्पियो से वार
जांच के अनुसार, पहले थार गाड़ी से हत्या का प्रयास किया गया, लेकिन योजना सफल नहीं हो सकी। इसके बाद एक सफेद स्कॉर्पियो की व्यवस्था की गई। घटना वाले दिन तेज रफ्तार स्कॉर्पियो से नीरज को टक्कर मारी गई, जिससे उनकी मौत हो गई। वारदात के तुरंत बाद आयुषी ने ही अपने मामा को फोन कर मां के एक्सीडेंट में मौत होने की सूचना दी, ताकि किसी को हत्या का शक न हो।
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मुखबिर की सूचना बनी सबसे बड़ा सुराग
घटनास्थल पर पहुंची पुलिस को शुरुआती जांच में केवल इतना पता चला कि सफेद रंग की स्कॉर्पियो महिला को टक्कर मारकर फरार हुई थी। कोई स्पष्ट सुराग हाथ नहीं लग रहा था। इसी दौरान एक मुखबिर ने पुलिस को सूचना दी कि कई दिनों से कॉलोनी में हरियाणा नंबर की एक संदिग्ध सफेद स्कॉर्पियो दिखाई दे रही थी, जिसमें भरतपुर क्षेत्र के कुछ युवक आते-जाते थे।
100 से ज्यादा CCTV खंगाले, फिर मिली स्कॉर्पियो
इस सूचना के आधार पर पुलिस ने इलाके के 100 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाले। फुटेज में स्कॉर्पियो घटना से पहले घटनास्थल के पास खड़ी दिखाई दी। बाद में पुलिस ने चौपाटी के सामने लावारिस हालत में वही स्कॉर्पियो बरामद कर ली। जांच में पाया गया कि वाहन की नंबर प्लेट पर मिट्टी लगी थी और आगे का हिस्सा क्षतिग्रस्त था।
7 लाख की सुपारी और सात आरोपियों तक कैसे पहुंची पुलिस?
तकनीकी जांच, मोबाइल लोकेशन और मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस ने भरतपुर, दौसा, मथुरा और आगरा में दबिश देकर सात संदिग्धों को हिरासत में लिया। पूछताछ में आकाश ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसे सात लाख रुपये की सुपारी देकर नीरज शर्मा की हत्या करने के लिए कहा गया था। पुलिस के अनुसार, उसने बताया कि घटना के समय वही स्कॉर्पियो चला रहा था और उसके साथ अन्य साथी भी मौजूद थे, जबकि एक अन्य आरोपी लगातार मृतका की गतिविधियों की जानकारी दे रहा था।
यह भी पढ़ें: "वो मुझे मार डालेंगे..."! नीरज को पहले से था हत्या का डर, एफआईआर में भाई ने खोला राज
'पूछताछ में सामने आई पूरी साजिश'
पुलिस का दावा है कि आगे की पूछताछ में हेमंत, बलराम, मोहन शर्मा और आयुषी की भूमिका सामने आई। पुलिस के अनुसार, आयुषी ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि नौकरी और संपत्ति हासिल करने के उद्देश्य से मां को रास्ते से हटाने की योजना बनाई गई थी। फिलहाल पुलिस पूरे षड्यंत्र की कड़ियों की जांच कर रही है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
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संपत्ति और नौकरी के लालच में रची गई साजिश
पुलिस के अनुसार, मृतका नीरज शर्मा की बेटी आयुषी ने अपने ताऊ के बेटे बलराम उर्फ रवि और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर अपनी मां की हत्या की योजना बनाई। आरोप है कि पिता की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति और मां के नाम दर्ज संपत्ति हासिल करने के लालच में यह पूरी साजिश रची गई। पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने लगभग एक महीने तक नीरज की गतिविधियों पर नजर रखी। वह कब घर से निकलती थीं, किस रास्ते जाती थीं और किस समय लौटती थीं, इसकी लगातार रेकी की गई।
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पहले थार से नाकाम कोशिश, फिर स्कॉर्पियो से वार
जांच के अनुसार, पहले थार गाड़ी से हत्या का प्रयास किया गया, लेकिन योजना सफल नहीं हो सकी। इसके बाद एक सफेद स्कॉर्पियो की व्यवस्था की गई। घटना वाले दिन तेज रफ्तार स्कॉर्पियो से नीरज को टक्कर मारी गई, जिससे उनकी मौत हो गई। वारदात के तुरंत बाद आयुषी ने ही अपने मामा को फोन कर मां के एक्सीडेंट में मौत होने की सूचना दी, ताकि किसी को हत्या का शक न हो।
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मुखबिर की सूचना बनी सबसे बड़ा सुराग
घटनास्थल पर पहुंची पुलिस को शुरुआती जांच में केवल इतना पता चला कि सफेद रंग की स्कॉर्पियो महिला को टक्कर मारकर फरार हुई थी। कोई स्पष्ट सुराग हाथ नहीं लग रहा था। इसी दौरान एक मुखबिर ने पुलिस को सूचना दी कि कई दिनों से कॉलोनी में हरियाणा नंबर की एक संदिग्ध सफेद स्कॉर्पियो दिखाई दे रही थी, जिसमें भरतपुर क्षेत्र के कुछ युवक आते-जाते थे।
100 से ज्यादा CCTV खंगाले, फिर मिली स्कॉर्पियो
इस सूचना के आधार पर पुलिस ने इलाके के 100 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाले। फुटेज में स्कॉर्पियो घटना से पहले घटनास्थल के पास खड़ी दिखाई दी। बाद में पुलिस ने चौपाटी के सामने लावारिस हालत में वही स्कॉर्पियो बरामद कर ली। जांच में पाया गया कि वाहन की नंबर प्लेट पर मिट्टी लगी थी और आगे का हिस्सा क्षतिग्रस्त था।
7 लाख की सुपारी और सात आरोपियों तक कैसे पहुंची पुलिस?
तकनीकी जांच, मोबाइल लोकेशन और मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस ने भरतपुर, दौसा, मथुरा और आगरा में दबिश देकर सात संदिग्धों को हिरासत में लिया। पूछताछ में आकाश ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसे सात लाख रुपये की सुपारी देकर नीरज शर्मा की हत्या करने के लिए कहा गया था। पुलिस के अनुसार, उसने बताया कि घटना के समय वही स्कॉर्पियो चला रहा था और उसके साथ अन्य साथी भी मौजूद थे, जबकि एक अन्य आरोपी लगातार मृतका की गतिविधियों की जानकारी दे रहा था।
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'पूछताछ में सामने आई पूरी साजिश'
पुलिस का दावा है कि आगे की पूछताछ में हेमंत, बलराम, मोहन शर्मा और आयुषी की भूमिका सामने आई। पुलिस के अनुसार, आयुषी ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि नौकरी और संपत्ति हासिल करने के उद्देश्य से मां को रास्ते से हटाने की योजना बनाई गई थी। फिलहाल पुलिस पूरे षड्यंत्र की कड़ियों की जांच कर रही है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।