जल बंटवारे पर तकरार: पंजाब की जल-रॉयल्टी मांग पर राजस्थान सरकार सख्त, जानें क्यों ठुकराई करोड़ों की डिमांड?
पंजाब में विधानसभा चुनावों की मुनादी के साथ ही वहां आम आदमी पार्टी के सीएम भगवंत मान ने भाजपा पर सियासी गुगली फेंक दी है। मान ने भाजपा शासित राजस्थान से पंजाब की जल रॉयलटी के बकाया 1.44 लाख करोड़ रुपए की मांग कर नया विवाद खड़ा कर दिया है। जानें राजस्थान सरकार ने क्या कहा है?
विस्तार
पंजाब द्वारा 1.44 लाख करोड़ रुपये की जल-रॉयल्टी मांग को राजस्थान ने सिरे से खारिज कर दिया है। राजस्थान के जल संसाधन विभाग के चीफ इंजीनियर अमरजीत सिंह ने स्पष्ट कहा कि पंजाब जिस समझौते का हवाला दे रहा है, उसका वर्तमान परिदृश्य में कोई कानूनी आधार नहीं है। उनके अनुसार, 1920 में हुआ समझौता बहावलपुर रियासत और ब्रिटिश सरकार के बीच था, न कि आज के राजस्थान और पंजाब राज्यों के बीच।
'कहीं भी जल-रॉयल्टी या इस प्रकार के किसी भुगतान का प्रावधान नहीं'
अमरजीत सिंह ने कहा कि देश की आजादी के बाद परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं। रियासतों का विलय हुआ और नए राज्यों का गठन हुआ। इसके बाद 1955, 1958 और 1988 में नए जल बंटवारे से जुड़े समझौते हुए, जिनमें केंद्र सरकार भी पक्षकार रही। इन समझौतों में कहीं भी जल-रॉयल्टी या इस प्रकार के किसी भुगतान का प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि पंजाब की तरफ से इस मामले में अब तक कोई लिखित पत्र सरकार को नहीं भेजा गया है। वहीं अगर वे किसी तरह का दावा कर भी रहे हैं तो उन्हें केंद्र सरकार के पास जाना चाहिए।
राजस्थान के अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला पहले से ही अंतर-राज्यीय जल विवाद न्यायाधिकरण में विचाराधीन है, जहां सभी तथ्यों और समझौतों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। ऐसे में सार्वजनिक मंचों पर इस तरह के आरोप लगाना केवल राजनीतिक माहौल को गर्म करने जैसा है।
1960 से 2026 तक की अवधि का हिसाब लगाया जाए- पंजाब सीएम
गौरतलब है कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक बयान दिया है जिसमें उन्होंने कहा कि 1960 के बाद से राजस्थान ने पंजाब से मिलने वाले पानी का उपयोग तो जारी रखा, लेकिन भुगतान बंद कर दिया। उन्होंने इंडस वाटर्स ट्रीटी का हवाला देते हुए कहा कि इसके बाद इस व्यवस्था को नजरअंदाज किया गया। मान ने कहा कि यदि 1960 से 2026 तक की अवधि का हिसाब लगाया जाए, तो कुल बकाया राशि 1.44 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचती है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि या तो राजस्थान इस बकाया राशि का भुगतान करे या फिर पंजाब का पानी लेना बंद कर दे। उन्होंने यह भी बताया कि इस मुद्दे को केंद्र सरकार और राजस्थान सरकार के समक्ष उठाया गया है और बातचीत के लिए पत्र भी लिखा गया है।
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'पंजाब द्वारा किया गया दावा तथ्यों पर आधारित नहीं'
मुख्यमंत्री ने यह भी सवाल उठाया कि जो राज्य सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर के जरिए पानी की मांग कर रहे हैं, वे इस बड़े बकाया भुगतान के मुद्दे पर चुप क्यों हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब अपने हक के पानी और उससे जुड़े आर्थिक अधिकारों के लिए हर स्तर पर लड़ाई लड़ेगा। राजस्थान सरकार ने इन दावों को सिरे से खारिज किया है। इस मामले में राज्य सरकार के अधिकारियों से बातचीत की गई। हालांकि, अधिकारियों ने अधिकारिक तौर पर इस मामले में कुछ भी कहने से मना कर दिया। लेकिन मामले से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राजस्थान इस परियोजना में साझेदार राज्य है और उसने अपने हिस्से का वित्तीय योगदान भी दिया है। अधिकारी के अनुसार, पंजाब द्वारा किया गया दावा तथ्यों पर आधारित नहीं है।
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