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Politics News: फिर चर्चाओं में वसुंधरा; तीन गुना मेहनत, टूटा भरोसा और राजनीति- जाने बयानों के मायने

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: सौरभ भट्ट Updated Tue, 27 Jan 2026 05:25 PM IST
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सार

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने हालिया बयानों से सियासी हलकों में चर्चा बढ़ा दी है। जयपुर में उन्होंने कहा कि महिलाओं को राजनीति में टिकने के लिए पुरुषों से तीन गुना अधिक मेहनत करनी पड़ती है। वहीं डीडवाना में एक धार्मिक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि राजनीति में दिल तोड़ना और भावनाएँ आहत करना भी हिंसा है। उनके ये बयान महिला राजनीति, आंतरिक संघर्ष और सत्ता की सच्चाइयों की ओर इशारा करते हैं।

Politics News: Raje Flags Gender Bias in Politics, Says Emotional Hurt Is Also Violence
वसुंधरा राजे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान की राजनीति में लंबे समय तक निर्णायक भूमिका निभा चुकीं पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा के केंद्र में हैं। नितिन नबीन के भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद बीजेपी की राजनीति में वसुंधरा राजे के सियासी भविष्य को लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं। हालांकि  बीते कुछ समय से राजे के बयानों में सीधा टकराव नहीं, बल्कि संकेतों की राजनीति दिखाई दे रही है। वह न तो खुलकर किसी भूमिका की घोषणा कर रही हैं और न ही सक्रिय विरोध की राह पर हैं, लेकिन उनके वक्तव्य यह साफ करते हैं कि वह हाशिये पर रहने को तैयार नहीं हैं। पार्टी के भीतर और बाहर, उनके शब्दों को गंभीरता से लिया जा रहा है।

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हालिया दो सार्वजनिक कार्यक्रमों में मंच से उनके भाषण सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोरते नजर आए। राजे ने महिलाओं की राजनीति में स्थिति और सार्वजनिक जीवन की जटिलताओं पर टिप्पणी करते हुए कहा कि महिलाओं को राजनीति में टिके रहने के लिए पुरुषों से तीन गुना अधिक मेहनत करनी पड़ती है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि “राजनीति में दिल टूटते हैं और भावनाएं आहत होती हैं। ” राजनीतिक जानकारी इसे सिर्फ एक सामान्य टिप्पणी के तौर पर नहीं देख रहे हैं बल्कि कुछ इसे गहरे राजनीतिक संकेत के रूप में देखा रहे हैं।

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शनिवार को जयपुर में आयोजित जाट महिला शक्ति संगम को संबोधित करते हुए वसुन्धरा राजे ने कहा कि राजनीति में महिलाओं को स्वीकार्यता और पहचान पाने के लिए असमान संघर्ष करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि योग्यता और समर्पण के बावजूद महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कहीं अधिक प्रयास करने पड़ते हैं। उनके इस बयान को राजनीति में महिलाओं के सामने मौजूद संरचनात्मक चुनौतियों पर सीधी टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।


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इसके दो दिन बाद सोमवार को डीडवाना-कुचामन जिले की छोटी खाटू में आयोजित आचार्य महाश्रमण मर्यादा महोत्सव में एक धार्मिक मंच से बोलते हुए राजे ने अहिंसा की अवधारणा को राजनीति से जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि जैन धर्म अहिंसा पर आधारित है और किसी भी जीव को नुकसान पहुंचाना हिंसा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंसा केवल शारीरिक नहीं होती। “हथियारों से हमला करना या किसी को मारना-पीटना ही हिंसा नहीं है। किसी का दिल दुखाना और भावनात्मक रूप से तोड़ना भी हिंसा है,” उन्होंने कहा। राजनीति का उल्लेख करते हुए उन्होंने जोड़ा, “राजनीति में अक्सर ऐसा होता है। दिल भी टूटते हैं और भावनाएं भी आहत होती हैं।”

हालांकि यह बयान एक धार्मिक कार्यक्रम में दिया गया, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसके निहितार्थ राजनीतिक हैं। जानकारों के अनुसार, भावनात्मक चोट और टूटे भरोसे का उनका बार-बार उल्लेख आंतरिक राजनीतिक समीकरणों और सत्ता संघर्षों की ओर इशारा करता है। बीते कुछ महीनों से वसुन्धरा राजे के बयानों में एक सूक्ष्मता और अप्रत्यक्षता देखी जा रही है, जो कई तरह की राजनीतिक व्याख्याओं को जन्म दे रही है।

महिलाओं की भागीदारी के आंकड़े रखते हुए वसुन्धरा राजे ने कहा कि आज़ादी के समय देश में महिलाओं की साक्षरता दर मात्र 9 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 65 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने बताया कि आम चुनावों में महिला उम्मीदवारों की संख्या वर्तमान में लगभग 10 प्रतिशत है, जबकि 1957 में यह केवल 3 प्रतिशत थी। उन्होंने कहा कि पहली लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या 22 थी, जो अब बढ़कर 74 हो गई है। वहीं राज्यसभा में 1952 में महिला सदस्यों की संख्या 15 थी, जो अब 42 हो चुकी है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रगति पर्याप्त नहीं है और महिलाओं का प्रतिनिधित्व पुरुषों के बराबर होना चाहिए।

राजनीतिक विशेषज्ञ मनीष गोधा ने कहा कि दो बार मुख्यमंत्री रह चुकीं और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में लंबे समय तक सक्रिय रहीं वसुन्धरा राजे राजनीति की कठोर वास्तविकताओं से भली-भांति परिचित हैं। उनके हालिया बयानों को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। साथ ही, इन बयानों में एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश भी है, और एक वरिष्ठ नेता होने के नाते वे ऐसे संदेशों के महत्व को अच्छी तरह समझती हैं।

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