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Rajasthan: राजस्थान में दंगा प्रभावित क्षेत्रों को ‘डिस्टर्ब एरिया’ घोषित करेगी सरकार, विधानसभा में लाएगी बिल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: जयपुर ब्यूरो Updated Wed, 21 Jan 2026 04:46 PM IST
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सार

Rajasthan: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार प्रदेश में जनसंख्या संतुलन बनाए रखने, दंगों पर अंकुश लगाने और कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाली गतिविधियों को रोकने के लिए एक बिल लाने की तैयारी में है। जानकारी के मुताबिक, कानून को तोड़ने वाले लोगों को पांच साल तक की जेल होगी। 
 

Rajasthan government will declare riot affected areas as disturbed areas will introduce bill in assembly
सीएम भजनलाल शर्मा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान सरकार राज्य में दंगे और अशांति की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए दंगा प्रभावित क्षेत्रों को ‘डिस्टर्ब एरिया’ (अशांत क्षेत्र) घोषित करने संबंधी कानून लाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए सरकार विधानसभा में विधेयक पेश करेगी।
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दंगों पर अंकुश लगाने के लिए लाया जा रहा बिल
प्रस्तावित कानून का नाम 'राजस्थान अशांत क्षेत्रों में संपत्ति के अंतरण पर प्रतिबंध एवं परिसरों के किरायेदारों की बेदखली से संरक्षण अधिनियम, 2026' होगा। इस कानून का उद्देश्य जनसंख्या संतुलन बनाए रखना, दंगों पर अंकुश लगाना और कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाली गतिविधियों को रोकना बताया गया है। सरकार के अनुसार, किसी क्षेत्र, वार्ड या क्लस्टर में यदि दंगे, अशांति, लोक व्यवस्था में बाधा या जनसंख्या असंतुलन जैसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो उसे विशेष रूप से ‘डिस्टर्ब एरिया’ घोषित किया जा सकेगा। ऐसे क्षेत्रों में अनुचित क्लस्टरिंग या जनसांख्यिकीय असंतुलन पाए जाने पर यह प्रावधान लागू किया जाएगा।
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संपत्ति हस्तांतरण पर सख्त प्रतिबंध 
एक बार किसी क्षेत्र को अशांत घोषित किए जाने के बाद वहां संपत्ति का कोई भी हस्तांतरण स्वतः शून्य (नल एंड वॉयड) माना जाएगा। संपत्ति का हस्तांतरण केवल सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति से ही किया जा सकेगा। निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना किया गया कोई भी ट्रांसफर कानून का उल्लंघन माना जाएगा। इस प्रावधान का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्ति को  से 5 वर्ष तक के कारावास की सजा का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।

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तीन वर्ष की अवधि, बढ़ाने या घटाने का प्रावधान 
डिस्टर्ब एरिया की घोषणा अधिकतम तीन वर्ष के लिए की जाएगी। आवश्यकता होने पर इसे तीन वर्ष से पहले समाप्त किया जा सकेगा, वहीं परिस्थितियों को देखते हुए अवधि बढ़ाने का भी प्रावधान रहेगा, हालांकि अधिकतम अवधि तीन वर्ष ही होगी। रकार का कहना है कि इस कानून के तहत संपत्ति का स्वामित्व बना रहेगा, लेकिन जमीन या संपत्ति की खरीद-बिक्री पर नियंत्रण रहेगा। किसी भी व्यक्ति को संपत्ति बेचने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा, जिससे दबाव, भय या दंगे जैसी स्थिति उत्पन्न न हो और आम नागरिक सुरक्षित रूप से अपने क्षेत्र में रह सकें। प्रस्तावित विधेयक को विधानसभा में पारित कराने के बाद इसे कानून का रूप दिया जाएगा।
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