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Rajasthan News: राज्य पशु ऊंट की घटती संख्या पर हाईकोर्ट हुआ सख्त, कानून के बाद आधी रह गई संख्या
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: जयपुर ब्यूरो
Updated Fri, 03 Apr 2026 03:00 PM IST
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सार
राजस्थान हाईकोर्ट ने ऊंटों की घटती संख्या पर सरकार को फटकार लगाई है। साल 2004 में जहां ऊंटों की संख्या 7.5 लाख थी, वह 2021 में घटकर 1.5 लाख रह गई। हालांकि, सरकार ने सहायता राशि बढ़ाने की बात कही है।
ऊंटों की आबादी को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को लगाई फटकार
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य पशु ऊंट की लगातार कम होती आबादी को लेकर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। जयपुर पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वर्ष 2015 में ऊंट संरक्षण के लिए कानून बनाया गया था, लेकिन उसके बाद भी हालात सुधरने की बजाय और बिगड़ते चले गए। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति डॉ.पुष्पेंद्र सिंह भाटी और विनीत कुमार माथुर की खंडपीठ ने की। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से जवाब पेश करने के लिए समय मांगा गया। जिस पर अदालत ने अगली सुनवाई 29 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी, लेकिन स्पष्ट किया कि इस गंभीर मुद्दे पर ठोस कदम जरूरी हैं।
राजस्थान में साढ़े सात लाख थी ऊंटों की संख्या
अधिवक्ता प्रतीक कासलीवाल ने अदालत के सामने जो आंकड़े रखे वे बेहद चौंकाने वाले थे। वर्ष 2004 में राजस्थान में ऊंटों की संख्या करीब साढ़े सात लाख थी, जो 2015 तक घटकर 3.26 लाख रह गई। इसके बाद गिरावट और तेज हुई और 2019 में यह तादाद लगभग 2.13 लाख तथा 2021 तक आते-आते महज डेढ़ लाख के करीब पहुंच गई। यानी दो दशकों में राजस्थान के राज्य पशु की संख्या पांच गुना से अधिक घट गई।
खरीदी-बिक्री पर पूरी तरह पाबंदी
अदालत के सामने यह तथ्य भी उजागर हुआ कि साल 2015 में राज्य सरकार ने ऊंट को राज्य पशु घोषित करते हुए संरक्षण कानून बनाया था, लेकिन इसके बावजूद संख्या में गिरावट जारी रही। हाईकोर्ट ने इस पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि यह केवल वन्यजीव संरक्षण का मुद्दा नहीं, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा विषय है।
सरकार ने पेश नहीं किया जवाब
सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि कानून के तहत ऊंटों की खरीद-बिक्री पर लगभग पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया, जिससे पशुपालकों की आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। साथ ही, ऊंटों को एक जिले से दूसरे जिले या राज्य के बाहर ले जाने के लिए जिला कलेक्टर की अनुमति अनिवार्य कर दी गई, जो लंबी और जटिल प्रक्रिया है। इसके चलते कई पशुपालकों ने ऊंट पालन छोड़ दिया। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि जुलाई 2022 में सरकार से विस्तृत जवाब मांगा गया था, लेकिन चार साल बाद भी जवाब पेश नहीं किया गया, जिसे लेकर अदालत ने नाराजगी जताई।
ऊंट के बच्चे के जन्म पर 20 हजार की सहायता राशि
राजस्थान के पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि राज्य सरकार ऊंट संरक्षण के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि पहले ऊंट के बच्चे के जन्म पर 10 हजार रुपये की सहायता दी जाती थी, जिसे अब बढ़ाकर 20 हजार रुपये कर दिया गया है।
मंत्री ने आगे कहा कि राजस्थान सरकार जल्द ही ऊंटनी के दूध से बनने वाले उत्पादों को सरस डेयरी के माध्यम से आम जनता के लिए उपलब्ध कराएगी। इससे ऊंट पालकों को एक नया रोजगार और आय का साधन मिलेगा। इस योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है।
पूर्व मंत्री ने लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि ऊंटों के लिए पर्याप्त चारे और संसाधनों की कमी है तथा तस्करी भी बढ़ी है। उन्होंने बताया कि भारतीय जनता पार्टी के राज में न तो गाय सुरक्षित है और ना ऊंट संरक्षित है
हाईकोर्ट ने संकेत दिया कि राज्य सरकार को इस मुद्दे को प्राथमिकता देकर प्रभावी और व्यावहारिक नीति तैयार करनी चाहिए, ताकि राज्य पशु ऊंट को विलुप्त होने से बचाया जा सके।
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राजस्थान में साढ़े सात लाख थी ऊंटों की संख्या
अधिवक्ता प्रतीक कासलीवाल ने अदालत के सामने जो आंकड़े रखे वे बेहद चौंकाने वाले थे। वर्ष 2004 में राजस्थान में ऊंटों की संख्या करीब साढ़े सात लाख थी, जो 2015 तक घटकर 3.26 लाख रह गई। इसके बाद गिरावट और तेज हुई और 2019 में यह तादाद लगभग 2.13 लाख तथा 2021 तक आते-आते महज डेढ़ लाख के करीब पहुंच गई। यानी दो दशकों में राजस्थान के राज्य पशु की संख्या पांच गुना से अधिक घट गई।
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खरीदी-बिक्री पर पूरी तरह पाबंदी
अदालत के सामने यह तथ्य भी उजागर हुआ कि साल 2015 में राज्य सरकार ने ऊंट को राज्य पशु घोषित करते हुए संरक्षण कानून बनाया था, लेकिन इसके बावजूद संख्या में गिरावट जारी रही। हाईकोर्ट ने इस पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि यह केवल वन्यजीव संरक्षण का मुद्दा नहीं, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा विषय है।
सरकार ने पेश नहीं किया जवाब
सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि कानून के तहत ऊंटों की खरीद-बिक्री पर लगभग पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया, जिससे पशुपालकों की आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। साथ ही, ऊंटों को एक जिले से दूसरे जिले या राज्य के बाहर ले जाने के लिए जिला कलेक्टर की अनुमति अनिवार्य कर दी गई, जो लंबी और जटिल प्रक्रिया है। इसके चलते कई पशुपालकों ने ऊंट पालन छोड़ दिया। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि जुलाई 2022 में सरकार से विस्तृत जवाब मांगा गया था, लेकिन चार साल बाद भी जवाब पेश नहीं किया गया, जिसे लेकर अदालत ने नाराजगी जताई।
ऊंट के बच्चे के जन्म पर 20 हजार की सहायता राशि
राजस्थान के पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि राज्य सरकार ऊंट संरक्षण के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि पहले ऊंट के बच्चे के जन्म पर 10 हजार रुपये की सहायता दी जाती थी, जिसे अब बढ़ाकर 20 हजार रुपये कर दिया गया है।
मंत्री ने आगे कहा कि राजस्थान सरकार जल्द ही ऊंटनी के दूध से बनने वाले उत्पादों को सरस डेयरी के माध्यम से आम जनता के लिए उपलब्ध कराएगी। इससे ऊंट पालकों को एक नया रोजगार और आय का साधन मिलेगा। इस योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है।
पूर्व मंत्री ने लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि ऊंटों के लिए पर्याप्त चारे और संसाधनों की कमी है तथा तस्करी भी बढ़ी है। उन्होंने बताया कि भारतीय जनता पार्टी के राज में न तो गाय सुरक्षित है और ना ऊंट संरक्षित है
हाईकोर्ट ने संकेत दिया कि राज्य सरकार को इस मुद्दे को प्राथमिकता देकर प्रभावी और व्यावहारिक नीति तैयार करनी चाहिए, ताकि राज्य पशु ऊंट को विलुप्त होने से बचाया जा सके।