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मकर संक्रांति: जयपुर में रंगीन आतिशबाजी, पतंगबाजी के दौरान हादसों में 150 घायल अस्पताल पहुंचे

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: सौरभ भट्ट Updated Thu, 15 Jan 2026 07:54 AM IST
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सार

मकर संक्रांति: राजस्थान में मकर संक्रांति पर पतंगबाजी और आतिशबाजी का उत्सव मनाया गया। लेकिन पतंगबाजी के दौरान हुए हादसों में कई दर्जन लोग घायल होकर अस्पताल भी पहुंचे।

Rajasthan Makar Sankranti: Kite Festival Marred by Accidents
पतंगबाजी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान में मकर संक्रांति का त्योहार पूरे उत्साह के साथ मनाया गया। दिनभर पतंगबाजी के दौरान “ये काटा-वो काटा” की गूंज सुनाई देती रही, वहीं शाम होते ही प्रदेशभर में जमकर आतिशबाजी हुई। जयपुर में आसमान रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगा उठा और शहर के परकोटे से लेकर प्रमुख पर्यटन स्थलों तक उत्सव का नजारा देखने को मिला।

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हालांकि, उत्सव के बीच कई जगह दर्दनाक हादसे भी सामने आए। भीलवाड़ा में पतंग लूटने के विवाद में एक युवक की हत्या कर दी गई। सिरोही में पिता के साथ बाइक पर जा रहे 7 महीने के बच्चे का चाइनीज मांझे से गला कट गया, जिसकी हालत गंभीर बनी हुई है। श्रीगंगानगर में पतंग लूटते समय पानी की डिग्गी में गिरने से 8 साल के बच्चे की मौत हो गई।

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पाली में पतंग उड़ाते समय 14 वर्षीय बालक हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गया। वहीं, बांसवाड़ा में बाइक सवार युवक की गर्दन चाइनीज मांझे से कट गई, जिसके चलते उसे 10 टांके लगाने पड़े। राजधानी जयपुर में मांझे और पतंग से जुड़े हादसों में 140 से अधिक लोग घायल होकर अलग-अलग अस्पतालों में पहुंचे।

राजनीतिक और सांस्कृतिक आयोजन भी रहे खास

जयपुर में आयोजित काइट फेस्टिवल-2026 में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी के साथ पतंगबाजी की। इस दौरान विधायक बाल मुकुंदाचार्य चरखी थामे नजर आए। भाजपा के हरियाणा प्रभारी सतीश पूनिया ने भी परिवार के साथ पतंग उड़ाई।

पर्यटन विभाग की ओर से हवामहल के सामने भव्य आतिशबाजी की गई, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और पर्यटक पहुंचे। शाम के समय लैंटर्न (लालटेन) भी आसमान में छोड़े गए, जिससे नजारा और भी आकर्षक हो गया।प्रदेशभर में दिखीं अनोखी परंपराएं

कोटा में मकर संक्रांति पर बंगाली समाज ने परंपरागत रूप से मगरमच्छ की पूजा की। झालावाड़ के पिंडोला गांव में पतंग उड़ा रहे बच्चे पर मधुमक्खियों ने हमला कर दिया, लेकिन एक व्यक्ति ने कंबल फेंककर बच्चे को सुरक्षित बचा लिया। वहीं, टोंक के आवां कस्बे में ऐतिहासिक दड़ा महोत्सव खेला गया। 80 किलो की गेंद से खेले जाने वाले इस खेल में मान्यताओं के अनुसार गेंद की दिशा से वर्षा और फसल के संकेत माने जाते हैं। करीब ढाई घंटे चले खेल के बाद गेंद गढ़ (चौक) में ही रही, जिससे इस साल सामान्य मौसम और बारिश के संकेत माने जा रहे हैं। मकर संक्रांति का त्योहार जहां उल्लास और परंपराओं से भरा रहा, वहीं चाइनीज मांझे और लापरवाही से हुए हादसों ने प्रशासन और आमजन के लिए गंभीर चिंता भी पैदा की है।

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