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Rajasthan News:कोविड काल की ऑनलाइन मेडिकल पढ़ाई पर नया नियम, अब करनी होगी ऑफलाइन क्लास
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: Sourabh Bhatt
Updated Mon, 16 Mar 2026 09:15 PM IST
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सार
नेशनल मेडिकल कमीशन ने कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले विदेशी एमबीबीएस छात्रों के लिए नई शर्त लागू की है। अब जितनी अवधि ऑनलाइन पढ़ाई की गई है, उतनी ही ऑफलाइन क्लास और क्लिनिकल ट्रेनिंग पूरी करने पर ही स्थायी रजिस्ट्रेशन मिलेगा।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
कोरोना काल में विदेशों से एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई करने वाले विदेशी मेडिकल छात्रों को अब उतनी ही अवधि की ऑफलाइन क्लास और क्लिनिकल ट्रेनिंग पूरी करनी होगी। ऐसा नहीं करने पर उन्हें भारत में स्थायी पंजीकरण नहीं मिल सकेगा।
नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने इस संबंध में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की स्टेट मेडिकल काउंसिल को निर्देश जारी किए हैं। आयोग के अनुसार 2020 और 2021 बैच के वे छात्र, जिन्होंने कोरोना महामारी के दौरान अपनी पढ़ाई का कोई हिस्सा ऑनलाइन माध्यम से पूरा किया था, उन्हें उसकी भरपाई के लिए समान अवधि की फिजिकल ऑनसाइट क्लास और क्लिनिकल प्रशिक्षण अनिवार्य रूप से करना होगा।
एनएमसी का कहना है कि केवल ऑनलाइन पढ़ाई के आधार पर मेडिकल डिग्री को पूरी तरह मान्य नहीं माना जा सकता। यदि किसी छात्र ने एक शैक्षणिक वर्ष ऑनलाइन पढ़ाई की है, तो उसे उसी अवधि के बराबर ऑफलाइन प्रशिक्षण भी लेना होगा। बिना वास्तविक प्रशिक्षण के जारी किए गए किसी भी “कम्पेनसेशन सर्टिफिकेट” को मान्यता नहीं दी जाएगी।
यह भी पढें- Rajasthan Wild-Life News: तेंदुए-बाघ को जंगल में रोकने की तैयारी; राजस्थान में बनेंगे प्रे-बेस सेंटर
इस फैसले के बाद विदेश से एमबीबीएस की डिग्री लेकर लौटे छात्रों में चिंता बढ़ गई है। कई छात्रों का कहना है कि कोरोना काल में परिस्थितियों के कारण ऑनलाइन पढ़ाई ही एकमात्र विकल्प था, इसलिए अब दोबारा उतनी ही अवधि की ऑफलाइन पढ़ाई करना उनके लिए मुश्किल हो सकता है।
एनएमसी के नियमों के अनुसार विदेश से एमबीबीएस करने वाले छात्रों को भारत में चिकित्सा अभ्यास करने से पहले स्क्रीनिंग टेस्ट पास करना होता है। इसके बाद एक वर्ष की अनिवार्य कम्पल्सरी रोटेटरी मेडिकल इंटर्नशिप पूरी करने पर ही स्टेट मेडिकल काउंसिल की ओर से स्थायी रजिस्ट्रेशन दिया जाता है।
इधर, राज्यों की मेडिकल काउंसिलों ने भी स्पष्ट कर दिया है कि एनएमसी की गाइडलाइन के अनुसार ही रजिस्ट्रेशन दिया जाएगा। यदि कोई छात्र ऑनलाइन पढ़ाई की भरपाई के लिए ऑफलाइन क्लास और क्लिनिकल ट्रेनिंग का प्रमाण नहीं देगा, तो उसे स्थायी पंजीकरण नहीं मिल सकेगा।
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नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने इस संबंध में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की स्टेट मेडिकल काउंसिल को निर्देश जारी किए हैं। आयोग के अनुसार 2020 और 2021 बैच के वे छात्र, जिन्होंने कोरोना महामारी के दौरान अपनी पढ़ाई का कोई हिस्सा ऑनलाइन माध्यम से पूरा किया था, उन्हें उसकी भरपाई के लिए समान अवधि की फिजिकल ऑनसाइट क्लास और क्लिनिकल प्रशिक्षण अनिवार्य रूप से करना होगा।
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एनएमसी का कहना है कि केवल ऑनलाइन पढ़ाई के आधार पर मेडिकल डिग्री को पूरी तरह मान्य नहीं माना जा सकता। यदि किसी छात्र ने एक शैक्षणिक वर्ष ऑनलाइन पढ़ाई की है, तो उसे उसी अवधि के बराबर ऑफलाइन प्रशिक्षण भी लेना होगा। बिना वास्तविक प्रशिक्षण के जारी किए गए किसी भी “कम्पेनसेशन सर्टिफिकेट” को मान्यता नहीं दी जाएगी।
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इस फैसले के बाद विदेश से एमबीबीएस की डिग्री लेकर लौटे छात्रों में चिंता बढ़ गई है। कई छात्रों का कहना है कि कोरोना काल में परिस्थितियों के कारण ऑनलाइन पढ़ाई ही एकमात्र विकल्प था, इसलिए अब दोबारा उतनी ही अवधि की ऑफलाइन पढ़ाई करना उनके लिए मुश्किल हो सकता है।
एनएमसी के नियमों के अनुसार विदेश से एमबीबीएस करने वाले छात्रों को भारत में चिकित्सा अभ्यास करने से पहले स्क्रीनिंग टेस्ट पास करना होता है। इसके बाद एक वर्ष की अनिवार्य कम्पल्सरी रोटेटरी मेडिकल इंटर्नशिप पूरी करने पर ही स्टेट मेडिकल काउंसिल की ओर से स्थायी रजिस्ट्रेशन दिया जाता है।
इधर, राज्यों की मेडिकल काउंसिलों ने भी स्पष्ट कर दिया है कि एनएमसी की गाइडलाइन के अनुसार ही रजिस्ट्रेशन दिया जाएगा। यदि कोई छात्र ऑनलाइन पढ़ाई की भरपाई के लिए ऑफलाइन क्लास और क्लिनिकल ट्रेनिंग का प्रमाण नहीं देगा, तो उसे स्थायी पंजीकरण नहीं मिल सकेगा।