सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Jaipur News ›   Rajasthan News: Transport Cripples as Private Bus Strike Continues, Talks Fail, Lakhs Affected StatewideCrisis

Rajasthan News: निजी बस ऑपरेटर्स की हड़ताल से परिवहन व्यवस्था चरमराई, बेनतीजा रही वार्ता, लाखों यात्री बेहाल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: प्रिया वर्मा Updated Wed, 25 Feb 2026 07:49 AM IST
विज्ञापन
सार

राजस्थान में निजी बस ऑपरेटर्स की हड़ताल ने परिवहन व्यवस्था की रफ्तार थाम दी है। सरकार और ऑपरेटर्स के बीच बातचीत बेनतीजा रहने से हालात और बिगड़ गए हैं, जिसके चलते लाखों यात्रियों को सफर के लिए भारी जद्दोजहद करनी पड़ रही है।

Rajasthan News: Transport Cripples as Private Bus Strike Continues, Talks Fail, Lakhs Affected StatewideCrisis
निजी बस ऑपरेटरों की हड़ताल - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार

निजी बस ऑपरेटर्स के हड़ताल पर जाने की वजह से राजस्थान में ट्रांसपोर्ट व्यवस्था चरमरा गई है। प्राइवेट बस ऑपरेटर्स और परिवहन विभाग के बीच मंगलवार को दूसरे दौर की वार्ता भी बेनतीजा रही, जिससे हड़ताल को लेकर गतिरोध और गहरा गया है। परिवहन आयुक्त के साथ हुई बैठक में सहमति नहीं बन पाई। ऑपरेटर्स ने अब यह शर्त रखी है कि पहले आरटीओ द्वितीय धर्मेंद्र चौधरी और इंस्पेक्टर राजेश चौधरी को एपीओ किया जाए, तभी तीसरे दौर की वार्ता होगी।



इससे पहले ऑपरेटर्स ने यात्रियों को बीच रास्ते उतारकर बसें सीज नहीं करने, एआईपीपी परमिट टैक्स को मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की तर्ज पर स्लैब में कमी करने, मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 153 के तहत कार्रवाई बंद करने और भारी-भरकम चालानों पर रोक लगाने की मांग की थी। हड़ताल के कारण प्रदेश में पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हुई है। बस स्टैंड पर भारी भीड़ के चलते कई यात्रियों को बसों की छतों पर सफर करना पड़ा, जबकि कुछ यात्रियों को घंटों इंतजार के बाद बसें मिलीं।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें: Rajasthan: बजट 100 करोड़, 2 साल में खर्च सिर्फ 2 लाख! महाराणा प्रताप पर क्यों घिरी डिप्टी CM दीया कुमारी?
विज्ञापन


सामान्य दिनों में प्रदेश में करीब 35 हजार बसों का संचालन होता है लेकिन हड़ताल के बाद केवल रोडवेज की लगभग 3300 बसें ही चल रही हैं। इससे रोजाना लाखों यात्रियों की आवाजाही प्रभावित हुई है। खासकर खाटूश्यामजी मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी झेलनी पड़ी क्योंकि कई रूटों पर बस सेवाएं बंद हैं। यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है और दूर-दराज के यात्री सिंधी कैंप बस स्टैंड पहुंचकर भी बसों के लिए भटक रहे हैं।

इसी बीच राजस्थान बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन और आरटीओ इंस्पेक्टर के बीच टकराव भी सामने आया। सिंधी कैंप बस स्टैंड पर ऑपरेटर्स ने बसों में बैठे यात्रियों को उतारकर विरोध जताया और नारेबाजी की। राजेंद्र शर्मा और महासचिव प्रवीण अग्रवाल समेत अन्य ऑपरेटर्स ने कार्रवाई का विरोध किया, जिसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।

वहीं हड़ताल से प्रदेश में कई समारोह रद्द करने पड़े हैं और परिवहन व्यवस्था पर दबाव लगातार बना हुआ है। सरकार और ऑपरेटर्स के बीच वार्ता का अगला दौर होने की संभावना है, लेकिन फिलहाल समाधान नहीं निकल पाया है।

Rajasthan News: Transport Cripples as Private Bus Strike Continues, Talks Fail, Lakhs Affected StatewideCrisis
प्राइवेट बस यूनियन ने सौंपा ज्ञापन - फोटो : अमर उजाला

नागौर में भी असर: मांगें न मानीं तो चक्का जाम की दी चेतावनी
नागौर जिले में प्राइवेट बस ऑपरेटरों ने सरकार के खिलाफ आक्रोश की आग भड़का दी है। नागौर प्राइवेट बस ऑपरेटर एसोसिएशन के बैनर तले सैकड़ों ऑपरेटरों ने धरना देकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नाम सात सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। एसोसिएशन के सचिव लिखमाराम भांभू ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, हमें सुविधाएं पाकिस्तान-अफगानिस्तान की तर्ज पर मिल रही हैं, जबकि वसूली विकसित अमेरिका जैसे देशों की तर्ज पर हो रही है।


भांभू ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के 'डिजिटल इंडिया' के दावों के बावजूद जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दस्तावेजों को मान्य करने की घोषणा के बाद भी बस ऑपरेटरों से मूल कागजात मांगे जाते हैं और अनावश्यक रूप से चालान काटे जाते हैं। चुनावी समय में ऑनलाइन सिस्टम लागू होने के दावे के बावजूद बसों को बार-बार रोका जा रहा है, जिससे ऑपरेटरों को आर्थिक नुकसान हो रहा है।

यह मुख्य सात सूत्रीय मांगे
किराया निर्धारण के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन।
राजस्थान रोडवेज और प्राइवेट बसों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित किया जाए।
रैली, चुनावी कार्यक्रमों या अन्य सरकारी आयोजनों में बसों का जबरन अधिग्रहण बंद हो।
कैरियर परमिशन प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाए।
एसआरटी (स्पेशल रोड टैक्स) की अनुचित मांगों पर रोक लगे।
अनावश्यक चालान और मूल कागजात की मांग बंद हो।
डिजिटल इंडिया के अनुरूप पूरी तरह ऑनलाइन प्रक्रिया लागू हो।

ऑपरेटरों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि सरकार समय रहते उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती तो वे मजबूरन चक्का जाम करने को बाध्य होंगे। साथ ही, आगामी दिनों में अजमेर में प्रस्तावित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के दौरान बसों को पूर्ण रूप से बंद रखने का एलान किया गया है, जिससे हजारों यात्रियों को प्रभावित होने की आशंका है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed