Rajasthan Rajya Sabha Election: राज्यसभा में कांग्रेस का 'सेफ कार्ड'; नीरज डांगी पर फिर भरोसा, क्या है रणनीति?
कांग्रेस ने राजस्थान से राज्यसभा चुनाव के लिए एक बार फिर नीरज डांगी पर भरोसा जताया है। पार्टी के इस फैसले को दलित वोट बैंक को साधने, संगठनात्मक संतुलन बनाए रखने और आगामी चुनावों के सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर उठाया गया रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
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भाजपा प्रत्याशियों की सूची जारी होने के कुछ घंटों बाद कांग्रेस ने भी राज्यसभा सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम तय कर दिए। राजस्थान से कांग्रेस ने एक बार फिर नीरज डांगी को उम्मीदवार बनाया है। पार्टी के मौजूदा संख्या बल को देखते हुए उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन इस फैसले के राजनीतिक मायने केवल एक सीट जीतने तक सीमित नहीं हैं।
कांग्रेस ने डांगी को दोबारा मौका देकर एक साथ कई राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। पहला, पार्टी ने अपने परंपरागत दलित वोट बैंक को यह संकेत दिया है कि सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर उसकी प्रतिबद्धता कायम है। दूसरा, राजस्थान कांग्रेस के भीतर गुटीय संतुलन बनाए रखने का प्रयास भी इस फैसले में साफ दिखाई देता है।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, नीरज डांगी को दोबारा राज्यसभा भेजने के पीछे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। डांगी अपने पिछले कार्यकाल में राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ सक्रिय रूप से जुड़े रहे और खड़गे के विश्वासपात्र नेताओं में उनकी गिनती होने लगी। यही वजह रही कि टिकट वितरण में उनका पलड़ा भारी रहा।
डांगी को अशोक गहलोत का करीबी माना जाता है
वहीं, डांगी को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का करीबी माना जाता है। ऐसे में उनके नाम पर मुहर लगना गहलोत खेमे के लिए भी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। कांग्रेस नेतृत्व ने यह फैसला ऐसे समय लिया है, जब प्रदेश संगठन में भविष्य की रणनीति और नेतृत्व को लेकर अंदरखाने चर्चाएं जारी हैं।
राज्यसभा चुनाव के गणित पर नजर डालें तो कांग्रेस के पास 67 विधायक हैं और एक सीट पर उसकी जीत लगभग सुनिश्चित है। ऐसे में पार्टी ने किसी नए चेहरे पर दांव लगाने या राजनीतिक प्रयोग करने के बजाय सुरक्षित और अनुभवी विकल्प को प्राथमिकता दी है।
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क्या खास है कांग्रेस का यह कदम?
उधर, भाजपा भी अपने संख्या बल के आधार पर दो सीटों पर जीत की स्थिति में है। दोनों प्रमुख दलों की रणनीति को देखते हुए राजस्थान की तीनों राज्यसभा सीटों पर निर्विरोध चुनाव होने की संभावना मजबूत होती जा रही है। यदि भाजपा तीसरा और कांग्रेस दूसरा उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारती है, तो 11 जून को नाम वापसी के बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीरज डांगी की उम्मीदवारी केवल राज्यसभा सीट भरने का फैसला नहीं है, बल्कि कांग्रेस का यह कदम आगामी चुनावी राजनीति, दलित सामाजिक समीकरणों और संगठनात्मक एकजुटता को साधने की व्यापक रणनीति का हिस्सा भी है।