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Rajasthan News: गांवों में श्मशान के लिए रास्ता देगी सरकार, इसके लिए जमीन राजस्व रिकॉर्ड में होगी दर्ज

Fri, 10 Jul 2026 04:35 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Fri, 10 Jul 2026 04:35 PM IST
सार


राजस्थान सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में श्मशान भूमि से जुड़े वर्षों पुराने विवाद खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब श्मशानों की जमीन को राजस्व रिकॉर्ड (जमाबंदी) में दर्ज किया जाएगा जिससे श्मशान तक पहुंचने का सरकारी रास्ता दर्ज हो सके।

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Rajasthan to Record Cremation Grounds in Revenue Records, Ensure Access Roads
श्मशान घाट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में श्मशान भूमि से जुड़े विवादों को खत्म करने के लिए राजस्व विभाग ने विशेष अभियान शुरू किया है। विभाग ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि गांवों में संचालित श्मशानों की जमीन का भौतिक सत्यापन कर उसे राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कराया जाए। साथ ही जहां श्मशानों तक पहुंचने का रास्ता नहीं है, वहां रास्ते उपलब्ध कराए जाएं।

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राजस्व विभाग के अनुसार, प्रदेश के कई गांवों में वर्षों से श्मशान तो उपयोग में हैं, लेकिन उनकी जमीन आज भी सरकारी जमाबंदी में दर्ज नहीं है। कई स्थानों पर श्मशान भूमि आरक्षित नहीं होने के कारण अतिक्रमण, स्वामित्व विवाद और अंतिम संस्कार के दौरान सामाजिक तनाव जैसी स्थितियां पैदा होती रही हैं।

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ग्रामीण सेवा शिविरों में होगा समाधान

सरकार ने तय किया है कि ग्रामीण सेवा शिविरों के दौरान ऐसे मामलों का मौके पर ही निस्तारण किया जाएगा। श्मशान भूमि का सीमांकन, नाप-जोख और राजस्व रिकॉर्ड में प्रविष्टि कराने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। जिन स्थानों पर अतिक्रमण है, वहां नियमानुसार कार्रवाई कर भूमि को मुक्त कराया जाएगा।

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श्मशानों तक रास्ते भी होंगे सुनिश्चित

राजस्व विभाग ने कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक श्मशान तक पहुंचने के लिए सार्वजनिक रास्ता सुनिश्चित किया जाए। आवश्यक होने पर नए रास्ते खोले जाएं और उन्हें पंचायतों के सुपुर्द किया जाए, ताकि अंतिम संस्कार के समय ग्रामीणों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।


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जहां जरूरत, वहां नई जमीन होगी आवंटित

सरकार ने यह भी कहा है कि जिन गांवों में श्मशान के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं है, वहां राजस्व भूमि आरक्षित कर श्मशान के लिए आवंटित की जाए। भविष्य में भी जरूरत के अनुसार यह प्रक्रिया जारी रखी जाएगी।

क्यों जरूरी पड़ा यह फैसला?

ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार श्मशानों तक रास्ता नहीं होने या जमीन का रिकॉर्ड स्पष्ट नहीं होने से अंतिम संस्कार के दौरान विवाद की स्थिति बन जाती है। कई मामलों में अतिक्रमण और स्वामित्व के दावे भी सामने आते हैं। सरकार का मानना है कि श्मशान भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने, सीमांकन कराने और पहुंच मार्ग सुनिश्चित करने से ऐसे विवादों पर स्थायी रोक लगाई जा सकेगी।

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