Rajasthan Tiger News: रणथंभौर के बाघों का नया ठिकाना बनेगा मुकुंदरा ;एक और टाइगर शिफ्ट करने की तैयारी
राजस्थान में रणथम्भौर बाघ अभ्यारण्य से मुकुंदरा में एक नर बाघ को शिफ्ट किए जाने की तैयारी है। इसके लिए वन विभाग ने नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथॉरिटी को प्रस्ताव भेज दिया है-
विस्तार
राजस्थान के वन्यजीव प्रेमियों और मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व (MHTR) के लिए एक अच्छी खबर है। रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बाघों के बढ़ते कुनबे और इलाके को लेकर छिड़े सघर्ष को देखते हुए वन विभाग ने अब एक और बाघ को कोटा के मुकुंदरा रिजर्व में शिफ्ट करने का मन बना लिया है। दरअसल रणथंभौर में वर्तमान में बाघों की संख्या उनकी वहन क्षमता से अधिक हो चुकी है। इसके चलते युवा बाघों को अपना इलाका बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व लंबे समय से एक नर बाघ की प्रतीक्षा कर रहा है ताकि वहां बाघों की आबादी को फिर से पुनर्जीवित किया जा सके।
दरअसल रणथम्भौर में बाघों की आबादी क्षेत्रफल के हिसाब से काफी अधिक हो चुकी है। यहां करीब 74 बाघ हैं जिनमें 20 नर, 30 मादा और 24 शावक और युवा बाघ हैं। क्षेत्रीय संघर्ष के अलावा बाघों की यह बढ़ती आबादी अंत: प्रजनन का भी बड़ा खतरा पैदा कर रही है। इसके अलावा नर बाघों के डर से युवा बाघ जंगल के बाहर आ जाते हैं जिससे इंसानी आबादी को भी खतरा बढ़ जाता है। पिछले साल रणथम्भौर में युवा बाघों ने फोरेस्ट रेंजर और एक बच्चे पर हमला करके उनकी जान ले ली थी। इसके बाद नेशनल टाइगर कंजरवेशन कमेटी (NTCA) ने यहां टाइगर रिलोकेशन की अनुमति दे दी थी।
दरअसल रणथंभौर टाइगर रिजर्व (RTR) में बाघों के रहने के क्षेत्र और सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं हैं। एक मादा बाघ (बाघिन) को आमतौर पर लगभग 12-15 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की आवश्यकता होती है, जबकि एक नर बाघ को मादा की तुलना में दोगुने बड़े क्षेत्र की जरूरत होती है। रणथम्भौर की मौजूदा क्षमता करीब 50 से 55 बाघों के लिए ही है। इसलिए यहां रिलोकेशन किया जाना है।
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NTCA को प्रस्ताव भेजा
विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रणथंभौर से एक स्वस्थ युवा नर बाघ की पहचान कर ली है जिसका रिलोकेशन मुकुंदरा किया जाना है। अब इस शिफ्टिंग प्रक्रिया के लिए NTCA को प्रस्ताव भेजकर अनुमति मांगी जा रही है। मुकुंदरा में वर्तमान में बाघों की कमी है। एक नया नर बाघ आने से वहां ब्रीडिंग (प्रजनन) की संभावनाएं बढ़ेंगी और पारिस्थितिक तंत्र संतुलित होगा। बाघों की संख्या बढ़ने से हाड़ौती क्षेत्र में वन्यजीव पर्यटन को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह स्थानांतरण न केवल बाघों की सुरक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि यह राजस्थान के अन्य टाइगर रिजर्व्स को विकसित करने की रणनीति का भी हिस्सा है। शिफ्टिंग से पहले मुकुंदरा में सुरक्षा व्यवस्था और प्रेय-बेस (शिकार की उपलब्धता) का भी बारीकी से निरीक्षण किया जा रहा है।
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