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Rajasthan News: गिरल माइंस आंदोलन ने पकड़ा जोर, रविंद्र सिंह भाटी का शक्ति प्रदर्शन, 19 मई को विशाल जनसभा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेर Published by: जयपुर ब्यूरो Updated Mon, 18 May 2026 07:30 PM IST
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सार

गिरल लिग्नाइट माइंस में श्रमिकों और ड्राइवरों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। तेरहवें दिन भी धरना जारी रहा, जबकि विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने 19 मई को विशाल मजदूर जनसभा का ऐलान कर आंदोलन को नया राजनीतिक और सामाजिक बल दे दिया है।

Rajasthan News: Giral Mines Protest Gains Momentum, Ravindra Bhati Shows Strength, Massive Rally on May 19
धरना स्थल पर मौजूद शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

बाड़मेर जिले के गिरल लिग्नाइट माइंस में स्थानीय श्रमिकों, ड्राइवरों और ग्रामीणों का आंदोलन तेरहवें दिन भी लगातार जारी रहा। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे आंदोलनकारियों के समर्थन में शिव विधायक रवींद्र सिंह भाटी लगातार धरनास्थल पर डटे हुए हैं। भीषण गर्मी और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बावजूद आंदोलन का स्वर लगातार मजबूत होता दिखाई दे रहा है।



इसी बीच विधायक भाटी ने 19 मई को प्रातः 10 बजे गिरल में विशाल मजदूर आन्दोलन जनसभा आयोजित करने की घोषणा की है। जनसभा को लेकर क्षेत्रभर में तैयारियां तेज हो गई हैं। ग्रामीण इलाकों में लगातार जनसंपर्क और बैठकों का दौर चल रहा है तथा बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
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आंदोलन से जुड़े लोगों का दावा है कि इस जनसभा में राजस्थान के विभिन्न जिलों से श्रमिक, किसान, युवा और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि पहुंच सकते हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह संघर्ष केवल गिरल माइंस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब मजदूर अधिकारों और स्थानीय रोजगार के मुद्दे पर व्यापक जनआंदोलन का रूप ले चुका है।
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धरनास्थल पर मौजूद श्रमिकों ने कंपनी द्वारा निकाले गए 100 से अधिक ड्राइवरों और श्रमिकों की पुनर्बहाली, 8 घंटे की ड्यूटी व्यवस्था लागू करने, स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने तथा श्रम कानूनों के पालन की मांग दोहराई। आंदोलनकारियों का आरोप है कि लंबे समय से स्थानीय श्रमिकों की समस्याओं की अनदेखी की जा रही है।

विधायक भाटी ने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक स्वार्थ का नहीं बल्कि मजदूरों के सम्मान, रोजगार सुरक्षा और स्थानीय अधिकारों की लड़ाई है। उन्होंने प्रदेशभर के श्रमिक संगठनों और युवाओं से जनसभा में शामिल होने की अपील की है।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार छोटू सिंह रावणा विवाद के बाद क्षेत्रीय और सोशल मीडिया स्तर पर कमजोर पड़ी भाटी की छवि को इस आंदोलन से नया सहारा मिला है। यदि गिरल आंदोलन बड़े जनसमर्थन के साथ सफल होता है तो भाटी प्रदेश की वैकल्पिक राजनीति और संभावित तीसरे मोर्चे के प्रमुख चेहरों में उभर सकते हैं। फिलहाल प्रदेश की राजनीतिक नजरें 19 मई की प्रस्तावित जनसभा पर टिकी हुई हैं।

 

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