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Padma Awards 2026: राजस्थान के दो लोक कलाकार फरुद्दीन व टगा राम को मिलेगा 'पद्मश्री', जानें इनकी उपलब्धियां

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: सौरभ भट्ट Updated Sun, 25 Jan 2026 05:25 PM IST
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सार

राजस्थान के दो लोक कलाकार टगा राम भील और गफरुद्दीन मेवाती जोगी को ‘अनसंग हीरोज’ श्रेणी में पद्मश्री 2026 से सम्मानित किया जाएगा। भपांग वादक गफरुद्दीन जोगी पिछले 50 वर्षों से मेवात की लोक कला को संजोए हुए हैं, जबकि अल्गोजा वादक टगा राम भील ने देश-विदेश में राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।

Two Rajasthani Folk Artists to Receive Padma Shri 2026 under ‘Unsung Heroes’ Category
Padma Shri 2026 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान के दो प्रसिद्ध लोक कलाकार-टगा राम भील और गफरुद्दीन मेवाती जोगी को वर्ष 2026 में ‘अनसंग हीरोज’ श्रेणी के तहत पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इसकी घोषणा रविवार को की गई। मेवात क्षेत्र के 68 वर्षीय भपांग वादक गफरुद्दीन जोगी ने महज चार वर्ष की उम्र में अपने पिता से इस लोक कला को सीखना शुरू किया था। मेवाती जोगी समुदाय की संस्कृति हिंदू और मुस्लिम परंपराओं का संगम है। गफरुद्दीन पिछले 50 वर्षों से ‘पांडुन का कड़ा’ गायन कर रहे हैं और उन्हें महाभारत की कथाओं से जुड़े 2,500 से अधिक दोहे कंठस्थ हैं, जो उन्हें विरासत में मिले हैं।

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वर्ष 2024 में उन्हें इस ग्रामीण लोक कला को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने के लिए दिल्ली में संगीत नाटक अकादमी द्वारा राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित किया गया था। वे ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन सहित कई देशों में प्रस्तुति दे चुके हैं। 2011 में लंदन में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के जन्मदिन पर भी उन्होंने विशेष प्रस्तुति दी थी। 2022 में उन्होंने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई फिल्म कलाकारों के सामने भी प्रस्तुति दी।

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जैसलमेर के मूल सागर क्षेत्र में रहने वाले टगा राम भील प्रसिद्ध अल्गोजा वादक हैं। भील समुदाय से ताल्लुक रखने वाले टगा राम ने बचपन में अपने पिता का अल्गोजा चुपके से बजाकर इस कला को सीखना शुरू किया। पेशे से कभी चरवाहा रहे टगा राम 10 वर्ष की उम्र से अल्गोजा बजा रहे हैं।


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मटका और बांसुरी वादन में भी निपुण
उन्होंने बताया कि उन्होंने रणथंभौर के जंगलों में लगभग 30 वर्ष बिताए, जहां वे अल्गोजा बजाया करते थे। 1981 में 18 वर्ष की उम्र में उन्होंने जैसलमेर में पहली मंचीय प्रस्तुति दी। उन्होंने आकाशवाणी जैसलमेर और नेहरू युवा केंद्र संगठन के कार्यक्रमों में भी प्रस्तुति दी है। टगा राम भील ने वर्ष 1996 में फ्रांस से अपने अंतरराष्ट्रीय दौरे की शुरुआत की थी। इसके बाद वे यूरोप के 15 से अधिक देशों के अलावा सिंगापुर, रूस, जापान, अफ्रीका और अमेरिका में कार्यक्रम और कार्यशालाएं कर चुके हैं। अल्गोजा के साथ-साथ वे मटका और बांसुरी वादन में भी निपुण हैं।

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