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UP: 2027 से पहले भाजपा... सपा और कांग्रेस में छिड़ी लड़ाई, तीनों ही पार्टियों में आपसी खींचतान, संगठन में दरार

अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 25 Jan 2026 02:30 PM IST
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सार

मुरादाबाद में 2027 से पहले भाजपा, सपा और कांग्रेस में 19-20 की लड़ाई छिड़ी है। पार्टी हाईकमान के निर्देशों का भी कोई असर नहीं पड़ रहा है। तीनों ही पार्टियों में आपसी खींचतान तेज हो गई है। 

UP Politics News: Political Infighting Intensifies in Moradabad Ahead of 2027 Assembly Elections
UP Politics News - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दल अपनों में छिड़ी 19-20 की लड़ाई से जूझ रहे हैं। खुद को एक दूसरे से ऊपर रखने की होड़ में शामिल नेताओं ने गुट तक बना लिए हैं। लोकसभा और विधानसभा के टिकट को लेकर शुरू हुई आपसी खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। 
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इन नेताओं के सियासी विवाद की चर्चाएं लखनऊ से दिल्ली तक चर्चाओं में है। खास बात यह है कि इस खींचतान को लेकर पार्टी हाईकमान से निर्देश तक जारी हो चुके लेकिन सियासी लड़ाई है कि थमने का नाम ही नहीं ले रही। 
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एसआईआर अभियान के जरिये राजनीतिक दलों ने विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी शुरू कर दी है। सभी दल वोट बनवाने के साथ-साथ नए वोट जोड़ने में जुटे हैं। इसके लिए कमेटियां गठित की गई हैं। इन तैयारियों के बीच राजनीतिक दल अपने नेताओं की आपसी लड़ाई से जूझ रहे हैं।

मुरादाबाद में भाजपा में कुंदरकी विधायक रामवीर सिंह और जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. शैफाली सिंह के बीच चल रही सियासी खींचतान को रामवीर सिंह ने जिला पंचायत के टेंडर में भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर फिर से हवा दे दी है। 

वहीं, सपा में सांसद रुचिवीरा और पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन के बीच जुबानी जंग जारी है। ऐसे ही अमरोहा से लोकसभा टिकट की दावेदारी को लेकर सामने आए कांग्रेस के पूर्व सांसद दानिश अली और पूर्व प्रदेश महासचिव सचिन चौधरी के बीच विवाद सोशल मीडिया पर चर्चाओं का विषय बना रहा।
 

पंचायत चुनाव से हुई राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता की शुरुआत
मुरादाबाद के कुंदरकी विधायक रामवीर सिंह और जिला पंचायत अध्यक्ष के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता की शुरुआत 2015 में पंचायत चुनाव से हुई थी। जो अब तक जारी है। 2017 के विधानसभा चुनाव में डॉ. शैफाली सिंह ने भी कुंदरकी सीट से टिकट की दावेदारी पेश की थी लेकिन टिकट रामवीर सिंह के हाथ लगा। हालांकि उन्हें चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। 

 

2011 के पंचायत चुनाव में वार्ड 21 से डॉ. शैफाली सिंह और वार्ड 31 से रामवीर सिंह की पत्नी संतोष देवी जिला पंचायत सदस्य बनीं। दोनों ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी पेश की थी। लेकिन यहां टिकट डॉ. शैफाली सिंह के हाथ लगा। 

 

पिछले साल जिला पंचायत बोर्ड की बैठक में दोनों के बीच हुई नोकझोंक मीडिया की सुर्खियां बनी थी। हाल ही में विधायक रामवीर सिंह ने जिला पंचायत के ठेके में भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर डॉ. शैफाली सिंह पर निशाना साधने की कोशिश की।

एक दूसरे पर सियासी वार का कोई मौका नहीं छोड़ते
सपा सांसद रुचिवीरा और पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन एक दूसरे पर सियासी वार का कोई माैका नहीं छोड़ते हैं। दोनों के बीच विवाद की शुरुआत 2024 के लोकसभा चुनाव से हुई थी। 2024 के चुनाव में नामांकन के बाद डॉ. एसटी हसन का टिकट काटकर सपा ने रुचिवीरा को उम्मीदवार बना दिया था। इससे नाराज पूर्व सांसद ने चुनाव से दूरी बना ली थी। 

 

इसके बाद कई मौके आ चुके हैं जब दोनों एक-दूसरे के खिलाफ खुलकर सामने आए। ताजा प्रकरण बेटी की शादी में पूर्व सांसद द्वारा भाजपा नेताओं को बुलाने का है। जिसे लेकर दोनों के बीच जुबानी जंग चली। बयानबाजी बढ़ने पर पार्टी को गाइडलाइन तक जारी करनी पड़ी।
 

कांग्रेस में चर्चा का विषय रहा दानिश अली-सचिन चौधरी की रार
लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारी की दावेदारी से शुरू हुई कांग्रेस नेता सचिन चौधरी और पूर्व सांसद कुंवर दानिश अली के बीच की रार अब भी बरकरार है। एक प्रेसवार्ता में दानिश अली ने किसी सवाल के जवाब में सचिन को पहचानने से इन्कार कर दिया था। इसके जवाब में सचिन ने एक वीडियो वायरल कर पूर्व सांसद पर तीखा प्रहार किया था।

इसके बाद दोनों के बीच चली जुबानी जंग पार्टी में चर्चा का विष्य बनी रही। इस बीच सचिन की पत्नी आभा चौधरी की ओर से फेसबुक पर की गई पोस्ट के बाद पूर्व सांसद को जान से मारने की धमकी दी गई थी। बाद में पार्टी की ओर से सचिन चाैधरी से स्पष्टीकरण तलब किया गया था।

पूर्व सांसद कुंवर दानिश अली और सचिन चौधरी के बीच हुए विवाद की जानकारी प्रदेश नेतृत्व को तीन माह पहले लिखित रूप से भेजी थी। वरिष्ठ नेताओं को भी अवगत कराया है। दोनों पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। विवाद के कारण कोई कार्यकर्ता साथ रहने में भयभीत होता है। एक नेता के साथ जाने पर दूसरा नाराज होता है। इसका पार्टी पर असर भी पड़ता है। - विनोद गुंबर, कांग्रेस जिलाध्यक्ष

पार्टी के फोरम पर जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. शैफाली सिंह और कुंदरकी विधायक रामवीर सिंह के बीच कोई विवाद सामने नहीं आया है। बोर्ड की बैठक पार्टी से अलग होती है। बोर्ड बैठक में कार्यों को लेकर दोनों नेताओं ने आपस में बहस की होगी। इस प्रकार के मामलों में वह दखल नहीं देते हैं। पार्टी स्तर पर दोनों नेताओं ने विवाद नहीं किया है। - आकाश पाल, भाजपा जिलाध्यक्ष

पार्टी में नेताओं का आपस में कोई विवाद नहीं है। सभी नेता 2027 की तैयारी में जुटे हैं। पार्टी पदाधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वह बैनर पोस्टर पर सांसदों और विधायकों के फोटो जरूर लगाएं। किसी तरह की बयानबाजी से बचें। - जयवीर सिंह, सपा जिलाध्यक्ष
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