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Rajasthan: 'अगर UGC कानून वापस नहीं लिया गया तो...', करणी सेना के अध्यक्ष महिपाल मकराना ने दी सरकार को चेतावनी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: आशुतोष प्रताप सिंह Updated Thu, 29 Jan 2026 05:14 PM IST
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सार

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए यूजीसी कानून को लेकर राज्यभर में विरोध प्रदर्शन हो रहा है। इसी बीच करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने बड़ा बयान दिया है। 

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महिपाल सिंह मकराना - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूजीसी कानून के विरोध में सवर्ण समाज एक फरवरी को जयपुर के स्वर्ण समाज शहीद स्मारक पर बड़ा धरना-प्रदर्शन करने जा रहा है। इस आंदोलन को लेकर राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने अमर उजाला से खास बातचीत में सरकार को खुली चुनौती दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि यूजीसी कानून वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को उग्र रूप दिया जाएगा।
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जयपुर में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए यूजीसी कानून के खिलाफ विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। करणी सेना के नेतृत्व में बुधवार शाम को वीर दुर्गा दास सर्किल से खातीपुरा तक मशाल जुलूस निकाला गया। इस दौरान बड़ी संख्या में युवा हाथों में मशाल लेकर सड़कों पर उतरे और कानून के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान यूजीसी कानून को वापस लेने की मांग करते हुए प्रदर्शनकारियों ने कानून की प्रतियां भी जलाईं। जुलूस में शामिल युवाओं का कहना था कि यह कानून शिक्षा व्यवस्था और बच्चों के भविष्य के खिलाफ है।
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'थोपा हुआ कानून'

इस दौरान करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने कहा कि यूजीसी का यह कानून बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है और इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने इसे “थोपा हुआ कानून” बताते हुए कहा कि इसमें किसी तरह का संशोधन भी मंजूर नहीं किया जाएगा। मकराना ने स्पष्ट किया कि करणी सेना इस कानून के खिलाफ हर स्तर पर आंदोलन करेगी। आने वाले दिनों में विधानसभा का घेराव किया जाएगा और आवश्यकता पड़ी तो पूरे देश में सवर्ण समाज के साथ मिलकर बंद का आह्वान भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब तक यह काला कानून वापस नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

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जानें क्या लग रहे हैं आरोप

वहीं, यूजीसी कानून को लेकर केंद्र सरकार का कहना है कि इसके तहत उच्च शिक्षा से जुड़े नियमों में बदलाव प्रस्तावित हैं। नए प्रावधानों के अनुसार कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों, पाठ्यक्रम और प्रशासनिक व्यवस्था में यूजीसी और केंद्र सरकार की भूमिका बढ़ाई जाएगी। विरोध कर रहे संगठनों का आरोप है कि इससे शैक्षणिक संस्थानों की स्वायत्तता कमजोर होगी और राज्यों के अधिकार सीमित हो जाएंगे। उनका कहना है कि यह कानून शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह केंद्रीकृत करता है। इसी वजह से जयपुर सहित देश के कई हिस्सों में यूजीसी कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन लगातार तेज हो रहे हैं।
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