{"_id":"6a4247a6961667295a0b9bc3","slug":"uproar-following-laborers-death-body-found-hanging-family-buried-it-overnight-body-to-be-exhumed-now-jaisalmer-news-c-1-1-noi1407-4447013-2026-06-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jaisalmer News: फंदे पर लटका मिला मजदूर का शव, पुलिस को बताए बगैर रातोंरात दफनाया, अब कब्र से निकलेगा सच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jaisalmer News: फंदे पर लटका मिला मजदूर का शव, पुलिस को बताए बगैर रातोंरात दफनाया, अब कब्र से निकलेगा सच
Mon, 29 Jun 2026 04:35 PM IST
जैसलमेर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर
Published by: जैसलमेर ब्यूरो
Updated Mon, 29 Jun 2026 04:35 PM IST
सार
संदिग्ध परिस्थितियों में मजदूर की मौत, रातोंरात शव को दफनाने के मामले में पुलिस छानबीन तेज हो गई है। प्रशासन की अनुमति मिलते ही शव को कब्र से निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा जाएगा।
विज्ञापन
पुलिस ने शुरू की गहन जांच
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
शहर में एक मजदूर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद उसके शव को बिना पुलिस को सूचना दिए रातोंरात दफना दिया गया। जब घटना की जानकारी दूसरे रिश्तेदारों तक पहुंची तो उन्होंने पुलिस को सूचित किया। इसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ और अब प्रशासन की अनुमति मिलने के बाद शव को कब्र से निकालकर मेडिकल बोर्ड की निगरानी में पोस्टमार्टम कराया जाएगा।
छह महीने से परिवार सहित रह रहा था मजदूर
पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान रतननाथ के रूप में हुई है, जो मूल रूप से भीलवाड़ा जिले का रहने वाला था और पिछले करीब छह महीने से जैसलमेर की लक्ष्मीचंद सांवल कॉलोनी स्थित नगरपरिषद के एमआरएफ सेंटर के पास अपनी पत्नी और 12 वर्षीय बेटे के साथ कच्ची झोपड़ी बनाकर रह रहा था। वह यहीं मजदूरी करने के साथ कचरे की छंटाई का काम करता था और इसी से परिवार का पालन-पोषण कर रहा था।
क्या है MRF सेंटर?
नगर परिषद का एमआरएफ सेंटर वह स्थान है जहां शहर से एकत्रित सूखा कचरा लाया जाता है। यहां प्लास्टिक, लोहे, कांच, धातु और अन्य उपयोगी सामग्री को अलग-अलग किया जाता है। इसके बाद छांटे गए कचरे को आगे बड़ाबाग स्थित मुख्य डंपिंग यार्ड में भेजा जाता है। रतननाथ इसी केंद्र पर मजदूरी करता था।
विज्ञापन
शराब के नशे में उठाया आत्मघाती कदम
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि शनिवार शाम रतननाथ ने अत्यधिक शराब का सेवन किया था। देर रात वह एमआरएफ सेंटर के टीन शेड के नीचे पहुंचा और रस्सी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। काफी देर तक जब वह वापस नहीं लौटा तो परिजनों और साथ रहने वाले लोगों ने उसकी तलाश की। खोजबीन के दौरान उसका शव फंदे से लटका मिला।
ये भी पढ़ें: राजस्थान: जयपुर-अजमेर हाईवे पर भीषण हादसा, श्रद्धालुओं से भरी बस को ट्रक ने मारी टक्कर; तीन की मौत
बताया जा रहा है कि पुलिस कार्रवाई, पूछताछ और कानूनी प्रक्रियाओं के डर से मृतक की पत्नी और उसके साथ मौजूद कुछ लोगों ने किसी को सूचना नहीं दी और देर रात ही एमआरएफ सेंटर के सामने स्थित एक सूनसान खाली प्लॉट में गड्ढा खोदकर शव को चुपचाप दफना दिया गया। रविवार सुबह जब इस घटना की जानकारी मृतक के अन्य रिश्तेदारों को मिली तो उन्होंने तुरंत भीलवाड़ा में रहने वाले परिजनों से संपर्क किया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही जैसलमेर शहर कोतवाली पुलिस के अधिकारी सुरजाराम जाखड़ पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और पूरे घटनास्थल का निरीक्षण किया।
पुलिस जब मौके पर पहुंची तब तक शव दफनाया जा चुका था। ऐसे में कानून के अनुसार प्रशासनिक अनुमति के बिना शव को बाहर नहीं निकाला जा सकता। पुलिस ने जिला प्रशासन से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद शव को कब्र से निकालकर मेडिकल बोर्ड की देखरेख में पोस्टमार्टम कराया जाएगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि मौत वास्तव में फांसी लगाने से हुई या फिर इसके पीछे कोई अन्य कारण भी है।
रिश्तेदार की भूमिका पर पुलिस को संदेह
जांच के दौरान पुलिस की नजर मृतक के एक रिश्तेदार लाधूनाथ पर टिकी हुई है। बताया जा रहा है कि उसी ने रतननाथ को इस यार्ड में मजदूरी का काम दिलवाया था। पुलिस के अनुसार घटना वाली रात के बाद से ही लाधूनाथ अपने पूरे परिवार के साथ अचानक जैसलमेर छोड़कर चला गया है। यही कारण है कि पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि शव को जल्दबाजी में दफनाने का फैसला किसने लिया, इसमें लाधूनाथ की क्या भूमिका थी और घटना के तुरंत बाद उसके गायब होने के पीछे क्या वजह है। पुलिस की टीमें उसकी तलाश में जुटी हुई हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, एफएसएल रिपोर्ट और संबंधित लोगों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही, साक्ष्य छिपाने या किसी अन्य अपराध की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। फिलहाल जैसलमेर का यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर मजदूर की मौत का कारण जांच के दायरे में है, वहीं दूसरी ओर शव को बिना सूचना दिए दफनाने और मुख्य रिश्तेदार के अचानक लापता होने से कई सवाल खड़े हो गए हैं। अब सभी की निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच पर टिकी हुई हैं, जिनसे इस रहस्यमयी घटनाक्रम की सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।
विज्ञापन
छह महीने से परिवार सहित रह रहा था मजदूर
पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान रतननाथ के रूप में हुई है, जो मूल रूप से भीलवाड़ा जिले का रहने वाला था और पिछले करीब छह महीने से जैसलमेर की लक्ष्मीचंद सांवल कॉलोनी स्थित नगरपरिषद के एमआरएफ सेंटर के पास अपनी पत्नी और 12 वर्षीय बेटे के साथ कच्ची झोपड़ी बनाकर रह रहा था। वह यहीं मजदूरी करने के साथ कचरे की छंटाई का काम करता था और इसी से परिवार का पालन-पोषण कर रहा था।
विज्ञापन
क्या है MRF सेंटर?
नगर परिषद का एमआरएफ सेंटर वह स्थान है जहां शहर से एकत्रित सूखा कचरा लाया जाता है। यहां प्लास्टिक, लोहे, कांच, धातु और अन्य उपयोगी सामग्री को अलग-अलग किया जाता है। इसके बाद छांटे गए कचरे को आगे बड़ाबाग स्थित मुख्य डंपिंग यार्ड में भेजा जाता है। रतननाथ इसी केंद्र पर मजदूरी करता था।
विज्ञापन
शराब के नशे में उठाया आत्मघाती कदम
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि शनिवार शाम रतननाथ ने अत्यधिक शराब का सेवन किया था। देर रात वह एमआरएफ सेंटर के टीन शेड के नीचे पहुंचा और रस्सी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। काफी देर तक जब वह वापस नहीं लौटा तो परिजनों और साथ रहने वाले लोगों ने उसकी तलाश की। खोजबीन के दौरान उसका शव फंदे से लटका मिला।
ये भी पढ़ें: राजस्थान: जयपुर-अजमेर हाईवे पर भीषण हादसा, श्रद्धालुओं से भरी बस को ट्रक ने मारी टक्कर; तीन की मौत
बताया जा रहा है कि पुलिस कार्रवाई, पूछताछ और कानूनी प्रक्रियाओं के डर से मृतक की पत्नी और उसके साथ मौजूद कुछ लोगों ने किसी को सूचना नहीं दी और देर रात ही एमआरएफ सेंटर के सामने स्थित एक सूनसान खाली प्लॉट में गड्ढा खोदकर शव को चुपचाप दफना दिया गया। रविवार सुबह जब इस घटना की जानकारी मृतक के अन्य रिश्तेदारों को मिली तो उन्होंने तुरंत भीलवाड़ा में रहने वाले परिजनों से संपर्क किया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही जैसलमेर शहर कोतवाली पुलिस के अधिकारी सुरजाराम जाखड़ पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और पूरे घटनास्थल का निरीक्षण किया।
पुलिस जब मौके पर पहुंची तब तक शव दफनाया जा चुका था। ऐसे में कानून के अनुसार प्रशासनिक अनुमति के बिना शव को बाहर नहीं निकाला जा सकता। पुलिस ने जिला प्रशासन से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद शव को कब्र से निकालकर मेडिकल बोर्ड की देखरेख में पोस्टमार्टम कराया जाएगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि मौत वास्तव में फांसी लगाने से हुई या फिर इसके पीछे कोई अन्य कारण भी है।
रिश्तेदार की भूमिका पर पुलिस को संदेह
जांच के दौरान पुलिस की नजर मृतक के एक रिश्तेदार लाधूनाथ पर टिकी हुई है। बताया जा रहा है कि उसी ने रतननाथ को इस यार्ड में मजदूरी का काम दिलवाया था। पुलिस के अनुसार घटना वाली रात के बाद से ही लाधूनाथ अपने पूरे परिवार के साथ अचानक जैसलमेर छोड़कर चला गया है। यही कारण है कि पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि शव को जल्दबाजी में दफनाने का फैसला किसने लिया, इसमें लाधूनाथ की क्या भूमिका थी और घटना के तुरंत बाद उसके गायब होने के पीछे क्या वजह है। पुलिस की टीमें उसकी तलाश में जुटी हुई हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, एफएसएल रिपोर्ट और संबंधित लोगों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही, साक्ष्य छिपाने या किसी अन्य अपराध की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। फिलहाल जैसलमेर का यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर मजदूर की मौत का कारण जांच के दायरे में है, वहीं दूसरी ओर शव को बिना सूचना दिए दफनाने और मुख्य रिश्तेदार के अचानक लापता होने से कई सवाल खड़े हो गए हैं। अब सभी की निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच पर टिकी हुई हैं, जिनसे इस रहस्यमयी घटनाक्रम की सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।