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ओडवाडा गांव विवाद: तनाव-संघर्ष के बाद 29 लोगों की याचिका पर हुई सुनवाई, कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने पर लगाई रोक

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालोर Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Fri, 17 May 2024 07:18 PM IST
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सार

जालोर जिले के ओडवाड़ा गांव में दो भाइयों के जमीनी विवाद के मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने करीब 440 कच्चे-पक्के मकानों को तोड़ने के आदेश जारी किए थे। इसके बाद कार्रवाई बवाल बढ़ा तो हाईकोर्ट ने शुक्रवार फिर से मामले में सुनवाई के बाद अतिक्रमण हटाने पर रोक लगा दी।

Odwada village encroachment: After hearing the petition, the court banned the removal of encroachment
ओडवाडा गांव अतिक्रमण पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

जालौर के ओडवाडा गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया में उबाल मचा हुआ है। कल से अब तक तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं। शुक्रवार को घटना के 24 घंटे बाद सरकार की ओर से बयान आया कि इस कार्रवाई में कोई भी परिवार बेघर नहीं हुआ है। वहीं, राजस्थान हाईकोर्ट ने अब अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर रोक लगा दी है।

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गुरुवार को सरकार के आदेश के बाद ओडवाडा गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद पुलिस प्रशासन को भारी विरोध का सामना करना पड़ा। मामले में सियासी रंग भी देखने को मिला। इस घटना पर कांग्रेस सरकार जमकर घेराव किया। पूर्व सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट ने इस मामले में सरकार की आलोचना की। 
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शुक्रवार को फिर हुई सनवाई
जालौर के ओडवाडा गांव में गुरुवार को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान पहले दिन 70 अतिक्रमण हटाए गए थे। इसके बाद बवाल शुरू हो गया। सियासी उठापटक, विरोध, तनाव को देखते हुए शुक्रवार को फिर जोधपुर हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने कोर्ट से कहा कि पीड़ित लोग करीब 80 साल से इन मकानों में रह रहे हैं। इनके पास बिजली-पानी के कनेक्शन हैं। इनके पास पट्टा भी है। इस हिसाब से इनको अतिक्रमणकारी नहीं का जा सकता। 26 लोगों की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विनीत माथुर की बेंच ने अतिक्रमण की इस कार्रवाई पर रोक लगा दी।

दस्तावेजों का वेरिफिकेशन कराने को कहा
जस्टिस विनीत माथुर ने आदेश जारी करते हुए प्रशासन को सबसे पहले दस्तावेजों का वेरिफिकेशन करने के लिए कहा है। कोर्ट ने साफ किया है कि जांच पूरी होने तक किसी प्रकार का अतिक्रमण नहीं हटाया जाएगा। इस संबंध में अधिवक्ता श्याम पालीवाल ने बाबू सिंह व अन्य की ओर से हाई कोर्ट में पक्ष रखा गया था, जिसमें कहा गया था कि जिला प्रशासन ने बिना विधिक प्रक्रिया के बुलडोजर चलाया है। इस केस की सुनवाई के बाद कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने पर अस्थाई रोक लगा दी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता श्याम पालीवाल ने पैरवी करते हुए कहा कि हमारे पास 1930 से यहां रहने का प्रमाण है इसके अलावा हमारे को पट्टे दे रखे हैं। सनद दे रखी है, लेकिन जिला प्रशासन ने केवल पीएलपीसी के तहत केस दर्ज कर एक तरफा कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी। हमारे दस्तावेजों का वेरिफिकेशन नहीं किया गया। तीन दशक से हम यहां रह रहे हैं, जिसके लिए हमें यहां जिला प्रशासन द्वारा ही पट्टे जारी किए गए थे। केवल 91 का नोटिस जारी करते हुए यह पूरी कार्रवाई की गई, जो उचित नहीं थी।



उधर, आहोर विधायक छगन सिंह राजपुरोहित गुरुवार को ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मिलने पहुंचे और मामले में अवगत कराया। कार्रवाई को रोकने के लिए ग्रामीणों की बात रखी थी।

शुक्रवार को कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत, राज्य मंत्री ओटाराम देवासी, विधायक छगन सिंह, संगठन मंत्री भाजपा सांवलाराम देवासी ओड़वाड़ा गांव पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। साथ ही लोगों की हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। वहीं, गुरुवार को कार्रवाई के दौरान काटे गए बिजली कनेक्शन को भी शुक्रवार को पुनः जोड़ा गया। 

अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद शुक्रवार को कांग्रेस की ओर से एक कमेटी का गठन किया गया, जो ओड़वाड़ा गांव में जाकर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद लोगों से मिलने उनके हालात जानने के लिए पहुंचे। इस कमेटी में पूर्व मंत्री सुखराम विश्नोई, जालोर से कांग्रेस के प्रत्याशी वैभव गहलोत, कांग्रेस महासचिव मोहन डागर, हरीश चौधरी, ललित बोरीवाल शामिल थे। इस दौरान उन्होंने ओड़वाड़ा में लोगों से मिलकर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान उनके साथ हुए व्यवहार की शिकायतें सुनीं और नुकसान का जायजा लेकर हरसंभव मदद का भरोसा दिया। 

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