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Jhalawar News: किसानों को मिला न्याय, खराब बीज की कीमत चुकाएगा बीज निगम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झालावाड़
Published by: झालावाड़ ब्यूरो
Updated Wed, 07 Jan 2026 01:08 PM IST
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सार
झालावाड़ जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने सोयाबीन बीज के अंकुरित न होने से किसानों को हुए नुकसान के मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। आयोग ने माना कि किसानों को खराब गुणवत्ता का बीज दिया गया, जिससे उन्हें आर्थिक और मानसिक क्षति हुई।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, झालावाड़ ने सोयाबीन बीज के अंकुरित न होने से किसानों को हुए नुकसान के मामले में एक अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने राजस्थान स्टेट सीड्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड, झालावाड़ तथा राजस्थान राज्य बीज निगम लिमिटेड, जयपुर को किसानों को मुआवजा देने के आदेश जारी किए हैं।
झालावाड़ उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष ईश्वरी लाल वर्मा और सदस्य वीरेन्द्र सिंह रावत ने मनोहरथाना क्षेत्र के बड़बद निवासी किसान रामरतन नागर और छीतरलाल खंगार की ओर से दायर परिवाद को स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया। आयोग ने किसान रामरतन नागर को 1 लाख रुपये और किसान छीतरलाल खंगार को 50 हजार रुपये क्षतिपूर्ति के रूप में अदा करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही दोनों किसानों को मानसिक संताप के लिए 10-10 हजार रुपये तथा परिवाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये देने का भी आदेश दिया गया है। यह पूरी राशि निर्णय की तिथि से 45 दिनों के भीतर अदा करनी होगी।
बुवाई के बाद जमीन में सड़ गया था बीज
परिवादी किसानों ने आयोग के समक्ष बताया कि उन्होंने खरीफ फसल के लिए राजस्थान स्टेट सीड्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड, झालावाड़ से सोयाबीन का बीज खरीदा था और उसे अपने खेतों में बोया। लेकिन निर्धारित समय पर बीज अंकुरित नहीं हुआ। जब खेतों की खुदाई की गई तो सामने आया कि बीज जमीन में ही सड़ चुका था। इस संबंध में किसानों ने बीज निगम को शिकायत भी की थी। निगम के अधिकारियों ने खेतों का निरीक्षण तो किया, लेकिन न तो मौके की रिपोर्ट तैयार की गई और न ही किसानों को किसी प्रकार की क्षतिपूर्ति प्रदान की गई।
यह भी पढ़ें- राजस्थान के नाम दर्ज नया रिकॉर्ड: सूबे में मिली पहली दुर्लभ नीली तितली, किन-किन नामों से जानी जाती है; जानें
आयोग ने खराब गुणवत्ता के बीज की पुष्टि की
सुनवाई के दौरान आयोग ने माना कि किसानों को खराब गुणवत्ता का बीज उपलब्ध कराया गया, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक पीड़ा भी झेलनी पड़ी। आयोग ने यह भी आदेश दिया कि क्षतिपूर्ति की राशि पर परिवाद प्रस्तुत करने की तिथि से वसूली की तिथि तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा। इस फैसले के बाद किसानों में संतोष देखा जा रहा है और इसे उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।
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बुवाई के बाद जमीन में सड़ गया था बीज
परिवादी किसानों ने आयोग के समक्ष बताया कि उन्होंने खरीफ फसल के लिए राजस्थान स्टेट सीड्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड, झालावाड़ से सोयाबीन का बीज खरीदा था और उसे अपने खेतों में बोया। लेकिन निर्धारित समय पर बीज अंकुरित नहीं हुआ। जब खेतों की खुदाई की गई तो सामने आया कि बीज जमीन में ही सड़ चुका था। इस संबंध में किसानों ने बीज निगम को शिकायत भी की थी। निगम के अधिकारियों ने खेतों का निरीक्षण तो किया, लेकिन न तो मौके की रिपोर्ट तैयार की गई और न ही किसानों को किसी प्रकार की क्षतिपूर्ति प्रदान की गई।
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आयोग ने खराब गुणवत्ता के बीज की पुष्टि की
सुनवाई के दौरान आयोग ने माना कि किसानों को खराब गुणवत्ता का बीज उपलब्ध कराया गया, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक पीड़ा भी झेलनी पड़ी। आयोग ने यह भी आदेश दिया कि क्षतिपूर्ति की राशि पर परिवाद प्रस्तुत करने की तिथि से वसूली की तिथि तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा। इस फैसले के बाद किसानों में संतोष देखा जा रहा है और इसे उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।
