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ऊर्जा के भविष्य की नई दिशा: IIT जोधपुर का ये शोध बदल सकता है दुनिया की पावर तस्वीर, क्यों है महत्वपूर्ण कदम?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर Published by: जोधपुर ब्यूरो Updated Thu, 16 Apr 2026 09:12 AM IST
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सार

वैश्विक ऊर्जा चुनौतियों से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आईआईटी जोधपुर के भौतिकी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शाहब अहमद उन्नत ऊर्जा सामग्रियों पर अग्रणी शोध का नेतृत्व कर रहे हैं। यह शोध भविष्य में ऊर्जा उत्पादन और भंडारण के तरीकों को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखता है। पढ़ें पूरी खबर

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आईआईटी जोधपुर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

आईआईटी जोधपुर के भौतिकी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शाहब अहमद के नेतृत्व में उन्नत ऊर्जा प्रौद्योगिकियों पर किया जा रहा शोध भविष्य में ऊर्जा उत्पादन और भंडारण के तरीके बदलने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। वर्ष 2019 में स्थापित एडवांस्ड एनर्जी मटेरियल्स लैब में उनकी टीम भौतिकी, सामग्री विज्ञान और इंजीनियरिंग के समन्वय से अत्याधुनिक समाधान विकसित कर रही है।
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शोध का मुख्य फोकस सॉल्यूशन-प्रोसेसेबल सेमीकंडक्टर्स और मेटल हैलाइड पेरोव्स्काइट्स पर है, जो कम लागत में उच्च दक्षता वाले सोलर सेल बनाने की क्षमता रखते हैं। टीम क्वासी-डायमेंशनल पेरोव्स्काइट्स पर काम कर रही है, जो बेहतर स्थिरता और अधिक ऊर्जा दक्षता प्रदान करते हैं, जिससे भविष्य की सौर तकनीक को मजबूती मिल सकती है।
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इस शोध के केंद्र में कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रश्न हैं, जैसे क्या सॉल्यूशन-प्रोसेसेबल सेमीकंडक्टर्स का उपयोग कर उच्च दक्षता वाली सोलर सेल बनाई जा सकती हैं? क्या एक ही मटेरियल सिस्टम में सौर ऊर्जा का संग्रहण और भंडारण संभव है? क्या पारंपरिक बैटरियों को मौजूदा तकनीकों से कहीं अधिक शक्तिशाली बनाया जा सकता है? डॉ. अहमद की टीम इन चुनौतियों के समाधान की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।


इस शोध का प्रमुख फोकस मेटल हैलाइड पेरोव्स्काइट्स पर है, जो सौर ऊर्जा और ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में तेजी से उभरती हुई सामग्री है। इनमें उत्कृष्ट प्रकाश-अवशोषण क्षमता होती है और इन्हें कम लागत वाली सॉल्यूशन-आधारित प्रक्रियाओं से तैयार किया जा सकता है, जिससे ये सोलर सेल, फोटोडिटेक्टर, एलईडी और लेजर तकनीक में उपयोग के लिए उपयुक्त बनती हैं।

ऊर्जा भंडारण की बढ़ती मांग पर हो सकता है सहायक
आईआईटी जोधपुर की टीम क्वासी-डायमेंशनल पेरोव्स्काइट्स विकसित कर रही है, जो उच्च दक्षता के साथ बेहतर स्थिरता प्रदान करते हैं। यह पारंपरिक पेरोव्स्काइट्स की एक प्रमुख कमी को दूर करने की दिशा में अहम कदम है।

ऊर्जा भंडारण की बढ़ती मांग को देखते हुए, डॉ. अहमद की लैब उच्च-प्रदर्शन बैटरी तकनीकों पर भी काम कर रही है। इसमें नैनोस्ट्रक्चर्ड मटेरियल्स के माध्यम से लिथियम-आयन बैटरियों को बेहतर बनाना, लिथियम-सल्फर (Li-S) और जिंक-आयन जैसी अगली पीढ़ी की बैटरियों पर शोध, तथा पहनने योग्य और पोर्टेबल डिवाइस के लिए फ्लेक्सिबल बैटरियों का विकास शामिल है।

ये अत्यंत उपयोगी साबित हो सकती
टीम की एक उल्लेखनीय उपलब्धि कार्बन नैनोट्यूब आधारित माइक्रोस्ट्रक्चर का उपयोग कर सल्फर कैथोड का विकास है, जिससे Li-S बैटरियों में लंबे समय से चली आ रही “शटल इफेक्ट” की समस्या को कम किया गया है और उनकी दक्षता व आयु में सुधार हुआ है।

एक अभिनव पहल के तहत, यह लैब फोटो-बैटरी कॉम्पैक्ट डिवाइस विकसित कर रही है, जो सौर ऊर्जा को एकत्र करने और उसे इलेक्ट्रोकेमिकल ऊर्जा के रूप में स्टोर करने में सक्षम है। पारंपरिक प्रणालियों के विपरीत, जिनमें अलग-अलग सोलर पैनल और बैटरी की आवश्यकता होती है, यह एकीकृत तकनीक सिस्टम की जटिलता, लागत और वजन को कम करती है। यह तकनीक वेयरेबल इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑफ-ग्रिड IoT डिवाइस, ड्रोन, पोर्टेबल सिस्टम और अंतरिक्ष व दूरस्थ क्षेत्रों में उपयोग के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो सकती है।

डॉ. शाहब ने व्यापक शोध की आवश्यकता पर दिया जोर
डॉ. शाहब अहमद ने कहा, “हमारा लक्ष्य ऐसी ऊर्जा तकनीकों का विकास करना है जो न केवल दक्ष हों, बल्कि स्केलेबल, किफायती और पर्यावरण के अनुकूल भी हों। हम ऐसे समाधान विकसित करना चाहते हैं जो दूरदराज के क्षेत्रों को ऊर्जा प्रदान कर सकें, पोर्टेबल डिवाइस को सपोर्ट करें और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करें।”

उन्होंने यह भी बताया कि सौर ऊर्जा के संग्रहण और भंडारण को एक ही प्लेटफॉर्म में एकीकृत करना तकनीकी रूप से परिवर्तनकारी होने के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण भी है। चूंकि यह तकनीक अभी प्रारंभिक चरण में है, इसलिए इसके वास्तविक उपयोग के लिए सामग्री चयन, निर्माण प्रक्रियाओं और डिवाइस डिजाइन पर व्यापक शोध की आवश्यकता है।

डॉ. अहमद का यह कार्य ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और सतत भविष्य के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आईआईटी जोधपुर में हो रहा यह शोध नवाचार, बहु-विषयक सहयोग और सामाजिक प्रभाव पर केंद्रित है तथा स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों की सीमाओं को लगातार आगे बढ़ा रहा है।

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