{"_id":"6a33638c1601686be0000af8","slug":"kota-news-pawan-khera-targets-pm-modi-s-diplomacy-says-trump-s-praise-is-no-reason-for-celebration-2026-06-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kota News: ट्रंप की तारीफ से खुश न हों मोदी, पीएम की कूटनीति पर पवन खेड़ा का निशाना, बोले- कैसे करें भरोसा?","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kota News: ट्रंप की तारीफ से खुश न हों मोदी, पीएम की कूटनीति पर पवन खेड़ा का निशाना, बोले- कैसे करें भरोसा?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: Priya Verma
Updated Thu, 18 Jun 2026 08:48 AM IST
विज्ञापन
सार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि देश को सिर्फ तारीफ नहीं, बल्कि वास्तविक परिणाम देखने चाहिए। उन्होंने भारत-अमेरिका संबंधों और एफटीए को लेकर केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा किया।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
विस्तार
कोटा में राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए आए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर लिया। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों, भारत-अमेरिका संबंधों और भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर कई सवाल उठाए।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, जिसमें उन्होंने कहा था कि "यदि भारत पर हमला हुआ तो हम उसकी मदद के लिए मौजूद रहेंगे", पवन खेड़ा ने कहा कि भारत को यह नहीं भूलना चाहिए कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान युद्धविराम की घोषणा अमेरिका की ओर से की गई थी, जबकि वास्तविकता सभी जानते हैं।
उन्होंने कहा- "क्या भारत इसे भूल सकता है? क्या हम यह भूल सकते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर के साथ लंच करते हैं? यदि हम यह उम्मीद करें कि जो व्यक्ति भारत के दुश्मनों का मित्र है, वह भारत का सच्चा मित्र बनकर हमारा समर्थन करेगा, तो यह गलत होगा।"
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: Rahul Gandhi: ‘यह राजनीति नहीं, युवाओं की आवाज का मंच’, कार्यक्रम में बोले राहुल; छात्रा का सुसाइड नोट दिखाया
15 जुलाई से लागू होने जा रहे भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर प्रतिक्रिया देते हुए खेड़ा ने कहा कि सरकार समझौते करती रहे, लेकिन देश को यह भी बताया जाना चाहिए कि इन समझौतों से भारत को क्या लाभ हो रहा है और कहीं कोई नुकसान तो नहीं उठाना पड़ रहा। उन्होंने कहा कि सिर्फ समझौते करना ही पर्याप्त नहीं है। जनता को यह भी पता होना चाहिए कि इन सौदों का आर्थिक और व्यापारिक असर क्या होगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को "बहुत सख्त और कुशल वार्ताकार" बताए जाने पर भी पवन खेड़ा ने तंज कसा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी किसी भी व्यक्ति की तारीफ से खुश हो जाते हैं, लेकिन सवाल यह है कि ऐसे बयानों से देश को क्या हासिल होता है।
खेड़ा ने कहा- "यह कैसी बातचीत है, जिसमें भारत को हर साल अमेरिका से 500 मिलियन डॉलर का सामान खरीदना पड़ता है? यह कैसी बातचीत है, जिसमें हमारे तीन निर्दोष नाविक मारे जाते हैं और माफी मांगने के बजाय अमेरिका हमें धमकाता है? यह कैसी बातचीत है, जिसमें भारतीयों को हथकड़ी लगाकर वापस भेजा जाता है? और यह कैसी बातचीत है, जिसमें वीजा प्रतिबंधों के कारण हमारे शिक्षित पेशेवर परेशान हैं?"
उन्होंने कहा कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते या कूटनीतिक संबंध का मूल्यांकन इस आधार पर होना चाहिए कि उससे भारत और भारतीय नागरिकों को कितना लाभ पहुंचा है। पवन खेड़ा ने कहा कि सरकार को विदेश नीति और व्यापारिक समझौतों के वास्तविक परिणामों पर भी जवाब देना चाहिए, न कि केवल राजनीतिक प्रचार पर ध्यान देना चाहिए।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, जिसमें उन्होंने कहा था कि "यदि भारत पर हमला हुआ तो हम उसकी मदद के लिए मौजूद रहेंगे", पवन खेड़ा ने कहा कि भारत को यह नहीं भूलना चाहिए कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान युद्धविराम की घोषणा अमेरिका की ओर से की गई थी, जबकि वास्तविकता सभी जानते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने कहा- "क्या भारत इसे भूल सकता है? क्या हम यह भूल सकते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर के साथ लंच करते हैं? यदि हम यह उम्मीद करें कि जो व्यक्ति भारत के दुश्मनों का मित्र है, वह भारत का सच्चा मित्र बनकर हमारा समर्थन करेगा, तो यह गलत होगा।"
ये भी पढ़ें: Rahul Gandhi: ‘यह राजनीति नहीं, युवाओं की आवाज का मंच’, कार्यक्रम में बोले राहुल; छात्रा का सुसाइड नोट दिखाया
15 जुलाई से लागू होने जा रहे भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर प्रतिक्रिया देते हुए खेड़ा ने कहा कि सरकार समझौते करती रहे, लेकिन देश को यह भी बताया जाना चाहिए कि इन समझौतों से भारत को क्या लाभ हो रहा है और कहीं कोई नुकसान तो नहीं उठाना पड़ रहा। उन्होंने कहा कि सिर्फ समझौते करना ही पर्याप्त नहीं है। जनता को यह भी पता होना चाहिए कि इन सौदों का आर्थिक और व्यापारिक असर क्या होगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को "बहुत सख्त और कुशल वार्ताकार" बताए जाने पर भी पवन खेड़ा ने तंज कसा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी किसी भी व्यक्ति की तारीफ से खुश हो जाते हैं, लेकिन सवाल यह है कि ऐसे बयानों से देश को क्या हासिल होता है।
खेड़ा ने कहा- "यह कैसी बातचीत है, जिसमें भारत को हर साल अमेरिका से 500 मिलियन डॉलर का सामान खरीदना पड़ता है? यह कैसी बातचीत है, जिसमें हमारे तीन निर्दोष नाविक मारे जाते हैं और माफी मांगने के बजाय अमेरिका हमें धमकाता है? यह कैसी बातचीत है, जिसमें भारतीयों को हथकड़ी लगाकर वापस भेजा जाता है? और यह कैसी बातचीत है, जिसमें वीजा प्रतिबंधों के कारण हमारे शिक्षित पेशेवर परेशान हैं?"
उन्होंने कहा कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते या कूटनीतिक संबंध का मूल्यांकन इस आधार पर होना चाहिए कि उससे भारत और भारतीय नागरिकों को कितना लाभ पहुंचा है। पवन खेड़ा ने कहा कि सरकार को विदेश नीति और व्यापारिक समझौतों के वास्तविक परिणामों पर भी जवाब देना चाहिए, न कि केवल राजनीतिक प्रचार पर ध्यान देना चाहिए।