Kotputli-Behror News: कम्बोडिया से चल रहे साइबर फ्रॉड गिरोह का भंडाफोड़, युवकों को विदेश भेजकर कराते थे ठगी
ऑपरेशन साइबर मुक्ति के तहत कोटपूतली-बहरोड़ पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई में कम्बोडिया से संचालित चाइनीज साइबर गिरोह का खुलासा हुआ है। ये गिरोह डिजिटल अरेस्ट और इन्वेस्टमेंट फ्रॉड के जरिए ठगी करने में लगा हुआ था।
विस्तार
कोटपूतली-बहरोड़ पुलिस ने ऑपरेशन साइबर मुक्ति के तहत अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी संयुक्त कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस कार्रवाई में कम्बोडिया से संचालित चाइनीज साइबर गिरोह का खुलासा हुआ है, जो डिजिटल अरेस्ट, फर्जी ट्रेडिंग ऐप और इन्वेस्टमेंट फ्रॉड के जरिए भारतीय नागरिकों से हजारों करोड़ रुपये की ठगी कर रहा था।
साइबर सेल और जिले के 15 थानों की 25 से अधिक टीमों ने एक साथ दबिश देकर बानसूर, रामनगर, गूंता, बुचियावास, मोठुका, फतेहपुर, सान्थलपुर, कोटपूतली, बहरोड़ सहित कोटपूतली-बहरोड़ और खैरथल-तिजारा जिले के कई इलाकों में कार्रवाई की। इस दौरान 41 संदिग्धों को डिटेन किया गया, जिनमें से पूछताछ के बाद 25 आरोपियों को धारा 170 बीएनएसएस के तहत गिरफ्तार किया गया। पूरी कार्रवाई में 100 से अधिक पुलिसकर्मी शामिल रहे।
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पुलिस जांच में सामने आया कि कम्बोडिया में चाइनीज अपराधियों द्वारा फर्जी कॉल सेंटर संचालित किए जा रहे थे। इन कॉल सेंटरों से खुद को सीबीआई, पुलिस, ईडी और कस्टम अधिकारी बताकर लोगों को डिजिटल अरेस्ट किया जाता था। इसके अलावा टेलीग्राम, व्हाट्सएप, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर शेयर मार्केट व निवेश के नाम से विज्ञापन देकर असली ऐप से मिलते-जुलते फर्जी ट्रेडिंग ऐप और वेबसाइट बनाकर ठगी की जाती थी।
इस पूरे नेटवर्क में युवकों को विदेश भेजने वाले मुख्य दलाल सुरेश सेन पुत्र रामदयाल सेन निवासी रामनगर थाना बानसूर को गिरफ्तार किया गया है। सुरेश सेन के खिलाफ साइबर पुलिस थाना कोटपूतली-बहरोड़ में बीएनएस और आईटी एक्ट की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार वह पहले भी लखनऊ में साइबर अपराध के एक मामले में आरोपी रह चुका है।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि सुरेश सेन और उसके साथियों ने बानसूर क्षेत्र से 50 से अधिक युवकों सहित सैकड़ों लोगों को वियतनाम और थाईलैंड के रास्ते कम्बोडिया भेजा। वहां उन्हें 15 दिन तक साइबर फ्रॉड की ट्रेनिंग दी जाती थी, जिसके बाद चाइनीज कॉल सेंटरों में तैनात किया जाता था। इन कॉल सेंटरों में भारत, नेपाल, पाकिस्तान और बांग्लादेश के करीब 1000 से 1500 लोग काम कर रहे थे, जिन्हें मासिक वेतन और ठगी की रकम पर इंसेंटिव दिया जाता था।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस जयपुर रेंज के निर्देश पर की गई इस कार्रवाई का नेतृत्व उप महानिरीक्षक सह पुलिस अधीक्षक देवेंद्र कुमार बिश्नोई ने किया। पुलिस अब विदेश भेजे गए युवकों, संपर्क नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक लेनदेन की गहन जांच कर रही है। पुलिस अधीक्षक ने आमजन से अपील की है कि विदेश में नौकरी दिलाने वाले किसी भी एजेंट पर बिना सत्यापन भरोसा न करें और साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें।
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