Kotputli-Behror News: नीमराणा में खेतानाथ जी महाराज का निर्वाण पर्व, राजस्थानभर से पहुंचे हजारों श्रद्धालु
कोटपूतली-बहरोड़ के जोशी होड़ा स्थित बाबा मस्तनाथ आश्रम में ब्रह्मनिष्ठ अवधूत बाबा खेतानाथ जी महाराज का 35वां निर्वाण पर्व श्रद्धा और अनुशासन के साथ मनाया गया। राजस्थान सहित हरियाणा और अन्य राज्यों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने समाधि स्थल पर दर्शन कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
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जोशी होड़ा स्थित बाबा मस्तनाथ आश्रम में ब्रह्मनिष्ठ अवधूत बाबा खेतानाथ जी महाराज का 35वां निर्वाण पर्व श्रद्धा, अनुशासन और आस्था के साथ मनाया गया। इस अवसर पर राजस्थान के विभिन्न जिलों के साथ-साथ हरियाणा और अन्य राज्यों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा की समाधि पर शीश नवाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। सुबह से देर शाम तक दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं और पूरा आश्रम परिसर बाबा के जयकारों से गूंजता रहा।
निर्वाण पर्व के मौके पर आयोजित संत समागम में संतों और महंतों ने बाबा खेतानाथ जी महाराज के तप, त्याग, साधना और मानव सेवा को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। मठाधीश शंकर नाथ जी महाराज की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में भजन-कीर्तन, प्रवचन और श्रद्धांजलि सभाओं के माध्यम से बाबा के जीवन दर्शन और आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का संदेश दिया गया।
आश्रम परिसर में देसी घी से बने विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की। मेले के स्वरूप में आयोजित इस निर्वाण पर्व में आस्था के साथ-साथ सामाजिक समरसता की झलक भी देखने को मिली। हर वर्ग और हर आयु के श्रद्धालुओं की भागीदारी ने आयोजन को विशेष और यादगार बना दिया।कार्यक्रम के दौरान शांति और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। उपखंड अधिकारी महेंद्र सिंह यादव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेश खींची और पुलिस अधीक्षक चारू गुप्ता के निर्देशन में व्यापक पुलिस बल तैनात किया गया, जिससे आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
निर्वाण पर्व पर देश-प्रदेश से आए कई साधु-संतों की गरिमामयी उपस्थिति रही। इनमें जमात 18 के महंत समुद्र नाथ महाराज, महंत कृष्णनाथ महाराज, महंत शुभनाथ महाराज, महंत गिरवरनाथ महाराज, महंत जागनाथ महाराज और महंत जशनाथ महाराज शामिल रहे। इसके अलावा सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र की प्रमुख हस्तियों ने भी पहुंचकर बाबा खेतानाथ जी महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित की। बाबा खेतानाथ जी महाराज का 35वां निर्वाण पर्व न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना, बल्कि सेवा, संयम और सद्भाव का संदेश देकर नीमराणा को राजस्थान के प्रमुख आध्यात्मिक आयोजनों की पंक्ति में स्थापित कर गया।