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राजस्थान: बेटे की सर्जरी के लिए विदेश जाना था, केस की जांच बनी अड़चन; हाईकोर्ट ने चार महीने की दी इजाजत

Wed, 30 Sep 2026 07:14 AM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Wed, 30 Sep 2026 07:14 AM IST
सार

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि केवल जांच लंबित होने से आरोपी की विदेश यात्रा नहीं रोकी जा सकती। बेटे की सर्जरी के लिए तीन याचिकाकर्ताओं को चार महीने की अनुमति दी।

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Rajasthan HC Allows Accused to Travel Abroad for Son’s Surgery
राजस्थान हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि केवल आपराधिक मामले की जांच लंबित होने के आधार पर आरोपी की अस्थायी विदेश यात्रा पर रोक नहीं लगाई जा सकती। यदि जांच में उसकी व्यक्तिगत मौजूदगी जरूरी नहीं है और वह न्यायालय की शर्तों का पालन करने को तैयार है, तो विदेश जाने की अनुमति दी जा सकती है।

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जस्टिस फरजंद अली की एकलपीठ ने महेश कुमार गुप्ता, चंदा गुप्ता और विनायक गुप्ता की याचिका स्वीकार करते हुए बीकानेर के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-4 का 7 अगस्त 2026 का आदेश रद्द कर दिया। तीनों को अधिकतम चार महीने के लिए अमेरिका जाने की अनुमति दी गई है।

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मामले में याचिकाकर्ताओं ने बताया कि उनका पुत्र अमेरिका में सर्जरी से गुजरने वाला है और वे उसके साथ रहना चाहते हैं। कोर्ट ने कहा कि भारतीय सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिवेश में बीमार संतान के पास रहना माता-पिता की स्वाभाविक मानवीय प्रतिक्रिया है। इसके लिए बच्चे का अस्पताल में भर्ती होना अनिवार्य नहीं है।

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राज्य ने विदेश यात्रा का विरोध करते हुए कहा था कि जांच अभी लंबित है और डॉक्टर की सलाह ओपीडी आधार पर है। हालांकि, हाईकोर्ट को रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस आधार नहीं मिला जिससे यह माना जाए कि याचिकाकर्ताओं की अस्थायी विदेश यात्रा से जांच प्रभावित होगी।

गिरफ्तारी से पहले ही मिली हुई है सुरक्षा

याचिकाकर्ताओं के खिलाफ गंगाशहर थाने में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज है। एफआईआर रद्द करने की याचिका भी हाईकोर्ट में लंबित है और दूसरी पीठ पहले ही उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा चुकी है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी से संरक्षण का मतलब जांच से छूट नहीं है। जांच एजेंसी कानून के अनुसार जांच जारी रख सकती है, लेकिन जांच के हर चरण में आरोपियों की व्यक्तिगत मौजूदगी जरूरी नहीं मानी जा सकती।

एलओसी से यात्रा में बाधा नहीं डालने के निर्देश

हाईकोर्ट ने संबंधित विदेश मंत्रालय, आव्रजन और पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं की विदेश यात्रा में बाधा न डाली जाए। उनके खिलाफ जारी लुक आउट सर्कुलर को भी यात्रा रोकने के लिए प्रभावी नहीं किया जाएगा।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि चार महीने की अवधि से अधिक विदेश में रहने की अनुमति नहीं होगी। याचिकाकर्ताओं की एफआईआर रद्द करने की याचिका पर अंतिम फैसला अभी बाकी है।

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