Nagaur gang rape: परिजनों के आगे झुकी गहलोत सरकार, मुआवजा-सरकारी नौकरी देगी, एसओजी करेगी जांच
नागौर के डीड़वाना में सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता की मौत के मामले में मांगों को लेकर हो रहा धरना-प्रदर्शन खत्म हो गया है। सरकार ने पीड़िता के परिजनों की मांगें मान ली है। इस केस में पुलिस की गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद जांच एसओजी को दे दी गई है।
विस्तार
नागौर के डीड़वाना में सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता की मौत के मामले में लगातार हो रहा धरना-प्रदर्शन अब खत्म हो गया है। मांगों को लेकर सरकार और पीड़िता के परिजनों के बीच सहमति बन गई है। परिजनों की पुलिस से मामले की जांच नहीं कराने की मांग सरकार ने मान ली है, अब इस केस की जांच एसओजी (विशेष संचालन समूह) करेगी। प्रशासन ने परिजनों को भरोसा दिया है कि आरोपी कोई भी हो, उसे बक्शा नहीं जाएगा। एसीएसटी एक्ट के तहत पीड़िता को मुआवजा दिया जाएगा और एक बच्चे को योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी भी दी जाएगी।
दरअसल, 13 दिन के संघर्ष के बाद पीड़ता की मौत हो गई थी। इसके बाद से परिजन कई मांगों को लेकर धरने पर बैठ गए थे। इस धरने में सांसद किरोड़ी लाल मीणा सहित कई भाजपा नेता भी शामिल हुए थे। तीन-चार दिन तक चले धरना-प्रदर्शन के बाद सरकार ने पीड़िता के परिजनों की लगभग सभी मांगें मान ली हैं।
परिजनों की मांग पर ये हुआ
- केस में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों की जांच हो, यह जांच पुलिस से न कराई जाए। सरकार ने एसओजी से मामले की जांच कराने की सहमति दी है।
- पीड़िता के बच्चों के पालन पोषण के लिए 50 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए। सरकार ने एसीएसटी एक्ट के तहत मुआवजा देने की सहमति दे दी है।
- परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। सरकार ने पीड़िता के एक बच्चे को उसकी योग्यता के आधार पर नौकरी देने की मांग पूरी करने का वादा किया है।
भाजपा सांसद से सरकार को दी थी चेतावनी
भाजपा सांसद किरोड़ी लाल मीणा और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने पीड़ित परिजनों के धरने में शामिल होकर सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। साथ ही पीड़ित परिवार की मांगों को जल्द से जल्द पूरा करने की चेतावनी सरकार को दी थी। प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार इस मामले को जल्द से जल्द खत्म करना चाहती थी। इसे लेकर प्रशासन के अधिकारी परिवार को मानाने के लिए काफी प्रयास कर रहे थे। सोमवार को सभी मांगों पर सहमति बनने के बाद पीड़ित परिवार ने धरना-प्रदर्शन खत्म कर दिया।
जानें...क्या है मामला
नागौर के डीडवाना उपखंड के गांव पालोट में एक विवाहिता लापता हो गई थी। महिला की तलाश के लिए परिजन रोज थाने आकर गुहार लगाते रहे, लेकिन सीआई नरेंद्र जाखड़ छुट्टी पर चले गए थे। इस बीच एसपी राममूर्ति जोशी डीडवाना थाना पहुंचे तो पीड़ित परिजनों ने उन्हें पूरे मामला की जानकारी दी थी। इसके बाद एक्शन में आई पुलिस टीम ने तुरंत संदिग्धों को गिरफ्तार कर पूछताछ की तो पूरा मामला खुल गया। आरोपियों ने पुलिस को बताया कि गैंगरेप के बाद उन्होंने महिला को गांव के बाहर एक खाई में फेंक दिया था। पीड़ित महिला पुलिस खाई में बेहोशी की हालत में मिली थी। छह दिन खाई में पड़े रहने के कारण उसके शरीर में कीड़े पड़ गए थे। गंभीर हालत में उसे सवाई मानसिंह अस्तपाल में भर्ती कराया गया था। यहां सात दिन चले इलाज के बाद 17 फरवरी को उसकी मौत हो गई थी।