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Rajsamand News: श्रीनाथजी को चढ़ा सवा लाख आम का भोग! ज्येष्ठाभिषेक स्नान महोत्सव में उमड़ा आस्था का सैलाब
Sun, 28 Jun 2026 08:39 PM IST
राजसमंद ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजसमंद
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Published by: राजसमंद ब्यूरो
Updated Sun, 28 Jun 2026 08:39 PM IST
सार
राजसमंद जिले के नाथद्वारा स्थित श्रीनाथजी मंदिर में ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर परंपरागत विधि-विधान से ज्येष्ठाभिषेक स्नान महोत्सव आयोजित किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच प्रभु श्रीनाथजी का अभिषेक किया गया और सवा लाख आम का विशेष भोग अर्पित किया गया।
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श्रीनाथज में ज्येष्ठाभिषेक स्नान महोत्सव उमड़े हजारों श्रद्धालु
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजसमंद जिले के नाथद्वारा स्थित पुष्टिमार्गीय प्रधानपीठ श्रीनाथजी की हवेली में रविवार को ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर परंपरागत श्रद्धा और वैदिक विधि-विधान के साथ ज्येष्ठाभिषेक स्नान महोत्सव मनाया गया। तिलकायत की आज्ञा से श्री विशाल बावा एवं श्री लाल बावा ने प्रभु श्रीनाथजी और लाडले लाल प्रभु का सुगंधित अधिवासित जल से पुरुष सूक्त के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अभिषेक किया। इस दौरान देशभर से आए बड़ी संख्या में वैष्णव श्रद्धालुओं ने प्रभु के अलौकिक दर्शन कर उत्सव का आनंद लिया।
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वैदिक मंत्रों के बीच हुआ ज्येष्ठाभिषेक स्नान
ज्येष्ठाभिषेक स्नान महोत्सव के दौरान वैदिक परंपराओं का पालन करते हुए प्रभु श्रीनाथजी का विशेष अभिषेक किया गया। सुगंधित अधिवासित जल से पुरुष सूक्त के मंत्रोच्चार के बीच हुए इस अनुष्ठान ने पूरे मंदिर परिसर को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया। श्रद्धालु सुबह से ही दर्शन के लिए कतारों में नजर आए।
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सवा लाख आम सहित विशेष भोग अर्पित
ज्येष्ठाभिषेक स्नान के बाद परंपरा के अनुसार प्रभु श्रीनाथजी को सवा लाख आम का विशेष भोग अर्पित किया गया। इसके साथ ही बीज चिरौंजी के लड्डू, अंकुरी, चटक, शक्कर का बूरा तथा विभिन्न ऋतुफल भी अर्पित किए गए। वैष्णव परंपरा में इन भोगों को भक्ति के बीज से लेकर उसके मधुर फल तक की आध्यात्मिक यात्रा का प्रतीक माना जाता है।
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ग्रीष्म ऋतु का सबसे प्रमुख शीतोपचार उत्सव
पुष्टिमार्गीय मान्यता के अनुसार ग्रीष्म ऋतु में प्रभु के सुख और शीतलता के लिए किए जाने वाले शीतोपचारों में ज्येष्ठाभिषेक स्नान महोत्सव का विशेष महत्व है। इस अवसर पर विशेष विधि से अधिवासित जल तैयार किया जाता है, जिससे प्रभु का दैवी अभिषेक किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन प्रभु की पूजा ब्रज के युवराज के राज्याभिषेक के भाव से भी की जाती है।
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हजारों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
उत्सव के दौरान मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए सुव्यवस्थित दर्शन व्यवस्था सुनिश्चित की। बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं को प्रभु के स्नान का पावन जल तथा सवा लाख आम के भोग का प्रसाद वितरित किया गया। मंदिर प्रशासन और सेवकों ने पूरे आयोजन के दौरान दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।