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Sirohi News: सनातन मूल्यों का संदेश देती वाल्मिकी रामायण कथा, उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिरोही Published by: सिरोही ब्यूरो Updated Sat, 24 Jan 2026 11:06 AM IST
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सार

सिरोही के परशुराम भवन में वाल्मिकी रामायण कथा के चौथे दिन शिवम महाराज ने भगवान राम के नामों की महिमा बताई। उन्होंने सनातन धर्म के पालन, गुरु सम्मान और सोशल मीडिया से दूरी बनाने का संदेश दिया।

On the fourth day of the Ram Katha event in Abu Road narrator urged people to follow truth and Sanatana Dharma
आबूरोड में रामकथा आयोजन के चौथे दिन कथावाचक ने सत्य एवं सनातन धर्म का अनुसरण करने का आग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विप्र समाज आबूरोड के तत्वावधान में शहर के परशुराम भवन में आयोजित वाल्मिकी रामायण कथा के चौथे दिन शुक्रवार को कथावाचक शिवम महाराज ने भगवान के नामों की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने श्रोताओं को सनातन धर्म के महत्व को समझाते हुए उसके अनुसरण का आग्रह किया।

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वाल्मिकी रामायण कथा के चौथे दिन कथावाचक शिवम महाराज ने भगवान के नामों एवं नामकरण की महिमा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भगवान राम का नामकरण गुरु वशिष्ठ द्वारा किया गया था और श्रीराम सदैव आनंद के दाता हैं। भगवान राम प्रेम को बढ़ाने वाले हैं, शत्रुघ्न सदा शत्रुओं का नाश करने वाले हैं, जबकि लक्ष्मण का अर्थ लक्ष्य में स्थिर रहने वाला मन है, जो राम भक्ति में लीन रहता है। कथावाचक ने बताया कि भगवान राम के बाल स्वरूप के दर्शन करने भगवान भोलेनाथ काकभुशुंडी जी के साथ ज्योतिषी का वेश धारण कर अयोध्या पहुंचे थे और उन्होंने भगवान के दर्शन किए। 

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कथा के चौथे दिन के आरंभ में व्यासपीठ की आरती की गई। इस अवसर पर गोपाल शर्मा, कमल मिश्रा, ओमप्रकाश पुष्कर, नारायण शर्मा, अलका शर्मा, नीलम जोशी, शोभा सनाढ्य, प्रेम गौतम, रमेश ओझा, बाबूलाल रावल, पंडित रमेश महाराज, सुमित जोशी, दामोदर चतुर्वेदी, सत्यनारायण शर्मा, रामप्रताप बाकलीवाल, संपत मेवाड़ा, ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष अमित जोशी एवं पंडित भरत बोहरा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

सोशल मीडिया का सीमित उपयोग करने का संदेश
कथावाचक संत शिवम महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है, जिसके कई गंभीर दुष्परिणाम भी सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के अंधानुकरण के बजाय सत्य और सनातन धर्म का अनुसरण करना चाहिए। रील संस्कृति से दूर रहकर वास्तविक धर्म, संस्कृति और आस्था को अपने जीवन का गौरव बनाएं, तभी जीवन सार्थक होगा।

 
पढ़ें: सैनी समाज के 19 जोड़ बने हमसफर, सामूहिक विवाह सम्मेलन में कुरीतियों के खात्मे का दिया संदेश 

संत शिवम महाराज ने माता-पिता और गुरु के सम्मान पर विशेष बल देते हुए कहा कि गुरु के माध्यम से सत्संग प्राप्त होता है और उनके द्वारा दी गई शिक्षा संस्कारों का निर्माण करती है। ये संस्कार जीवन भर सही मार्ग और सद्गति प्रदान करते हैं। उन्होंने वर्तमान दौर की ‘रील गुरु पूर्णिमा’ पर भी चिंता जताई और कहा कि आज गुरु पूर्णिमा केवल एक दिन का औपचारिक आयोजन बनकर रह गई है, जिसमें लोग गुरु के चरण छूकर फोटो व रील बनाकर डाल देते हैं और पूरे वर्ष गुरु को स्मरण तक नहीं करते। यह प्रवृत्ति भविष्य में गंभीर परिणाम लेकर आएगी।

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