राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने केंद्र सरकार के बजट पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि बजट सिर्फ गुणा-भाग या आंकड़ों का हिसाब नहीं होता, बल्कि इससे सरकार की सोच, नीयत और प्राथमिकताएं साफ दिखाई देती हैं।
सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल
सचिन पायलट ने कहा कि इतने वर्षों से सत्ता में रहने के बावजूद भाजपा सरकार का फोकस ऐसे मुद्दों पर बना हुआ है, जिनका ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस असर नजर नहीं आता। उन्होंने आरोप लगाया कि अब गांवों में कौन-सा काम होगा, इसका फैसला भी दिल्ली से थोपा जा रहा है, जिससे राज्यों की स्वायत्तता प्रभावित हो रही है।
राज्यों पर बढ़ते बोझ का आरोप
पायलट ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार राज्यों पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है और उनके निर्णय लेने की शक्ति को सीमित किया जा रहा है। उन्होंने तीन कृषि कानूनों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने जिद में आकर ये कानून बनाए, लेकिन जनविरोध के चलते आखिरकार उन्हें वापस लेना पड़ा।
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नरेगा और युवाओं के मुद्दे पर बयान
महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (नरेगा) का उल्लेख करते हुए पायलट ने कहा कि अब इस योजना से महात्मा गांधी के नाम को भी हटाया गया है, जो सरकार की सोच को दर्शाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगामी बजट में युवाओं की बेरोजगारी दूर करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे और मध्यम वर्ग को राहत देने वाले फैसले लिए जाएंगे।
जनहित और जमीनी जरूरतों पर जोर
पायलट ने कहा कि देश के आम लोग आज भी सरकार की नीतियों से सीधे तौर पर प्रभावित होते हैं, ऐसे में बजट को जनहितकारी और ज़मीनी जरूरतों के अनुरूप होना चाहिए।