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UP: 'इतनी गहराई में खोदाई कैसे कर दी?', युवराज के डूबने पर SIT ने नोएडा प्राधिकरण से पूछे ये सवाल; नया अपडेट
अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 01 Feb 2026 02:56 PM IST
सार
ग्रेटर नोएडा में इंजीनियर युवराज की मौत मामले में एसआईटी ने नोएडा प्राधिकरण से कई सवाल पूछे हैं। एसआईटी ने नोएडा प्राधिकरण से पूछा कि इतनी गहरी खोदाई कैसे कर दी गई। खनन विभाग की एनओसी का ब्योरा भी मांगा है।
नोएडा सेक्टर-150 में 16 जनवरी की रात सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज तालाब बने जिस प्लाट में जिस जगह डूबा था वहां की गहराई जलभराव समेत 55 से 70 फीट होने का अनुमान है। यह जानकारी हादसे की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) को एसडीआरएफ-एनडीआरएफ की तरफ से दी गई है।
एसआईटी ने नोएडा प्राधिकरण से पूछा है कि इतनी गहराई तक खोदाई और जलभराव सेक्टर के बीच कैसे हुआ। अगर खनन विभाग की तरफ से खोदाई की एनओसी दी गई थी तो उसका भी ब्यौरा उपलब्ध करवाया जाए।
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इंजीनियर युवराज मामले में NGT ने लिया स्वत: संज्ञान
- फोटो : अमर उजाला GFX
साथ ही निगरानी के लिए प्राधिकरण की तरफ से जवाब में वर्क सर्कल-10 के जेई एई का नाम दिया गया था। एसआईटी ने जीएम और वरिष्ठ प्रबंधक की भी जिम्मेदारी पर जवाब मांगा है। यही नहीं सड़क सुरक्षा के इंतजाम न होने पर नोएडा ट्रैफिक सेल से जिम्मेदारों के नाम मांगे हैं। इन सवालों के जवाब प्राधिकरण की तरफ से भेजे जाने की सूचना है।
गौरतलब है कि हादसे की जांच कर रही एसआईटी प्राथमिक रिपोर्ट शासन को दे चुकी है। इसके बाद जिम्मेदारी निर्धारण के लिए प्राधिकरण, पुलिस और प्रशासन से दिए गए जवाबों को और स्पष्ट करवाया जा रहा है। सूत्रों की माने तो गहराई से हुई खोदाई को लेकर प्राधिकरण की तरफ से खनन विभाग की एनओसी का हवाला दिया गया है।
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घटना स्थल पर युवराज की मौत को लेकर जॉच करने पहुंची एसआईटी की टीम
- फोटो : अमर उजाला
यह भी बताया गया है कि सड़क पर सुरक्षा इंतजाम मौजूद थे। बिल्डर को नियोजन, वर्क सर्कल और जल विभाग की तरफ से पत्र भेजे जाने की जानकारी भी दी गई है।
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इंजीनियर युवराज की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
250 से ज्यादा कर्मियों के दर्ज हुए बयान
एसआईटी जांच के 11 दिन बीत चुके हैं। इसमें अब तक 250 से ज्यादा पुलिस-प्रशासन-प्राधिकरण के कर्मचारियों व अधिकारियों के बयान दर्ज हुए हैं। विभागों से पहले सवाल फिर उन पर दिए गए जवाबों पर भी सवाल किए गए हैं। सभी विभागों से 12 अधिकारी-कर्मचारी हादसे की जांच के दायरे में हैं।
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