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घी के मालपुए न बनाने पर समाज से निकाला: मृत्यु भोज में परोसा था साधारण खाना; 43 परिवारों का हुक्का-पानी बंद
Fri, 26 Jun 2026 03:27 PM IST
सिरोही ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिरोही
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिरोही
Published by: सिरोही ब्यूरो
Updated Fri, 26 Jun 2026 03:27 PM IST
सार
सिरोही के मंडवारिया गांव में आर्थिक तंगी के कारण मृत्यु भोज में घी के मालपुए नहीं बनाने पर कथित तौर पर 43 परिवारों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया। पीड़ितों ने राशन, मजदूरी और पानी तक रोकने के आरोप लगाए हैं। पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है।
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43 परिवारों को समाज से बहिष्कृत किया गया
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
सिरोही जिले के मंडवारिया गांव में समाज के पंचों ने तुगलकी फरमान जारी कर 43 परिवारों को समाज से बहिष्कृत कर दिया है। इन परिवारों का गुनाह सिर्फ इतना था कि इन्होंने मृत्युभोज में मिष्ठान के तौर पर घी के मालपुआ नहीं बनाए। पंचों के इस फरमान के बाद सभी 43 परिवारों का हुक्का-पानी बंद कर दिया गया है, जिससे उनकी रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है।
घी के मालपुए न बनाना पड़ा भारी
पीड़ित परिवारों का आरोप है कि गांव में एक परिवार में हुए मृत्युभोज में आर्थिक तंगी के चलते घी के मालपुआ नहीं बनाए गए और सादा भोजन कराया गया। इससे नाराज होकर समाज के एक दर्जन से ज्यादा पंचों ने मिलकर मृत्युभोज कराने वाले परिवार सहित 43 परिवारों को समाज से बाहर करने का फरमान सुना दिया।
पानी समेत भोजन भी बंद किया
सामाजिक बहिष्कार के चलते इन परिवारों का जीवन दूभर हो गया है। पीड़ित तेजाराम ने बताया, 'पंचों ने कहा कि हमने समाज की नाक कटा दी। अब गांव में कोई हमसे बात नहीं करता। दुकानदार राशन नहीं देते, खेत मालिक मजदूरी पर नहीं ले जाते। गांव के कुएं से पानी तक नहीं भरने दिया जा रहा। बच्चे भूखे सो रहे हैं।'
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इधर, महिला पीड़ित कमला देवी ने कहा, 'हमारी बहू-बेटियों से कोई बोलता तक नहीं। घी के मालपुआ नहीं बनाए तो क्या हम इंसान नहीं रहे? ये कैसा इंसाफ है?'
थाने में केस, फिर भी कार्रवाई नहीं
पीड़ित परिवारों ने एक दर्जन से ज्यादा पंचों के खिलाफ स्थानीय थाने में मामला दर्ज कराया है। उनका आरोप है कि पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इससे निराश होकर सभी 43 परिवारों के सदस्य मंगलवार को सिरोही जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई।
ये भी पढ़ें- Explainer: कब सामने आएगा प्रसूताओं की मौत का सच? सिजेरियन के बाद क्यों बिगड़ी तबीयत? जानिए पूरा मामला
कानूनन अपराध है सामाजिक बहिष्कार
एडवोकेट महेंद्र सिंह ने बताया कि 'भारतीय संविधान में सामाजिक बहिष्कार दंडनीय अपराध है। राजस्थान सामाजिक बहिष्कार निषेध अधिनियम 2019 के तहत दोषी को 7 साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। पंचों का ये फरमान पूरी तरह गैर-कानूनी है। पुलिस को तुरंत FIR दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार करना चाहिए।'
क्या कहता है कानून?
राजस्थान सामाजिक बहिष्कार निषेध अधिनियम 2019 के अनुसार, किसी व्यक्ति या परिवार का सामाजिक, आर्थिक या व्यावसायिक बहिष्कार करना अपराध है। इसमें जाति, धर्म या रीति-रिवाज के नाम पर किसी को समाज से बाहर करना, हुक्का-पानी बंद करना, पूजा स्थल या सार्वजनिक जगह पर जाने से रोकना शामिल है।
फिलहाल मंडवारिया के ये 43 परिवार न्याय के इंतजार में हैं। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और पुलिस इस तुगलकी फरमान पर क्या कार्रवाई करती है।
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घी के मालपुए न बनाना पड़ा भारी
पीड़ित परिवारों का आरोप है कि गांव में एक परिवार में हुए मृत्युभोज में आर्थिक तंगी के चलते घी के मालपुआ नहीं बनाए गए और सादा भोजन कराया गया। इससे नाराज होकर समाज के एक दर्जन से ज्यादा पंचों ने मिलकर मृत्युभोज कराने वाले परिवार सहित 43 परिवारों को समाज से बाहर करने का फरमान सुना दिया।
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पानी समेत भोजन भी बंद किया
सामाजिक बहिष्कार के चलते इन परिवारों का जीवन दूभर हो गया है। पीड़ित तेजाराम ने बताया, 'पंचों ने कहा कि हमने समाज की नाक कटा दी। अब गांव में कोई हमसे बात नहीं करता। दुकानदार राशन नहीं देते, खेत मालिक मजदूरी पर नहीं ले जाते। गांव के कुएं से पानी तक नहीं भरने दिया जा रहा। बच्चे भूखे सो रहे हैं।'
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इधर, महिला पीड़ित कमला देवी ने कहा, 'हमारी बहू-बेटियों से कोई बोलता तक नहीं। घी के मालपुआ नहीं बनाए तो क्या हम इंसान नहीं रहे? ये कैसा इंसाफ है?'
थाने में केस, फिर भी कार्रवाई नहीं
पीड़ित परिवारों ने एक दर्जन से ज्यादा पंचों के खिलाफ स्थानीय थाने में मामला दर्ज कराया है। उनका आरोप है कि पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इससे निराश होकर सभी 43 परिवारों के सदस्य मंगलवार को सिरोही जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई।
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कानूनन अपराध है सामाजिक बहिष्कार
एडवोकेट महेंद्र सिंह ने बताया कि 'भारतीय संविधान में सामाजिक बहिष्कार दंडनीय अपराध है। राजस्थान सामाजिक बहिष्कार निषेध अधिनियम 2019 के तहत दोषी को 7 साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। पंचों का ये फरमान पूरी तरह गैर-कानूनी है। पुलिस को तुरंत FIR दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार करना चाहिए।'
क्या कहता है कानून?
राजस्थान सामाजिक बहिष्कार निषेध अधिनियम 2019 के अनुसार, किसी व्यक्ति या परिवार का सामाजिक, आर्थिक या व्यावसायिक बहिष्कार करना अपराध है। इसमें जाति, धर्म या रीति-रिवाज के नाम पर किसी को समाज से बाहर करना, हुक्का-पानी बंद करना, पूजा स्थल या सार्वजनिक जगह पर जाने से रोकना शामिल है।
फिलहाल मंडवारिया के ये 43 परिवार न्याय के इंतजार में हैं। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और पुलिस इस तुगलकी फरमान पर क्या कार्रवाई करती है।