आयकर जांच में बड़े खुलासे: जौहर ट्रस्ट के नौ सदस्यों में पांच आजम परिवार से, विवि निर्माण में लगाई सरकारी रकम
आयकर विभाग ने जौहर ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन रद्द किया। जांच में आजम खां के परिवार का नियंत्रण और सरकारी धन का दुरुपयोग सामने आया। यूनिवर्सिटी निर्माण में करोड़ों रुपये की अनियमितताएं मिलीं।
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जौहर ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन रद्द करते हुए आयकर विभाग ने कई अनियमितताओं का जिक्र अपनी रिपोर्ट में किया है। 147 पेज की जांच रिपोर्ट के अनुसार जौहर ट्रस्ट के नौ सदस्यों में पांच आजम के परिवार के हैं। चार बस नाममात्र के हैं। ट्रस्ट पर परिवार का नियंत्रण है। जांच में सरकारी ठेकेदारों ने भी कबूल किया कि उन्होंने सरकारी प्रोजेक्ट के लिए मिली धनराशि का 30 से 40 फीसदी हिस्सा जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में लगाया है।
आयकर विभाग लखनऊ के प्रधान आयुक्त (केंद्रीय) गौरव बॉथम की रिपोर्ट के अनुसार आयकर विभाग की जांच में सामने आया कि जौहर ट्रस्ट को मोहम्मद आजम खां और उनके परिवार के सदस्यों द्वारा नियंत्रित किया जा रहा था। एक ट्रस्टी चौधरी शहरयार सलीम ने 13 सितंबर 2023 को हुई छापेमारी में खुद को नाममात्र का ट्रस्टी स्वीकार किया था।
जांच में करोड़ों रुपये की सरकारी राशि के दुरुपयोग का भी खुलासा हुआ है। जिला मूल्यांकन अधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार, यूनिवर्सिटी परिसर में 59 इमारतों के निर्माण की लागत 494.46 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह राशि ट्रस्ट के बही-खातों में नहीं दिखाई गई थी।
बैठक में बुलाया... दस्तखत लेकर भेज दिया
जांच में सामने आया कि कई लोग सिर्फ नाम के ट्रस्टी थे। इनमें शामिल चौधरी शहरयार सलीम ने अपने बयान में बताया कि वह डमी ट्रस्टी था। उसे जौहर यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर के चयन के लिए आयोजित बैठक में बुलाया गया था और केवल दस्तखत लेकर वापस भेज दिया गया। ट्रस्ट को आजम खान और उनके परिवार के सदस्य ही कंट्रोल और मैनेज करते हैं। वहीं यह भी सामने आया कि रामपुर के कई निजी कंस्ट्रक्शन फर्मों को अलग-अलग सरकारी ठेके दिलाए गए और बाद में उससे ट्रस्ट की संपत्तियां बनवाई गईं। जौहर एसोसिएट्स और सीके एसोसिएट्स ने सरकारी अनुबंध से मिली करीब 86 करोड़ रुपये की सरकारी रकम का गलत इस्तेमाल किया। इसका कोई हिसाब-किताब भी नहीं रखा गया।
इन दानकर्ताओं का पता नहीं चला
आयकर जांच में जौहर ट्रस्ट ने जिन लोगों से दान मिलने का दावा किया था, उनका जांच में पता हीं नहीं चला। इनमें लखनऊ की पिरामिड कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्स, मुरादाबाद की सालार ओवरसीज लिमिटेड, दिल्ली की एआर एजूकेशन ट्रस्ट, नोएडा की अर्थ इंफ्राटेक, दिल्ली की रेमिगेट इंफ्रा डेवलपर्स, रॉयल इम्पोरिया फ्रा टेक, मुरादाबाद की फैजा परवीन, बहराइच के मोहम्मद हसीब, रोबोट विनिमय प्राइवेट लिमिटेड, वंडर सप्लायर्स प्राइवेट लिमिटेड और ड्रीम ऑफ पर्ल रियलिटी एंड सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड आदि शामिल हैं।
यूनिवर्सिटी से ही संचालित होती थीं राजनीतिक गतिविधियां
ट्रस्ट पर राजनीतिक गतिविधियों के लिए परिसर का उपयोग करने का भी आरोप है। ट्रस्ट के सहायक वित्त अधिकारी परवेज मियां ने स्वीकार किया कि संपत्ति का एक हिस्सा समाजवादी पार्टी के कार्यालय के रूप में इस्तेमाल हो रहा था। ट्रस्ट ने इस संपत्ति का कोई किराया नहीं लिया, जिससे आय का नुकसान हुआ। ट्रस्ट ने शैक्षिक उद्देश्य के लिए आवंटित भूमि पर एक मस्जिद भी बनाई, जो शर्तों का उल्लंघन है।
जौहर ट्रस्ट ने 11 अस्तित्वहीन संस्थाओं से लिया था दान
जांच में सामने आया है कि जौहर ट्रस्ट ने 11 अस्तित्वहीन संस्थाओं से दान लिया। ट्रस्ट के खातों में कई गैर-मौजूदा संस्थाओं से दान दर्शाया गया, जो अनियोजित आय को वैध रूप देने का प्रयास माना गया। जांच में आयकर को ये संस्थाएं नहीं मिलीं। ट्रस्ट के आय-व्यय खाते और बैंक जमा में भारी अंतर पाया गया। जिसे ट्रस्ट साबित नहीं कर पाया। ये बात भी सामने आई है कि ट्रस्ट ने वित्त वर्ष 2021-22 और 2022-23 के लिए आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किए थे।
टीडीएस में भी अंतर पाया गया। ऑडिटर ने स्वीकार किया कि उन्होंने बिना किसी वास्तविक दस्तावेज (बिल, वाउचर) के, केवल ड्राफ्ट के आधार पर ऑडिट रिपोर्ट तैयार की। बैंक में जमा राशि और आय-व्यय खाते में दिखाई गई आय में बहुत बड़ा अंतर है। उदाहरण के लिए वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए आय 12.83 करोड़ रुपये थी, जबकि बैंक जमा 27.39 करोड़ रुपये दिखाया गया।