Sirohi News: चंद्रावती की खुदाई में निकला सदियों का इतिहास, परमार राजाओं के अवशेष मिले
राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित चंद्रावती गांव बाहर से साधारण दिखता है, लेकिन इसके नीचे सदियों पुरानी एक समृद्ध नगरी का इतिहास दफन है। आबूरोड के पास स्थित यह स्थान 7वीं से 13वीं शताब्दी के बीच व्यापार और संस्कृति का प्रमुख केंद्र था।
विस्तार
परमार राजवंश की राजधानी थी चंद्रावती
सातवीं से तेरहवीं शताब्दी के बीच चंद्रावती इस पूरे क्षेत्र में व्यापार और संस्कृति का सबसे बड़ा केंद्र मानी जाती थी। 11वीं और 12वीं शताब्दी में यह नगरी परमार राजवंश की राजधानी थी। इस वंश में यशोधवल और धारवर्ष जैसे पराक्रमी शासक हुए जिनके शासनकाल में यहां बड़ी संख्या में शैव, वैष्णव और जैन मंदिरों के साथ-साथ भव्य राजप्रासादों का निर्माण हुआ। सन 1303 तक यह नगरी परमारों के अधीन रही, इसके बाद देवड़ा चौहानों ने यहां अपना राज्य स्थापित किया और 1405 ईस्वी में सिरोही राज्य की स्थापना तक यह उनकी राजधानी बनी रही।
खुदाई में खुला वैभवशाली अतीत
पुरातत्व विभाग ने जनार्दनराय नागर विद्यापीठ उदयपुर के सहयोग से 2015 से 2017 के बीच तीन चरणों में यहां उत्खनन कार्य करवाया था। इस खुदाई में जो पुरावशेष सामने आए वे देखने वालों को हैरान कर देते हैं। बिना किसी आधुनिक तकनीक या यंत्र की मदद के सैकड़ों साल पहले बनाई गई बारीक नक्काशीदार प्रतिमाएं और अद्भुत निर्माण शैली उस दौर की कारीगरी का जीता-जागता सबूत है।
इस नगरी को आक्रांताओं ने बार-बार लूटा
दिल्ली से गुजरात जाने वाले मुख्य मार्ग पर स्थित होने के कारण यह समृद्ध नगरी विदेशी आक्रांताओं के निशाने पर बार-बार आई। ऊंची दीवारें, चौड़े रास्ते और चारों तरफ फैले मंदिर और भवन आक्रांताओं को लूट के लिए आकर्षित करते थे। उन्होंने यहां के मंदिरों को कई बार क्षतिग्रस्त किया और प्रतिमाओं को तोड़ा। खुदाई में मिले अवशेषों पर भी इस तोड़फोड़ के स्पष्ट निशान देखे जा सकते हैं। ब्रिटिश इतिहासकार कर्नल टॉड ने भी अपनी चर्चित पुस्तक वेस्टर्न इंडिया में चित्रों सहित इस नगरी का विस्तृत वर्णन किया था।
उत्खनन में मिले सभी बहुमूल्य पुरावशेषों और मंदिरों के शिल्पखंडों को चंद्रावती संग्रहालय में संरक्षित करके रखा गया है। इतिहास और पुरातत्व में रुचि रखने वाले लोग यहां आकर इस गौरवशाली विरासत को करीब से देख और समझ सकते हैं।