{"_id":"69c645ed4f6625b5140aee61","slug":"kerala-high-court-ask-to-eci-what-happens-when-candidate-makes-communal-remarks-in-mcc-2026-03-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kerala: सांप्रदायिक बयान देने वाले उम्मीदवारों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है? हाईकोर्ट का चुनाव आयोग से सवाल","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Kerala: सांप्रदायिक बयान देने वाले उम्मीदवारों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है? हाईकोर्ट का चुनाव आयोग से सवाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
Published by: Nitin Gautam
Updated Fri, 27 Mar 2026 02:25 PM IST
विज्ञापन
सार
केरल हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से अहम सवाल किया है कि चुनाव प्रचार के दौरान सांप्रदायिक टिप्पणी करने वाले नेताओं के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है? हाईकोर्ट ने एक उम्मीदवार की कथित सांप्रदायिक टिप्पणी पर चुनाव आयोग द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान ये सवाल किया।
केरल हाईकोर्ट का अहम सवाल
- फोटो : ANI
विज्ञापन
विस्तार
केरल उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को भारत निर्वाचन आयोग से पूछा कि यदि कोई उम्मीदवार नफरती या सांप्रदायिक बयान देता है जिससे किसी समुदाय, समाज और देश को नुकसान पहुंचता है, तो उसके खिलाफ क्या कार्रवाई होती है। अदालत ने यह सवाल उस याचिका की सुनवाई के दौरान उठाया, जिसमें केरल की गुरुवायूर विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार बी. गोपालकृष्णन के एक कथित सांप्रदायिक बयान पर चुनाव आयोग की निष्क्रियता का आरोप लगाया गया था।
क्या है पूरा मामला
न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस ने याचिका का निपटारा करते हुए चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि 20 मार्च को याचिकाकर्ता गोकुल के द्वारा दी गई शिकायत पर उचित निर्णय लिया जाए। अदालत ने आयोग को निर्देश दिया कि शिकायत मिलने की तारीख से दो महीने के भीतर इस पर फैसला किया जाए। मामले की सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि रिटर्निंग ऑफिसर की शिकायत पर भाजपा नेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है और संबंधित प्रचार वीडियो को भी हटा दिया गया है।
'आदर्श आचार संहिता में सरकारी मशीनरी ठप हो जाती है'
अदालत ने पूछा, 'किसी समुदाय, समाज और देश को जो नुकसान हुआ उसका क्या? जब कोई इस तरह के नफरती या सांप्रदायिक बयान देता है तो उनके खिलाफ क्या कार्रवाई होती है?' अदालत ने यह भी कहा कि आदर्श आचार संहिता लागू होने के नाम पर कई बार पूरी सरकारी मशीनरी ठप हो जाती है और अदालत के आदेशों व वैधानिक जिम्मेदारियों का पालन नहीं किया जाता।
चुनाव आयोग ने दिया ये जवाब
इस पर चुनाव आयोग ने साफ किया कि आदर्श आचार संहिता केवल यह सुनिश्चित करने के लिए लागू होती है कि चुनाव में किसी दल को अनुचित फायदा न मिले, और इसके कारण अदालत के आदेशों या कानूनी कर्तव्यों के पालन में कोई बाधा नहीं आती। याचिकाकर्ता गोकुल ने अपनी याचिका में कहा था कि उन्होंने 20 मार्च को चुनाव आयोग से भाजपा नेता के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन कोई कदम न उठाए जाने पर उन्हें अदालत का रुख करना पड़ा।
ये भी पढ़ें- सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: राहुल मम्कूटथिल की जमानत बरकरार, पीड़िता पर हाईकोर्ट की टिप्पणी रिकॉर्ड से हटाई
बी. गोपालकृष्णन के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 192 (दंगा भड़काने की नीयत से उकसाना) और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125 (चुनाव के दौरान वर्गों के बीच वैमनस्य फैलाना) के तहत मामला दर्ज किया गया है। विवादित वीडियो में कथित तौर पर भाजपा उम्मीदवार ने कहा था कि गुरुवायूर सीट पर लगभग पांच दशकों से हिंदू विधायक नहीं चुना गया और आरोप लगाया था कि वामपंथी और कांग्रेस गठबंधन वहां इस समुदाय से उम्मीदवार नहीं उतारते।
Trending Videos
क्या है पूरा मामला
न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस ने याचिका का निपटारा करते हुए चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि 20 मार्च को याचिकाकर्ता गोकुल के द्वारा दी गई शिकायत पर उचित निर्णय लिया जाए। अदालत ने आयोग को निर्देश दिया कि शिकायत मिलने की तारीख से दो महीने के भीतर इस पर फैसला किया जाए। मामले की सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि रिटर्निंग ऑफिसर की शिकायत पर भाजपा नेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है और संबंधित प्रचार वीडियो को भी हटा दिया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
'आदर्श आचार संहिता में सरकारी मशीनरी ठप हो जाती है'
अदालत ने पूछा, 'किसी समुदाय, समाज और देश को जो नुकसान हुआ उसका क्या? जब कोई इस तरह के नफरती या सांप्रदायिक बयान देता है तो उनके खिलाफ क्या कार्रवाई होती है?' अदालत ने यह भी कहा कि आदर्श आचार संहिता लागू होने के नाम पर कई बार पूरी सरकारी मशीनरी ठप हो जाती है और अदालत के आदेशों व वैधानिक जिम्मेदारियों का पालन नहीं किया जाता।
चुनाव आयोग ने दिया ये जवाब
इस पर चुनाव आयोग ने साफ किया कि आदर्श आचार संहिता केवल यह सुनिश्चित करने के लिए लागू होती है कि चुनाव में किसी दल को अनुचित फायदा न मिले, और इसके कारण अदालत के आदेशों या कानूनी कर्तव्यों के पालन में कोई बाधा नहीं आती। याचिकाकर्ता गोकुल ने अपनी याचिका में कहा था कि उन्होंने 20 मार्च को चुनाव आयोग से भाजपा नेता के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन कोई कदम न उठाए जाने पर उन्हें अदालत का रुख करना पड़ा।
ये भी पढ़ें- सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: राहुल मम्कूटथिल की जमानत बरकरार, पीड़िता पर हाईकोर्ट की टिप्पणी रिकॉर्ड से हटाई
बी. गोपालकृष्णन के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 192 (दंगा भड़काने की नीयत से उकसाना) और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125 (चुनाव के दौरान वर्गों के बीच वैमनस्य फैलाना) के तहत मामला दर्ज किया गया है। विवादित वीडियो में कथित तौर पर भाजपा उम्मीदवार ने कहा था कि गुरुवायूर सीट पर लगभग पांच दशकों से हिंदू विधायक नहीं चुना गया और आरोप लगाया था कि वामपंथी और कांग्रेस गठबंधन वहां इस समुदाय से उम्मीदवार नहीं उतारते।