Tonk News: बनास बनी मौत का दरिया, हादसों में 100 लोगों ने गंवाई जान; ट्रैक्टर समेत बहा युवक, फिर हुई मौत
Tonk News: टोंक की बनास नदी अब मौत का दरिया बन चुकी है। यहां हादसों का सिलसिला थम नहीं रहा है। अब तक करीब सौ लोगों की जान जा चुकी है। रपटों में लोगों को जाने से रोका भी जा रहा है पर वे मान नहीं रहे हैं।
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बीसलपुर बांध के ओवरफ्लो होने के बाद उफान पर आई बनास नदी टोंक जिले में लगातार जानलेवा साबित हो रही है। प्रशासन के तमाम दावों और चेतावनियों के बावजूद हादसों का सिलसिला थम नहीं रहा। अब तक जिले में नदी और रपटों पर डूबने से मरने वालों की संख्या 100 के करीब पहुंच चुकी है। बावजूद इसके लोग लापरवाही बरतते हुए बंद रास्तों से भी गुजरने की कोशिश कर रहे हैं, जो उनकी जिंदगी पर भारी पड़ रहा है।
अलसुबह ट्रैक्टर सहित बहा चालक
ताजा मामला मेहंदवास थाना क्षेत्र का है, जहां बुधवार अलसुबह करीब 3.30 बजे चूली गांव के पास बने रपट पर हादसा हुआ। चूली निवासी बाबूलाल मीणा (40) पुत्र बजरंगलाल ट्रैक्टर (बिना ट्रॉली) लेकर टोंक की ओर आ रहा था। तेज बहाव के बावजूद उसने रपटा पार करने का प्रयास किया। तभी ट्रैक्टर असंतुलित होकर बह गया और नीचे गिर पड़ा।
सीट में फंसा रहा चालक, मौत ने लिया अपनी गिरफ्त में
तेज बहाव में ट्रैक्टर के पलटने से बाबूलाल ड्राइवर सीट में फंस गया और बाहर नहीं निकल पाया। कुछ ही देर में वह पानी में डूब गया। हादसे के समय ट्रैक्टर का अधिकांश हिस्सा नदी में डूब चुका था और केवल टायरों का ऊपरी हिस्सा ही दिखाई दे रहा था। सुबह लगभग 4 बजे खेतों की ओर गए किसानों की नजर इस पर पड़ी तो उन्होंने तुरंत पुलिस और ग्रामीणों को सूचना दी।
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पुलिस ने निकाला शव, परिजनों को सौंपा
मेहंदवास थाना प्रभारी ओम प्रकाश चौधरी ने बताया कि नदी पर बना करीब आधा किलोमीटर लंबा रपटा तेज धार में पूरी तरह से डूबा हुआ है और यहां आवागमन प्रतिबंधित कर रखा गया था। बावजूद इसके चालक ने खतरा मोल लिया और हादसे का शिकार हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस और ग्रामीणों ने काफी मशक्कत के बाद शव को बाहर निकाला और उसे सआदत अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित किया। पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
प्रशासन की बैरिकेडिंग और चेतावनियों के बावजूद लापरवाही
जिला प्रशासन और पुलिस ने नदी पर बने रपटों को बंद कर बैरिकेडिंग लगा रखी है, साथ ही चेतावनी बोर्ड भी लगाए गए हैं। इसके बावजूद लोग नियमों का उल्लंघन करते हुए अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। हादसों का यह सिलसिला प्रशासन की चिंताओं को और गहरा कर रहा है।
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