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नौ इंच का पाइप और फेफड़े छलनी: कैसे जांबाज डॉक्टरों ने यमराज से लड़कर वापस लिया जीवन, रौंगटे खड़ी कर देगी घटना

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर Published by: उदयपुर ब्यूरो Updated Tue, 28 Apr 2026 02:21 PM IST
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सार

उदयपुर में एक भीषण सड़क हादसे में युवक दीपक खटीक के सीने के आर-पार लोहे का पाइप घुस गया, जिससे उसकी हालत बेहद गंभीर हो गई। चित्तौड़गढ़ के बेगूं क्षेत्र में हुए इस हादसे के बाद उसे तुरंत एमबी अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने 4 घंटे की जटिल सर्जरी कर उसकी जान बचाई।

Iron pipe pierced through young man's chest, survives after 4-hour battle
डॉक्टरों ने किया बड़ा चमत्कार - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

उदयपुर में एक ऐसा दर्दनाक हादसा सामने आया, जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाएं। सड़क दुर्घटना में एक युवक के सीने को चीरते हुए लोहे का पाइप आर-पार हो गया, लेकिन डॉक्टरों की सूझबूझ और 4 घंटे की सर्जरी ने उसकी जिंदगी बचा ली। जानकारी के अनुसार चित्तौड़गढ़ के बेगूं क्षेत्र में चेची रोड पर 24 अप्रैल की शाम दीपक खटीक नाम का युवक बाइक से जा रहा था। इसी दौरान सड़क किनारे खड़ी खराब ट्रैक्टर-ट्रॉली से उसकी टक्कर हो गई। ट्रॉली में रखे लोहे के पाइप बाहर निकले हुए थे, जिनमें से एक पाइप सीधे दीपक के सीने में आर-पार घुस गया। इस दर्दनाक हादसे के बाद वह जिंदगी और मौत के बीच झूलने लगा।
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अंधेरा और लाइट नहीं होने से हुआ हादसा
बताया गया कि यह हादसा अंधेरा होने की वजह से हुआ। ट्रॉली में बैक लाइट भी नहीं थी, जिससे बाइक सवार उसे समय पर देख नहीं पाया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि करीब 9 इंच लंबा और 4 सेंटीमीटर मोटा पाइप पसलियां तोड़ते हुए फेफड़े को चीरकर गर्दन तक पहुंच गया। बाद में मौके पर पाइप को कटर से काटा गया। अधिक खून बहने के कारण दीपक बेहोश हो गया और उसे तुरंत इलाज के लिए उदयपुर के एमबी अस्पताल लाया गया।
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जटिल सर्जरी से बची जान
जांच में सामने आया कि पाइप ने फेफड़े के साथ-साथ धमनी और शिरा को भी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया था, जिससे भारी रक्तस्राव हो रहा था। कार्डियोथोरेसिक सर्जन डॉ. विनय नैथानी के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने तुरंत ऑपरेशन शुरू किया। करीब 4 घंटे चली जटिल सर्जरी में एल-आकार के पाइप को सावधानीपूर्वक निकाला गया। साथ ही क्षतिग्रस्त रक्त वाहिकाओं की मरम्मत, फेफड़े का इलाज और टूटी पसलियों को जोड़ा गया।

डॉक्टरों ने बताया ‘चमत्कार’
डॉक्टरों के अनुसार इस तरह की ‘इम्पेलमेंट इंजरी’ में बचने की संभावना बेहद कम होती है, लेकिन समय पर इलाज और टीमवर्क से दीपक की जान बच गई। फिलहाल उसकी हालत स्थिर है और धीरे-धीरे रिकवरी हो रही है। उदयपुर के एमबी हॉस्पिटल और आरआरएनटी मेडिकल कॉलेज की टीम के अथक प्रयास से दीपक को नया जीवन मिला, जिसे किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है।
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