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Monsoon Special: झीलों की नगरी को मानसून का इंतजार, दिलचस्प रहा 10 साल का रिकॉर्ड, जलभराव से निपटने की तैयारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर
Published by: उदयपुर ब्यूरो
Updated Fri, 12 Jun 2026 06:22 PM IST
सार
झीलों की नगरी उदयपुर के लिए मानसून सिर्फ बारिश नहीं, बल्कि जल संसाधनों और पर्यटन की जीवनरेखा है। ऐसे में इस बार के मानसून को लेकर मौसम विभाग के पूर्वानुमान और प्रशासन की तैयारियां चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
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मानसून के स्वागत को बेताब उदयपुर
- फोटो : Amar Ujala
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मानसून की दस्तक से पहले झीलों की नगरी उदयपुर एक बार फिर बारिश के इंतजार में है। पिछले एक दशक में कभी रिकॉर्ड बारिश ने झीलों को छलका दिया तो कभी कमजोर मानसून ने जलसंकट की चिंता बढ़ा दी। ऐसे में इस बार भी लोगों की नजरें मौसम विभाग के पूर्वानुमान और नगर निगम की तैयारियों पर टिकी हुई हैं।
मानसून के इंतजार में झीलों की नगरी
- फोटो : अमर उजाला
कब रहा कमजोर मानसून?
पिछले दशक में वर्ष 2018 और 2023 अपेक्षाकृत कमजोर मानसून वाले वर्षों में शामिल रहे। इन वर्षों में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई, जिसका असर झीलों और जलाशयों के जलस्तर पर भी दिखाई दिया। कई जल स्रोतों में पानी की आवक उम्मीद से कम रही थी।
उदयपुर का हालिया मानसून रिकॉर्ड
पिछले दशक में वर्ष 2018 और 2023 अपेक्षाकृत कमजोर मानसून वाले वर्षों में शामिल रहे। इन वर्षों में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई, जिसका असर झीलों और जलाशयों के जलस्तर पर भी दिखाई दिया। कई जल स्रोतों में पानी की आवक उम्मीद से कम रही थी।
उदयपुर का हालिया मानसून रिकॉर्ड
| वर्ष | मानसून की स्थिति |
| 2020 | अत्यधिक वर्षा |
| 2021 | सामान्य से अधिक |
| 2022 | सामान्य |
| 2023 | सामान्य से कम |
| 2024 | सामान्य |
| 2025 | सामान्य से अधिक |
| 2026 | अनुमान जारी |
जलभराव से बचने की तैयारी
- फोटो : अमर उजाला
इस बार क्या कह रहा है मौसम विभाग?
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार वर्ष 2026 में देशभर में मानसून सामान्य से कम रहने की संभावना जताई गई है। विभाग का अनुमान है कि इस वर्ष कुल वर्षा दीर्घकालिक औसत के लगभग 92 प्रतिशत रह सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे एल-नीनो प्रभाव एक प्रमुख कारण हो सकता है। हालांकि राजस्थान के दक्षिणी हिस्सों में स्थानीय मौसमी तंत्र सक्रिय होने पर अच्छी बारिश के दौर भी बन सकते हैं। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की गति भले कुछ धीमी रहे लेकिन जून के दूसरे पखवाड़े से राजस्थान में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।
ये भी पढ़ें: Balotra News: लूनी, जोजरी और बांडी नदी प्रदूषण मामले में SIT का बड़ा एक्शन, औद्योगिक क्षेत्रों की जांच शुरू
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार वर्ष 2026 में देशभर में मानसून सामान्य से कम रहने की संभावना जताई गई है। विभाग का अनुमान है कि इस वर्ष कुल वर्षा दीर्घकालिक औसत के लगभग 92 प्रतिशत रह सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे एल-नीनो प्रभाव एक प्रमुख कारण हो सकता है। हालांकि राजस्थान के दक्षिणी हिस्सों में स्थानीय मौसमी तंत्र सक्रिय होने पर अच्छी बारिश के दौर भी बन सकते हैं। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की गति भले कुछ धीमी रहे लेकिन जून के दूसरे पखवाड़े से राजस्थान में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।
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नगर निगम ने शुरू की तैयारी
- फोटो : अमर उजाला
नगर निगम ने शुरू की तैयारियां
मानसून से पहले नगर निगम ने नालों की सफाई, जलभराव वाले क्षेत्रों की पहचान और आपात व्यवस्थाओं को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। नगर निगम द्वारा मुख्य नालों और ड्रेनेज सिस्टम की सफाई कराई जा रही है ताकि बारिश के दौरान जलभराव की समस्या को कम किया जा सके। साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी और आपातकालीन टीमों की तैनाती की तैयारी भी की जा रही है।
इन क्षेत्रों में रहता है जलभराव का खतरा
सूरजपोल क्षेत्र
दिल्ली गेट
सेवाश्रम चौराहा
हिरणमगरी के कुछ हिस्से
आयड़ नदी किनारे के क्षेत्र
शहर की निचली कॉलोनियां
स्थानीय नागरिक हर वर्ष सड़कों, सीवर लाइन और ड्रेनेज व्यवस्था को लेकर चिंता जताते रहे हैं। सोशल मीडिया और स्थानीय मंचों पर अधूरे सड़क और सीवर कार्यों को लेकर शिकायतें भी सामने आती रहती हैं।
मानसून से पहले नगर निगम ने नालों की सफाई, जलभराव वाले क्षेत्रों की पहचान और आपात व्यवस्थाओं को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। नगर निगम द्वारा मुख्य नालों और ड्रेनेज सिस्टम की सफाई कराई जा रही है ताकि बारिश के दौरान जलभराव की समस्या को कम किया जा सके। साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी और आपातकालीन टीमों की तैनाती की तैयारी भी की जा रही है।
इन क्षेत्रों में रहता है जलभराव का खतरा
सूरजपोल क्षेत्र
दिल्ली गेट
सेवाश्रम चौराहा
हिरणमगरी के कुछ हिस्से
आयड़ नदी किनारे के क्षेत्र
शहर की निचली कॉलोनियां
स्थानीय नागरिक हर वर्ष सड़कों, सीवर लाइन और ड्रेनेज व्यवस्था को लेकर चिंता जताते रहे हैं। सोशल मीडिया और स्थानीय मंचों पर अधूरे सड़क और सीवर कार्यों को लेकर शिकायतें भी सामने आती रहती हैं।
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झीलों को मानसून का इंतजार
- फोटो : अमर उजाला
झीलों को मानसून का इंतजार
उदयपुर की पहचान उसकी झीलों से है और इन झीलों के लिए मानसून जीवनदायिनी भूमिका निभाता है। यदि इस बार मानसून सामान्य या सामान्य से बेहतर रहा तो फतेहसागर, पिछोला, उदयसागर और स्वरूपसागर जैसी झीलें फिर से लबालब नजर आ सकती हैं। वहीं यदि बारिश सामान्य से कम रही तो शहर के लिए जल प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन सकता है। ऐसे में इस बार का मानसून उदयपुर की झीलों और जल संसाधनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उदयपुर की पहचान उसकी झीलों से है और इन झीलों के लिए मानसून जीवनदायिनी भूमिका निभाता है। यदि इस बार मानसून सामान्य या सामान्य से बेहतर रहा तो फतेहसागर, पिछोला, उदयसागर और स्वरूपसागर जैसी झीलें फिर से लबालब नजर आ सकती हैं। वहीं यदि बारिश सामान्य से कम रही तो शहर के लिए जल प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन सकता है। ऐसे में इस बार का मानसून उदयपुर की झीलों और जल संसाधनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।