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Udaipur: सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में 300 परिवारों पर संकट, 25 साल सेवा दे चुके कर्मचारियों को हटाने की तैयारी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर Published by: उदयपुर ब्यूरो Updated Mon, 09 Feb 2026 04:07 PM IST
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सार

Udaipur: सुखाड़िया विश्वविद्यालय में 25 साल सेवा दे चुके करीब 300 एसएफएबी कर्मचारियों का भविष्य असमंजस की स्थिति में है। प्रशासन ठेका प्रथा लागू करते हुए उन्हें हटाने की तैयारी कर रहा है, जबकि पूर्व में जारी सरकारी आदेश में सेवाओं को जारी रखने का निर्देश था।
 

300 families in trouble at Sukhadia University preparing to remove employees who have served for 25 years
सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में 300 परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट25 साल सेवा दे चुके कर्मचारियों को
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विस्तार

मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक विवाद सामने आया है। विश्वविद्यालय में कार्यरत लगभग 300 एसएफएबी (स्व-वित्त पोषित सलाहकार मंडल) कर्मचारियों की नौकरी पर संकट मंडरा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन इन कर्मचारियों को हटाकर निजी ठेका एजेंसी के माध्यम से मैनपावर नियुक्त करने की तैयारी कर रहा है।

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यूनिवर्सिटी में ठेका प्रणाली लागू करने की तैयारी
जानकारी के अनुसार, मैनपावर सेवाओं को लेकर एक समिति का गठन किया गया है, जिससे ठेका प्रणाली लागू करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि जिस ठेका प्रथा का विश्वविद्यालय प्रशासन अब तक विरोध करता रहा, उसी को अपनाने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
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कर्मचारियों में शोषण बढ़ने का डर
इस निर्णय को लेकर कर्मचारी संगठनों में भारी रोष है। संगठन अध्यक्ष नारायण लाल सालवी ने कहा कि ठेका प्रणाली लागू होने से कर्मचारियों का शोषण बढ़ेगा, पारदर्शिता समाप्त होगी और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि प्रशासन कर्मचारियों के भविष्य को लेकर गंभीर है, तो उन्हें हटाने के बजाय कोई स्थायी और व्यावहारिक समाधान क्यों नहीं निकाला जा रहा। कुलपति की स्वीकृति से गठित समिति में प्रो. सी.पी. जैन, प्रो. हनुमान प्रसाद, डॉ. अविनाश पंवार सहित वरिष्ठ सदस्य शामिल हैं, जबकि दीपक वर्मा को समिति का संयोजक बनाया गया है। समिति को इस संबंध में सिफारिशें प्रस्तुत करने का दायित्व सौंपा गया है।

'अनुभवी कर्मचारियों को हटाना चाहता है प्रशासन'
पिछले 25 वर्षों से विश्वविद्यालय में सेवाएं दे रहे एसएफएबी कर्मचारी इस फैसले से गहरे सदमे में हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि नई ठेका एजेंसी लाकर प्रशासन जानबूझकर पुराने और अनुभवी कर्मचारियों को हटाना चाहता है। कर्मचारियों का यह भी कहना है कि राज्य सरकार ने जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 तक सेवाएं जारी रखने के आदेश जारी किए थे, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने आगे की अवधि के लिए सरकार से पुनः अनुमति नहीं ली। इसके बजाय केवल दो माह का सेवा विस्तार देकर भर्ती परीक्षा आयोजित करवाई गई, जिससे कर्मचारियों को स्थायित्व की उम्मीद बंधी थी।

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'फैसले को चुपचाप नहीं करेंगे स्वीकार'
समिति के गठन के बाद कर्मचारियों में आक्रोश और बढ़ गया है। कर्मचारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस निर्णय को चुपचाप स्वीकार नहीं करेंगे। विश्वविद्यालय परिसर में एक बार फिर आंदोलन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। अब विश्वविद्यालय में यह सवाल गूंज रहा है कि जब सरकारी आदेश पहले से मौजूद हैं, तो ठेका मॉडल थोपने की आवश्यकता क्यों महसूस की जा रही है।

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