Deepthi Jeevanji: कौन हैं अर्जुन पुरस्कार विजेता दीप्ति जीवनजी? जानिए कैसे रचा इतिहास
Arjuna Award Winner Deepthi Jeevanji : दीप्ति सिर्फ़ एक एथलीट नहीं, हर उस लड़की की आवाज़ है जिसे कभी कमतर समझा गया था। वह तानों से टूटी नहीं, बल्कि इनका सामना करके दीप्ति भारत का असली गर्व बन गई हैं।
विस्तार
Arjuna Award Winner Deepthi Jeevanji : भारतीय खेल इतिहास में कुछ नाम शोर नहीं करते, लेकिन अपने प्रदर्शन से स्थायी छाप छोड़ जाते हैं। दीप्ति जीवनजी उन्हीं में से एक हैं। पैरा एथलेटिक्स की दुनिया में भारत का नाम रोशन करने वाली दीप्ति जीवनजी को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। यह सिर्फ एक खिलाड़ी की जीत नहीं, बल्कि हौसले, अनुशासन और आत्मविश्वास की विजय है। दीप्ति की सफलता का सफर संघर्ष को पार करते हुए पूरा हुआ है।
कौन हैं दीप्ति जीवनजी?
तेलंगाना की रहने वाली दीप्ति जीवनजी पैरा एथलेटिक्स (T20 कैटेगरी) की 400 मीटर दौड़ की स्टार एथलीट हैं। बौद्धिक दिव्यांगता (Intellectual Disability) के बावजूद उन्होंने अपनी कमजोरी को कभी अपनी पहचान नहीं बनने दिया। इसके उलट, उन्होंने ट्रैक को अपना जवाब बनाया।
दीप्ति जीवनजी का संघर्ष
दीप्ति के पिता एक दिहाड़ी मजदूर थे। उनका जीवन आर्थिक दबाव और कमियों में गुजरा। उसपर दीप्ति की असक्षमता के कारण लोग उन्हें नाम से नहीं तानों से बुलाते थे। कोई उन्हें, पिची, तो कोई कोठी, पागल या बंदर कहकर पुकारता था। लेकिन दीप्ति जीवनजी ने उन शब्दों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। जिन पैरों को लोग कमज़ोर कहते थे, उन्हीं पैरों ने पैरा एथलेटिक्स में भारत के लिए इतिहास रचा।
उनकी उपलब्धि
दीप्ति जीवनजी ने पेरिस पैरालंपिक 2024 में भारत के लिए कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा। इससे पहले वह वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी पदक जीत चुकी हैं। उनकी दौड़ में सिर्फ गति नहीं, बल्कि वर्षों का अनुशासन और मानसिक मज़बूती झलकती है। हर रेस में वह यह साबित करती हैं कि असली मुकाबला हालात से होता है, शरीर से नहीं। वह 100 मीटर T20 कैटेगरी में नेशनल रिकॉर्ड बना चुकी हैं। दीप्ति ने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए इंटरनेशनल स्टेज पर कई बार पोडियम फिनिश किया।
दीप्ति को मिला अर्जुन पुरस्कार
साल 2024 में दीप्ति को अर्जुन पुरस्कार मिला। यह उनके लिए केवल सम्मान नहीं, बल्कि उन हज़ारों खिलाड़ियों के लिए संदेश है, जो सीमित संसाधनों और चुनौतियों के बीच सपने देखते हैं। उनकी कहानी बताती है कि अगर इरादा साफ हो, तो रास्ता खुद बन जाता है। आज दीप्ति जीवनजी सिर्फ एक एथलीट नहीं, बल्कि नई पीढ़ी की प्रेरणा हैं, जो यह सिखाती हैं कि पहचान हालात से नहीं, हौसले से बनती है।

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