Leela Row Dayal: टेनिस खिलाड़ी, संस्कृत विद्वान या पर्वतारोही; कौन हैं लीला रो दयाल
Leela Row Dayal : टेनिस खिलाड़ियों में सीनिया मिर्जा समेत कई महिलाओं के नाम अब सुनने में आ जाते हैं लेकिन इस खेल में महिलाओं की दमदार भूमिका बनाने का श्रेय लीला रो दयाल को जाता है। जानिए ये कौन हैं?
विस्तार
दुनिया की मशहूर टेनिस खिलाड़ियों में सेरेना विलियम्स और सानिया मिर्जा का नाम है। इन दोनों के बारे में तो सुना ही होगा लेकिन क्या कभी लीला रो दयाल का नाम सुना है। आज अगर भारतीय महिलाएं अंतरराष्ट्रीय टेनिस और खेलों में आगे बढ़ रही हैं, तो उसकी नींव में लीला रो दयाल जैसी पायनियर महिलाओं का योगदान शामिल है। लीला रो दयाल सिर्फ टेनिस खिलाड़ी नहीं थीं, वे एक क्रांति की शुरुआत थीं।
साल 1934, जब भारत में ज़्यादातर लड़कियों को खेलना भी समाज की नज़र में गलत माना जाता था, तब लीला रो दयाल विंबलडन में मैच जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। यह सिर्फ़ खेल की जीत नहीं थी, यह सोच और सीमाओं को तोड़ने की जीत थी।
लीला रो दयाल कौन थी?
- पूरा नाम- लीला रो दयाल (Leela Row Dayal)
- पहचान- भारत की पहली महिला टेनिस खिलाड़ी जिन्होंने विंबलडन में जीत दर्ज की
- प्रसिद्धि का वर्ष- 1934
- क्षेत्र- टेनिस, शिक्षा, कला और संस्कृति
लीला रो दयाल उस दौर की महिला थीं, जब अंतरराष्ट्रीय खेलों में भारतीय महिलाओं की मौजूदगी लगभग ना के बराबर थी। इसके बावजूद उन्होंने दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित टेनिस मंच पर भारत का नाम रोशन किया।
विंबलडन में ऐतिहासिक उपलब्धि
साल 1934 में, लीला रो दयाल ने विंबलडन चैंपियनशिप में हिस्सा लिया और मैच जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं। उस समय,
- न प्रोफेशनल ट्रेनिंग सिस्टम था
- न स्पॉन्सरशिप
- न महिलाओं को खेलों के लिए सामाजिक समर्थन
इसके बावजूद उनकी यह जीत भारतीय महिला खेल इतिहास का मील का पत्थर बन गई।
सिर्फ खिलाड़ी नहीं, बहुआयामी व्यक्तित्व
लीला रो दयाल केवल टेनिस खिलाड़ी नहीं थीं। वे एक असाधारण बहुआयामी महिला थीं। उनकी पहचान,
- संस्कृत स्कॉलर
- प्रशिक्षित डांसर
- लेखिका और कलाकार
- प्रगतिशील और स्वतंत्र सोच वाली महिला के तौर पर भी थी।
उन्होंने अपने जीवन से यह संदेश दिया कि महिलाएं एक साथ बुद्धिमत्ता, कला और खेल तीनों में उत्कृष्ट हो सकती हैं।

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