Jayashree Vencatesan: जयश्री वेंकटेशन कौन हैं? जानिए रामसर पुरस्कार जीतने वाली पहली भारतीय महिला के बारे में
Ramsar Award Winner: जयश्री वेंकटेशन ने साबित कर दिया कि वे सिर्फ एक वैज्ञानिक नहीं, बल्कि प्रकृति की एक ताकत हैं। हम बात कर रहे हैं भारत की जानी-मानी पर्यावरणविद् जयश्री वेंकटेशन की, जो प्रतिष्ठित रामसर अवार्ड जीतने वाली पहली भारतीय बनीं।
विस्तार
Jayashree Vencatesan kaun Hain? भारत के लिए गर्व का क्षण तब बना जब प्रसिद्ध पर्यावरणविद् जयश्री वेंकटेशन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित रामसर अवार्ड (Ramsar Award) से सम्मानित किया गया। वे यह सम्मान पाने वाली पहली भारतीय बनीं। आर्द्रभूमि (Wetlands) संरक्षण के क्षेत्र में उनके दशकों के योगदान ने भारत का नाम वैश्विक मंच पर रोशन किया है।
कभी लोगों ने साड़ी पहने मैदानों और दलदली जमीनों में काम करती उस महिला को हल्के में लिया, ताने दिए और सवाल उठाए। लेकिन उन्होंने साबित कर दिया कि वे सिर्फ एक वैज्ञानिक नहीं, बल्कि प्रकृति की एक ताकत हैं। हम बात कर रहे हैं भारत की जानी-मानी पर्यावरणविद् जयश्री वेंकटेशन की, जो प्रतिष्ठित रामसर अवार्ड जीतने वाली पहली भारतीय बनीं।
उनकी उपलब्धि युवाओं और पर्यावरण कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। भारत में वेटलैंड संरक्षण की दिशा में यह एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं कि जयश्री वेंकटेशन कौन हैं, उन्हें यह पुरस्कार क्यों मिला और उनका योगदान कितना महत्वपूर्ण है।
बचपन से शुरू हुआ प्रकृति से रिश्ता
डॉ. जयश्री वेंकटेशन की यात्रा किसी आधुनिक लैब या बड़े रिसर्च सेंटर से शुरू नहीं हुई थी। यह सफर शुरू हुआ बचपन में जब वे अपने पिता के साथ प्रकृति के बीच शांत लम्हे बिताती थीं। पेड़ों की सरसराहट, पक्षियों की आवाज़ और खुले आसमान के नीचे बिताए वे पल उनके भीतर प्रकृति के प्रति गहरा सम्मान जगा गए। वही छोटी-सी चिंगारी आगे चलकर एक जीवनभर की आग बन गई।
2001: जब सबने ‘कज़ुवेली’ को छोड़ा, उन्होंने जीवन देखा
साल 2001 में चेन्नई के बाहरी इलाके में फैले एक गंदे और उपेक्षित दलदली क्षेत्र के सामने वे खड़ी थीं। स्थानीय लोग उसे “कज़ुवेली” कहते थे यानी “वो ज़मीन जो बस बहा दी जाती है।” यह इलाका था पल्लीकरनई मार्श।
- कूड़े के ढेर
- गंदे नालों का पानी
- तेजी से बढ़ता अतिक्रमण
- प्रशासनिक उदासीनता
सबने उस जगह को बेकार समझ लिया था। लेकिन जयश्री ने वहां जीवन देखा, जहां पक्षियों का आश्रय, जैव विविधता का खजाना और शहर की पारिस्थितिकी का फेफड़ा था।
सिर्फ 32,000 से शुरू हुआ मिशन
महज 32,000 रुपये के छोटे से अनुदान और अटूट हौसले के साथ उन्होंने वेटलैंड की मैपिंग शुरू की। फिर शुरू हुआ छह वर्षों तक चलने वाला संघर्ष, सरकारी दफ्तरों के चक्कर, याचिकाएं, वैज्ञानिक डेटा संग्रह, जागरूकता अभियान और अडिग जुनून। उन्होंने चेन्नई स्थित संस्था केयर अर्थ ट्रस्ट के माध्यम से संरक्षण की लड़ाई को मजबूत आधार दिया।
2007 में मिली संघर्ष से जीत
साल 2007 में उनकी मेहनत रंग लाई। पल्लिकरणै मार्श के 317 हेक्टेयर क्षेत्र को रिज़र्व फॉरेस्ट घोषित कर दिया गया। आज 700 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र संरक्षित है। वे अब तक तमिलनाडु के 44 वेटलैंड्स को पुनर्जीवित कर चुकी हैं।
इतिहास रचने वाली पहली भारतीय
डॉ. जयश्री वेंकटेशन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रामसर अवार्ड से सम्मानित किया गया। यह सम्मान रामसर कन्वेंशन के तहत दिया जाता है, जो विश्वभर में आर्द्रभूमियों के संरक्षण के लिए कार्य करता है। वे, यह अवॉर्ड पाने वाली पहली भारतीय बनीं। विश्वभर में वेटलैंड संरक्षण में पहचान पाने वाली केवल 12 महिलाओं में शामिल हुईं। यह उपलब्धि भारत के लिए ऐतिहासिक मानी जा रही है।

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