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Shivaji Maharaj Jayanti: जिजाबाई से ताराबाई तक, शिवाजी के स्वराज्य में महिलाओं की निर्णायक भूमिका

लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Thu, 19 Feb 2026 03:50 PM IST
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सार

Shivaji Maharaj Jayanti 2026 : आज के डिजिटल युग में, जब हम महिला नेतृत्व और समानता की बात करते हैं, तब शिवाजी महाराज का स्वराज्य एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में सामने आता है।

Shivaji Maharaj Jayanti 2026 Jijabai To Tarabai Maratha Empire Women Leaders Story
मराठा साम्राज्य की दमदार महिलाएं - फोटो : Instagram
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विस्तार

जब दुनिया के कई हिस्सों में महिलाओं को सत्ता और नेतृत्व से दूर रखा जाता था, तब छत्रपति शिवाजी महाराज ने स्वराज्य में उन्हें सम्मान, जिम्मेदारी और अधिकार दिए। शिवाजी का शासन सिर्फ वीरता और युद्ध कौशल के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टि से प्रगतिशील सोच के लिए भी जाना जाता है। उनके समय में महिलाओं ने किलों की कमान संभाली, प्रशासनिक निर्णय लिए और राज्य की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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आज शिवाजी जयंती के अवसर पर यह समझना जरूरी है कि स्वराज्य की सफलता के पीछे महिला नेतृत्व की मजबूत भागीदारी भी थी। स्वराज्य की सफलता इस बात का प्रमाण है कि जब महिलाओं को अवसर और सम्मान मिलता है तो वे शासन, युद्ध और प्रशासन हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं।

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इतिहास में कई उदाहरण मिलते हैं, जहां महिलाओं ने किलों की व्यवस्था, अनाज भंडार और आवश्यक संसाधनों का प्रबंधन संभाला। घेराबंदी के समय राशन और आपूर्ति का संतुलन बनाए रखना एक बड़ी जिम्मेदारी थी।


राजमाता जिजाबाई एक मार्गदर्शक 

राजमाता जिजाबाई मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज की माता थीं। उन्होंने केवल एक वीर राजा का निर्माण नहीं किया, बल्कि स्वराज्य की विचारधारा को आकार दिया। उन्होंने शिवाजी को न्याय, धर्मनिष्ठा और प्रजा-हित की शिक्षा दी। प्रशासनिक मामलों में उनका मार्गदर्शन महत्वपूर्ण था। जिजाबाई ने ऐसी नींव रखी, जिसमें महिलाओं की भागीदारी को स्वाभाविक माना गया।

 
येसुबाई भोंसले एक रक्षक

येसुबाई भोंसले छत्रपति शिवाजी महाराज की बहू और छत्रपति संभाजी महाराज की पत्नी थीं। वह मराठा साम्राज्य की अत्यंत साहसी व कूटनीतिज्ञ महारानी थीं। संभाजी महाराज की अनुपस्थिति में येसुबाई ने राजकाज संभाला और राजवंश की सुरक्षा सुनिश्चित की। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में दरबार का संचालन किया और मराठा साम्राज्य को टूटने नहीं दिया। यह दर्शाता है कि मराठा शासन में महिलाओं को निर्णायक भूमिका दी जाती थी।


सोयराबाई, सत्ता के पीछे की रणनीतिक शक्ति

सोयराबाई मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रमुख पत्नियों में से एक और छत्रपति राजाराम की माता थीं। उन्होंने उत्तराधिकार के संवेदनशील दौर में शाही मुहर और सत्ता की रक्षा की। उन्होंने मराठा राजनीति में महिलाओं की रणनीतिक उपस्थिति को साबित किया। यह उस युग में असाधारण उदाहरण था, जब महिलाओं को आमतौर पर राजनीतिक फैसलों से दूर रखा जाता था।


ताराबाई, सेनापति और योद्धा

महारानी ताराबाई शिवाजी महाराज की पुत्रवधू और उनके छोटे बेटे राजाराम की पत्नी थीं। वे एक महान योद्धा रानी थीं। ताराबाई ने न केवल प्रशासन संभाला बल्कि मुगल शासक औरंगजेब के खिलाफ संघर्ष का नेतृत्व भी किया। उन्होंने सेना का संचालन किया, शाही आदेश जारी किए और मराठा प्रतिरोध को मजबूत बनाए रखा। उनके नेतृत्व ने साबित किया कि महिलाएं शासन और युद्ध दोनों में सक्षम हैं।

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